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Tuesday, February 3, 2026

चुनौती

 चुनौतियों के अजगर।

एस.अनंतकृष्णन,

चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-2-26.

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 मानव जीवन ही नहीं,

 पशु-पक्षी के जीवन में भी,

चुनौतियों के अजगर।

 अंडे निगलने नाग तैयार।

 हिरन को आहार बनाने 

 बाघ तैयार।

 संक्रामक रोग फैलाने 

 मच्छर मक्खियाँ तैयार।

मकड़ी के जाल तैयार,

 लघु  कीड़े को पकड़ने।

 कीड़े मकोड़े खाने

 पेड़ पौधे भी हैं 

प्राकृतिक कोप,

आँधी तूफान सुनामी आदि।

विद्यार्थी जीवन में 

 परीक्षा अंक।

 नौकरी की चुनौती।

 शादी योग्य पत्नी पति 

चुनौतियों के अजगर।

कोई धंधा शुरू करने के पहले 

 सरकारी अनुमति

 रिश्वत आदि।

 फुटपाथ के व्यापारी से

 मुफ्त में पुलिस ले जाने वाली वस्तुएँ।

  संक्षेप में कहें तो

 भूलोक में माया, लोभ 

क्रोध,  अहंकार काम 

 ये सब चुनौतियों के अजगर।

Sunday, February 1, 2026

गाँधी

 महात्मा गांधी 

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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2-2-26

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श्री मोहन दास करमचंद गाँधीजी

 विश्ववंद्य नेता।

अहिंसावादी 

 सत्याग्रही

 नमक सत्याग्रह 

 भारत छोड़ो आंदोलन 

 हर एक भारतीय के दिल में बसे,

आराध्य नेता।

 एक ही नेता का चरित्र 

 विदेशी निदेशक के द्वारा 

 चित्रपट।

  आज  उनके वंशज का पता नहीं ।

 खान परिवार गाँधी परिवार हो गया।

 गाँधी बनिया,

 व्यापारी वैश्य।

आज गाँधी माने

 इंदिरा गांधी,

 मेनका गांधी 

 राजीव गाँधी

 राहुल गांधी,।

 इटारली बहु

 सोनिया गाँधी।

 प्रियंका चार्ल्स नहीं 

 प्रियंका गाँधी।

 प्रसिद्ध नेता के नाम जोड़कर  उसके वंशज बन गए।

 सब की नागरिकता द्विदेशी। 

 भारतीय लोगों को 

सोचकर गांधी वंश का 

 पता लगाकर

 संसार के सामने लाना है।

 वास्तविक गाँधी वंश का आदर

 युवकों को जान समझकर 

 आदर करना चाहिए।

Saturday, January 31, 2026

मजदूर

 मजदूर के हाथ।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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1-2-26

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मैं करोड़ पति हूँ।

 कारखाना खोलना है,

 घर बनवाना है।

 पूँजी मेरे हाथ में।

 मैं इंजीनियर हूँ,

 योजना है

 मैं उद्योग पति हूँ

 मैं सिनेमा निर्देशक हूँ।

पर उपर्युक्त लोगों की योजना लागू करने

 चाहिए मजदूर के हाथ।

 स्वर्ण और हीरे का खान।

 कोयले के खानों का पता लगा है।

 पर इन सब को निकालने

 मजदूर के हाथ।

शहर भर कूड़ा कचरा है

 निकालने  चाहिए 

 मज़दूर के साथ।

 नल की व्यवस्था 

 बिजली की सुविधा 

 सब के लिए चाहिए 

मजदूर के हाथ।

 खेत में बीज बोने

 फसल काटने

 बोरे में बाँधने 

चाहिए 

मजदूर के हाथ।।

 मजदूर नहीं तो

  गड्ढे खोदकर

 बिजली स्तंभ का

 स्थापित करना असंभव।

माली न तो बाग नहीं।

 हर हाल, अस्पताल मंदिर साफ रहना है तो

 चाउ मजदूर के हाथ।

शौचालय सार्वजनिक 

स्थान में 

 साफ़ करने मज़दूर के हाथ।,

 पैसे, बड़े पद, रईश आदि  मजदूर साथ हाथ न देगा तो 

 कुछ न होगा जान।

मजदूर के हाथ मजबूत।

 हर क्षेत्र में मजदूर 

 के साथ न लगने पर

 सारे काम चौपट जान।।












 


