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Friday, April 10, 2026

अधूरी ख्वाहिशें

 अधूरी खुशियाँ

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

11-4-26.

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  मानव जीवन में 

 थोड़े में कहें तो 

 भूलोक के जीवन में 

पूरी खुशियाँ  न 

 दशावतार में,

 न शिव पुराण में 

 न नलदमयंती कै 

दुष्यंत शकुंतला की प्रेम कहानी में,

विश्व विजयी

 सिकंदर के जीवन में।

 न चक्रवर्ती दशरथ के जीवन में,

न पांडवों में,

 न कौरवों में 

 न महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी के जीवन में,

 नेहरू के जीवन में,

 इंदिरा गांधी फेरोजखाँ के जीवन में 

 नाम के साथ बनिया गाँधीजी के जोडने  से

 न जीवन की खुशियाँ,

 न कबीर के जीवन चरित्र में,

 न तुलसी के चरित्र मैं 

 जन्म से अंधै सूरदास के 

निजी जीवन में।

 न सुकरात के जीवन में,

न उपन्यास सम्राट के जीवन में।

स्वर्गीय राष्ट्रपति यही कहा करते थे,

 ख्वाब देखो,

 क्या ख्वाब देखने से

 पूरी खुशियाँ मिलेगी क्या?

सत्यं वद,

 इस नारे का आदर्श पुरुष सत्य हरिश्चन्द्र 

 के जीवन में दुख ही दुख।

 दानवीर कर्ण के जीवन में ,

गहराई से सोचता हूँ,

 न जीवन में,

 किसी को न मिली 

 पूरी खुशियाँ।

 राम कहानी सुनाना

 यह मुहावरा राम के जीवन की अधूरी खुशियों की झाँकी।

 हिंदी क्षेत्र में 

 राजभाषा बनाने में 

 आज़ादी के बाद ही अड़चनें।

 पूरी खुशियाँ 

 देश भाषा संस्कृत है तो

‌वह क्यों मृत्यु भाषा बनी।

 हिंदी के विकास मैं 

 नागरी लिपि की चर्चा 

 अब भी जारी।

मानव मन  अति चंचल।

न उसमें  पूरी खुशियाँ,

 महात्मा बुद्ध की तपस्या भी अधूरी,

 किस उद्देश्य से  वे संन्यासी बने,

 रोग, बुढ़ापे, मृत्यु रहित 

 मानव जीवन बनाना,

उनकी इच्छा अधूरी,

 भारतीय नदियों का राष्ट्रीयकरण अधूरी।

 कृषी प्रधान देश में 

‌झीलों, तालाबों और जंगलों को नाश करके 

 किसानों को गांव में

खेती तंज नगर की ओर

 आकर्षित करना

‌भावी पीढ़ी को पूरी खशियाँ न देंगी।

 रेगिस्तान को उपजाऊ भूमि बनाने के प्रयत्न कर रहे हैं,

हम उपजाऊ भूमि को

 रेगिस्तान बना रहे हैं

 पता नहीं भावी जीवन 

 पानी के तड़पेगा।

 पैसा  है, वह पूर्ण खुशियाँ बुढ़ापे में न देंगी।

 मानव अधूरी खुशियाँ से

 सदा के लिए आँखें बंद कर लैगा।

 अभिनेताओं को

 एक ओर धन, यश ,सब मिलते हैं,

 पर उनके व्यक्तिगत जीवन में न पूरी खुशियाँ।

संसार में रोग है,

 दुर्घटनाएँ हैं,

 बुढ़ापा है,

 अल्पायू है,

 निस्संतान लोग हैं,

 जन्म से अपाहिज,

 अंधे बहरे गूँगे 

 असाध्य रोगी 

 ग़रीबी, अमिरी

 जय-पराजय 

काम, क्रोध मद लोभ

 माया महा ठगिनी,

अधूरी ख्वाहिश से भरा

 भूलोक जीवन।





 








 



Wednesday, April 8, 2026

शहीद मंगल पांडे

 शहीद मंगल पांडे।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

9-4-2026

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नवयुवकों! 

आज़ाद देश में 

 आनंद से,

 मूल अधिकार पाकर

भ्रष्टाचार रिश्वत भरे

सांसद विधायक चुननेवाले 

 अल्पसंख्यक शासक

के समर्थकों।

 मत देनै लेने

 रिश्वत देने लेनेवाले 

 अपराधी मतदाताओं!

सुनो!

