जीवन का आनंद
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
3-1-26
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जीवन का आनंद,
विविध मानव
प्रकृति के अनुसार।
ऋषि मुनियों का आनंद
मन मिटाकर आत्मा परमात्मा एक करके
आत्मज्ञान पाना, ब्रह्म ज्ञान पाना।
शासकों के आनंद धन कमाना।
अधिकारियों का आनंद वेतन नहीं, रिश्वत पाने में।
धन के आनंद समझने वाले,,
नये नये घर लेने में
आनंद लेनेवाले,
संतानोत्पत्ति में आनंद लेनेवाले,
वैवाहिक जीवन में
पत्नी के होते रखैल में
जीवन आनंद लेने वाले,
तीन चार शादी करके
जीवन का आनंद
समझने वाले,
ईमानदारी जीवन में
आनंद समझनेवाले,
कर्तव्य पालन में
जीवन का आनंद समझनेवाले,
जी चुराने बहाना बनाने में जीवन का आनंद समझनेवाले,
राम जैसे एक पत्नी व्रत में
जीवन का आनंद
समझनेवाले।
कृष्ण सा द्विपत्नीवाले,
पतिव्रता धर्म को आनंद समझनेवाली,
वेश्यावृत्ति वेश्यागमन में
जीवन का आनंद समझनेवाले।
जीवन तो मानव जीवन
पर चाह और आनंद भिन्न भिन्न।
चोरी डकैती में आनंद ,
चोर को पकड़ने में आनंद।
जीव रक्षक का आनंद अलग।
जीव भक्षक का आनंद अलग-अलग।
मधुशाला में आनंद।
स्वार्थता अहंकार में आनंद।
निस्वार्थता त्याग में आनंद।
यात्रा में आनंद,
गपशप में आनंद
संगीतकार को,
लेखक कवि
कलाकार
बागवान
किसान
अनेक पेशेवर,
अनेक प्रकार का आनंद।
अपना अपना डफ़ली
अपना अपना राग।
सब के जीवन का आनंद
सुख मय जीवन बिताने में।
ईश्वर दर्शन ब्रह्मानंद में।
नौकरी में व्यापार में
चालक बनने में,
चालाक बनने में
ठगने ठगाने में
आनंद अनेक जीवन में।
आम आनंद सत्य में
परोपकार में, धर्म रक्षक में देश प्रेम में।
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