Thursday, January 29, 2026

लाला लाजपत राय

 +लाला लाजपत राय++++++++++++++++

एस . अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

+++++++++30-1-26


भारत के स्वतंत्रता

 संग्राम में तीन नाम लाल-पाल-बाल के नाम से प्रसिद्ध हैं।

 लाल का मतलब लालालजपत राय।

 पाल का मतलब है

 विपिन चंद्र पाल।

 बाल का मतलब है

 बालगंगाधर तिलक।

 लाला लाजपत राय है

 पंजाब के सिंह।

 लाहौर में साइमन कमिशन के विरुद्ध 

 आंदोलन में लाठीचार्ज सहे। इसी कारण वे देश के शहीद हो गए।

 अपने प्रिय नेता की मृत्यु के कारक पुलिस अधिकारी 

सांडर्स को भाग्य सिंह, सुखदेव चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु मिलकर 

 हत्या कर दिया।

 इस कारण से ही 

तीनों को अंग्रेजी सरकार ने फाँसी पर चढ़ा दिया।

 लाल ने  पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना की।

हिंदी  के प्रचार में उनका योगदान भी महत्वपूर्ण है।

 उनके यादगार में अनेक संस्थान की स्थापना हुई।

लाला लाजपत राय की जय हो।

उनके देशभक्ति मार्ग पर चलना ही हर भारतीय को उनके प्रति बड़ी श्रद्धांली होगी।

Wednesday, January 28, 2026

कल्पनाएँ

 कोमल कल्पनाएँ

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

29-1-26

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कोमल कल्पनाएँ,

परिस्थितिवश

 कठोर भी हो जाती है।

सर्वे जना सुखिनो भवन्तु 

 जय जगत

 वसुधैव कुटुंबकम् 

 ये कोमल कल्पनाएँ।

 मंडन मिश्र का तोता

 वेद मंत्र सुनाता।

 डाकू का तोता 

विपरीत।

 भद्रकुल की कलपनाएँ कोमल,

विश्वकल्याण के लिए।

खलनायक, चुनाव लड़नेवालों की कल्पना 

 विपरीत।

करोड़ों के खर्च 

कैसे पाँच साल में 

कमाना शत्रु पक्ष

 को हराने के षडयंत्र 

 कल्पनाएँ।

 साहित्यकार की कल्पना 

 जगतोद्धार के लिए 

उनमें धन लोभी स्वार्थी 

 साहित्यकार समाज बिगाड़ने अश्लील कल्पनाएँ।

 ईमानदारी अधिकारियों की कलपनाएं कोमल

 जनकल्याणकारी।

पर भ्रष्टाचार रिश्वतखोरों की कल्पनाएँ न्याय विरुद्ध।

 रत्नाकर कीकल्पना 

  चोरी डाकू,

वाल्मीकि ने कल्पना 

दिव्य शक्ति भक्ति।

राष्ट्र प्रेमियों की कल्पना 

 आंबी जैसे देश द्रोही की कल्पना कठोर।

 तटस्थ परोपकारी लोगों की कल्पना अलग।

 कर्ण के जैसे।

 दुर्योधन के संग

 कृतज्ञतावश अलग।

 पाश्चात्य देशवासियों की कल्पना जन हित 

आविष्कार। पर

 भारतीय कल्पना 

 जगत मिथ्या,

ब्रह्म सत्यं 

 ईश्वर भक्ति।

 भारतीय सुखी वातावरण 

 भोजन पदार्थ के

 हजारों किस्म।

शांति अहिंसा प्रिय देश।

 अतः कल्पनाएँ कोमल 

 मानव कल्याणकारी।

 सोचिए विचारिए 

 देश कल्याण की कल्पनाएँ।

समाज कल्याण की कल्पनाएँ 

 मातृभाषा रक्षा की कल्पना।

विश्व हित की कल्पनाएँ।

हिंदी और तमिलनाडु प्रचारक

 You tube. सम्मान पत्र ठीक  है, लेकिन दर्शक कम।

 हमेशा की तरह प्रमाण पत्र देंगी तो 