 देश की आज़ादी 

आसानी से न मिली।

तन,मन,धन, प्राण तजे,

कठोर कारवास के दंड भोगे,

 लाठी के मार रहे,

फाँसी पर चढ़े

 महान देश भक्त 

 त्यागियों के

 रक्त है की धारा  में 

पनपी ,

स्वतंत्रता का होम यज्ञ।

 उनमें पहली स्वतंत्र की

 आवाज़ उठाकर 

 अंग्रेज़ी अफ़सर को

 मारकर सिपाही क्रांति है के अगुआ थै 

शहीद मंगल पांडे।

अंग्रेज़ों ने  बंदूक  में 

 भरने गाय और स्वर की

 चर्बी लगाने

 सनातन धर्म और मुगल मजहब के विरुद्ध आदेश दिया।

अपने धर्म विरुद्ध कार्य करने  मंगल पांडे

 तीस वर्ष का नवजवान 

तैयार नहीं थे।

 वे अंग्रेज़ी सेना के

 सिपाही होने के 

बावजूद भी,

इस कार्रवाई के

विरूद्ध पहली आवाज़ उठाई।

 अंग्रेज़ी सैनिक अधिकारियों को मारा।

 देश और धर्माभिमानी

 मंगल पांडे के कारण 

 सिपाही कलह प्रारंभ हुआ।

मंगल पांडे को फाँसी की सजा मिली।

 तीस साल की उम्र 

 देश और धर्म के स्वाभिमान के लिए 

 साहस के कदम उठाए 

वीर त्यागी मंगल पांडे को

‌अंतःदिल से सादर प्रणाम।

 सिपाही कलह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में के लिए एक चिंगारी बनी।

 मंगल पांडे का त्याग 

 चिर स्मरणीय है,

चिर अनुकरणीय है।

 ऐसे त्यागियों के मार्ग 

 अपनाना देश की आज़ादी, एकता,

 राष्ट्रीयता बनाए रखने 

 अत्यंत आवश्यक हैं।

 आजकल के भोगैश्वर्य 

 भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी 

 देश के लिए कलंक।

 उन भोगियों का अनुसरण न करके 

‌मंगलपांडे, सुखदेव, राजगुरु, खुदीराम बोस

 वांचीनाथन आदि

 त्यागियों के अनुसरण ही

 देश कल्याण का सर्वोच्च मार्ग हैं।

 जय शहीद मंगल पांडे,

 जिनके कारण सुप्त भारतीय जाग उठे,

 विदेशियों को सिर दर्द बना।

 आज़ादी देकर भागना पड़ा।


 



 


 

 

 


Monday, April 6, 2026

छत्रपति शिवाजी महाराज

 [5:40 am, 07/04/2026] +91 97844 79720: 

मराठा एवं संस्कृत को राज भाषा घोषित किया

[5:40 am, 07/04/2026] +91 97844 79720: यह स्वरचित व मौलिक है।

[6:33 am, 07/04/2026] sanantha.50@gmail.com: छत्रपति शिवाजी महाराज

एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै तमिलनाडु

7-4-26

महाराष्ट्र सिंह,छत्रपति शिवाजी महाराज,

महाराष्ट्र साम्राज्य के मूल शक्ति,

मुगल साम्राज्य का सिंह स्वप्न,

गोरिल्ला युद्ध नीति के द्वारा महाराष्ट्र का निर्माता।

उनकी वीरता भरे वचन है--

भारत देश प्राचीनतम् देश है,

इस बात को कभी न भूलना।

धनी धन से, अक्लमंद अक्ल से, बलवान बल से

सेवा कीजिए।

शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु समर्थ रामदास,

उन्होंने शिवाजी के चिंतन में

धैर्य,धर्म और स्वराज्य सिद्धांतों के बीज बोये।

शिवाजी के राजनैतिक गुरु दादाजी कोंडदेव.

शिवाजी की माता जीजाबाई भक्ता और धैर्यवान स्त्री।

माता ने ही शिवाजी को बचपन से ही

रामायण,महाभारत की कथाओं के द्वारा 

हिंदू धर्म ,देश भक्ति भरकर हिंदवी स्वराज की प्रेरणा दी थी। 

शिवाजी महाराज के कारण ही जनता में हिंदुत्व की भक्ति बढी। 

जय शिवाजी महाराज।

उनके जीवन चरित्र पढकर उनकी नैतिक सिद्धांतों का अनुकरण ही 

उनके प्रति श्रद्धांजली होगी।

उनकी देशभक्ति,गुरुभक्ति,ईश्वर भक्ति, विदेशी धर्म का आदर,आदि

चिरस्मरणीय और अनुकरणीय होते हैं।

Sunday, April 5, 2026

जलीय जीवों की रक्षा

 जलीय जीवों की रक्षा।

 एस. अनंतकृष्णन, चैन्नै

 6-4-26

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नमस्ते।

जल प्रधान है,

 सभी जीव राशियों के लिए।

जल बिना न वनस्पति जगत।

 जल बिना न कोई जीव।

 ईश्वर की अद्भुत सृष्टि में 

 अंडे, पिंडज, स्वेज, उद्भिज्ज।

 इन में जल में उत्पन्न होकर जल में जीनेवाले जीव,

 जल -थल में जीनेवाले जल में ही जीनेवाले 

 इन  जलीय जीवन की रक्षा के प्रश्न क्यों?

जल प्रदूषण क्यों ?

 कारखानों के विषैले पानी को नदी में,

 समुद्र में छोड़ना।

 झीलों को नगर विस्तार 

 नगरीकरण के नाम नदारद करना।

 स्वार्थ मानव अपने लाभ के लिए अधिक

 जलीय जंतुओं को आहार के लिए,

 दवा के लिए 

पकड़कर नष्ट करना।

 तालाबों में विदेशी जंतुओं को छोड़ना,

 भारतीय पवित्र नदियों में 

 अब प्रदूषण अधिक।

 इस स्थिति में 

 जनता को जागृत करने कराने 

 जलीय जंतुओं की रक्षा करने में लगाना है।

 मछलियाँ और जलीय जंतुओं को पकड़ने में 

 नियंत्रण।

 जहाज़ द्वारा आनेवाले विदेशी जंतुओं से बचाना।

जलाशयों को निर्मल रखना,

 समुद्र और जलाशयों के पास  मछली घर की स्थापना करना।

 कानूनी कार्रवाई लेना।

कठोर कानून बनाना आदि।

 




 

 


 


 

 

 

रहबर हमारे

 नमस्ते वणक्कम्।

 बन गये रहबर लुटेरे देश के।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 अपनी हिंदी अपने विचार अपनी स्वतंत्र शैली।

6-4-26

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 हर पाँच साल के एक बार चुनाव।

 नेता बन जाते रहबर।

 पिछले चुनाव के वचन

 न निभाकर ,

 वहीं समस्या को नये ढंग से देने चतुर।

 जनता भुलक्कड़, वही नेता के अंधे अनुयाई।

 नेता अन्याय भी करें फिर भी पिछलग्गू।

 एक ओर राज धर्म के नाम भ्रष्टाचारी।

 प्रजातंत्र में दोष मतदाता का।

‌राजतंत्र में  प्रेमिका के लिए 

 लड़ाई झगड़ा, हजारों सिपाही की पत्नियाँ

 एक राजकुमारी के लिए विधवाएँ।

 अनाथ बालक बालिकाएँ।

 राजभक्ति राजा ईश्वर तुल्य।

 बड़े राजमहल, अनंतपुर में 

 असंख्य रानियाँ।

 खुशामद मंत्री, 

कवि केवल राजा की वीरता के प्रशंसक।

न जनता और देश पर ध्यान।

 अब प्रजातंत्र, आज़ाद देश,

 धन प्रधान पाश्चात्य शिक्षा,

 मातृभाषा भूलने लाखों-करोड़ों के खर्च।

 ये रहबर भारतीय संस्कृति बदलकर 

 शादी को बना दिया खिलवाड़।

 बात बात पर तलाक, परिणाम,

 वैवाहिक जीवन में अशांति।


 प्रजातंत्र देश , मंत्री के बेगार अधिकारी,

 मनमाना भ्रष्टाचार, न्यायाधीश वकील उनके साथ।

 चार्टर्ड अकाउंटेंट कर चुराने में निपुण रहबर।

 धार्मिक क्षेत्र में कदम कदम पर मंदिर,

 शिव, वैष्णव संप्रदाय में,

के भिन्न भिन्न आचार्य

 मानवता मानव एकता तोड़ने में निपुण।

धर्म मूल मजहब के आधार पर लडाइयाँ।

 ये रहबर न चाहते मानवता एकता।

 कहते हैं कलियुग, द्वापर युग में भी

 कुरुक्षेत्र धर्म क्षेत्र नहीं,

 त्रेता युग में सीता के प्रति अन्याय।

 जनसंख्या के आधार पर

 भ्रष्टाचार रीश्वत खोल

 उनके रक्षक अति बुद्धिमान वकील।

‌आज कल  के शिक्षित डाक्टर 

 करोड़ों खर्च करके 

 कार्पोरेट शेयर बाजार।

 मंदिर जितना पूँजी लगाते हैं 

 उतना वसूल।

 अंदर जाने 250/-

तेलंगाना ने के रामानुज मंदिर 

 ये रहबर।

 जिसकी लाठी उसकी भैंस के

 शासक, 40%अल्प संख्यक।

‌ये रहबर फिर भी देशोन्नति में आनंद अनंत।


एस.अनंतकृष्णन के द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

 

 







 



 



 


Saturday, April 4, 2026

प्रकृति

 प्रकृति के अनेक रंग।


एस. अनंत कृष्णन चेन्नई 

5/3/26

प्रकृति के विविध गुण 

 सब कुछ जानना समझना,

 मानव बुद्धि से असंभव।।

 सफेद रंग की चमेली,

 मनमोहक सुगंध 

 गुलाब की खुशबू 

 ऐसे भी सुंदर फूल 

 गंध हीन।

ऐसे भी फूल बड़े रंगीले

 पर बदबू से भरा।

 प्रकृति के गगन रंग 

 नीले काले उजाले।

 सूर्योदय सूर्यास्त के समय  लाल पीले।

 इंद्रधनुष के साथ रंग।

पानी समुद्र का खारा।

 वहीं पानी भाप बनकर 

काले बादल बिजली चमक वज्र ध्वनि 

 बरसने पर मीठा।

 विभिन्न भाषाओं के 

भिन्न-भिन्न लिपियाँ।

 क्रोटन्स के रंग-बिरंगे पत्ते।

हर एक पेड़ पौधों के

 पत्ते देख किसी कवि ने लिखा है,

 कैंची नहीं ईश्वर के हाथ में, कटि पत्तियाँ न्यारी।

 एक ही माँ बाप के बच्चे,

 सुंदर ,भद्दा काला गोरा, लंबा नाटा।

 मधुर स्वर कठोर स्वर।

 चतुर, चालाक, ठग

 ईमानदारी, 

 रामावतार के नील रंग,

 कृष्णावतार के श्याम रंग।

प्रकृति की सृष्टि में 

 रंग-बिरंगे, विभिन्न स्वभाव के जानवर,

 पालतू जानवर,

 जंगली जानवर।

हाथी ,ऊँट, हिरन 

 हिरन के भेद,

 सींगवाला,

 हिंदी वाला

 हर एक सृष्टि में 

अति विचित्रता।

 खून का लाल रंग

 पर उसमें भेद वर्गीकरण।

 सोचते सोचते 

 प्रकृति के रंग गुण

 ईश्वर की सृष्टि अति सूक्ष्म।

 नवरत्नों के रंग।

 सोना, चाँदी,

प्लाटिनम् के रंग।

 अति अनुपप

 अति अपूर्व।

 अति अनूठा।

 प्रकृति के रंग असंख्य।

 गुण में अति विविधता।

वचन की कीमत

 वचन की कीमत।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

4-4-26

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प्राण जाए पर वचन न जाए,

 यह मुहावरा मानव जीवन के अनुशासन और न्यायप्रियता के लिए 

 अनुकरणीय हैं।

 मानव मानव पर 

 भरोसा रखने

 वचन का पालन 

 अत्यंत आवश्यक है।

 भारतीय इतिहास में 

 वचन निभाने की कहानियाँ  मानव के 

 आदर्श चरित्र का उदाहरण है।

 आजकल के सांसद ,

विधायाक  बदनामी 

इसलिए है  कि  वे वचन 

निभाते नहीं,

 हर चुनाव में वही

वचन देते रहते हैं।

 धन के आधार पर 

 जय पराजय,

 तीस प्रतिशत अविश्वसनीय मत दाता 

 वोट ही नहीं देते।

 30% विपक्षी।

 10% गठन बंधन वोट।

 हिंदी में मतदाता  मत देने विश्वास  नहीं, 

 मत का भिन्नार्थ 

 सार्थक है।

 मत देना मत 

 ये वादा निभाते नहीं,

ऐसे विचार 

 हर एक के मन में,

 30%  अल्पमत के शासन।

 कच्ची सड़कें,

 पानी की तंगी 

 हर चुनाव में दूर करने का वादा।

  चुनाव आयोग करोड़ों के भ्रष्टाचार धन खर्च 

 रोकने असमर्थ।

 वचन निभाने अधिकारी ,प्रशासक,

 जनकल्याण योजना को

लागू करने बाधक हैं।

  हुमायूं ने राखी बाँधकर 

 राजपूत रानी  को सुरक्षा की वादा की, निभाया।

 उनका नाम आज भी आदरणीय है।

 चंद्रधरशर्मा गुलेरी की कहानी एक ही 

 लोकप्रसिद्ध  है

 उसने कहा था,

उसमें नायक अपने लड़कपन की प्रेमिका के

 पति की जान बचाने 

 अपनी वादा  निभाने

 प्राण दिये, 

वह सैनिक लहना सिंह का पात्रा मृत्यु शय्या पर उसके स्मरण चित्र पाठकों के मन में चिर स्मरणीय।

 अतः वचन की कीमत 

अमूल्य है,

 कर्ण ने वचन निभाने 

 कुंती का समर्थन किया।

 अतः मानवता निभाने

 वचन निभाना 

 चरित्र बल के लक्षण हैं।