बढ़िया रहेगा।

 हम  भी अलग संकलन करने की सुविधा होगी।

 इस शुभ कार्य में 

 धनी भारतीय भाषा प्रेमी

 सहयोग राशि भेज सकते हैं, कवियों को भी विशेष सम्मान दे सकते हैं।

आदि काल से भारतीय भाषाएँ व्यक्तिगत धनियों के कारण ही जिंदा है।

 लेखक सब धनी नहीं है।

 तमिलनाडु में तो नौकरी की संभावना ही हिन्दी के द्वारा नहीं।

तमिलनाडु के प्रचारक 

 त्यागी बनकर हिंदी की सेवा कर रहे हैं।

 खासकर तमिलनाडु के हिंदी सेवकों को प्रोत्साहित करना है।

 आप लोग हिंदी प्रोफेसर, हिंदी अधिकारी डाक्टरेट का ही हिन्दी सेवक मानकर बढ़िया रकम दे रहे हैं।

 तमिलनाडु में हिंदी सीखनवालों की संख्या डाक्टरेट लाखों कमानेवालों से नहीं,

 तन मन से हिंदी प्रचार सभा की उपाधि लेकर 

  हजारों प्रचारक हिंदी सबेरे और शामको हिंदी चाहकों को हिंदी सिखा रहे हैं। इनके समर्थन में 

 न केंद्र सरकार और न राज्य सरकार।

 ये LIC Agent के समान सभा के परीक्षार्थी संख्या के आधार पर कमिशन से जी रहे हैं।

 इनकी हालत न समझ कर उनको प्रोत्साहित न करके एक लाख दो लाख मासिक वेतन लेकर दस विद्यार्थियों के प्रोफेसर  को ही ‌प्रोत्साहित कर रहे हैं।

 तमिलनाडु में हिंदी प्रचारकों की हालत जानना है।

 कम आमदनी अधिक परिश्रम।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

  

 



Tuesday, January 27, 2026

 आत्मकथा हिंदी सेवा का मूल्य । 

एस. अनंत कृष्णन चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

 

आपके भाव, अनुभव और गर्व को केंद्र में रखकर—सरल, स्पष्ट और सच्चे स्वर में:

मैंने हिंदी को कभी आजीविका का साधन नहीं बनाया, फिर भी हिंदी ने मुझे जीवन में गौरव दिया। धन की दौड़ में जब चारों ओर लोग अंग्रेज़ी को सफलता की कुंजी मान बैठे, तब भी मैंने भारतीय भाषाओं का साथ नहीं छोड़ा। हिंदी के प्रचार के लिए मुझे विरोध सहना पड़ा, अपमान झेलना पड़ा, यहाँ तक कि अपने ही प्रदेश में “द्रोही” कहे जाने का कष्ट भी उठा। परंतु इन सबके बीच मेरा आत्मसम्मान कभी डगमगाया नहीं, क्योंकि मुझे यह विश्वास रहा कि मैं गलत नहीं, अपने दायरे में सही कर रहा हूँ। साहित्य से मिलने वाला पारिश्रमिक भले ही कम रहा हो, पर हिंदी के कारण जो आत्मिक संतोष और पहचान मुझे मिली, वह किसी धनराशि से बड़ी है। आज भी मैं यही मानता हूँ कि हिंदी की सेवा करना मेरे लिए घाटे का सौदा नहीं, बल्कि जीवन का सौभाग्य है—और यही मेरा गर्व है।

[27/01, 9:18 pm] sanantha.50@gmail.com: आप तो गलत समझा रहे हैं।

आपने पहले ही कह दिया 3500/रूपये दूँगी।


मैं तो मान लिया और लिख दिया।

 आपने पैसे भी भेज दिये।

धन्यवाद जी 

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 मुझे मालूम है कि प्रकाशन करना  

 मुश्किल है।

 मैंने लेखकों की बुरी    दशा लिखा है।

 बस इतना ही।

 आप प्रकाशित करेंगे तो

 दो तीन प्रतियाँ भेजिए।

 आपने कहा मेरा नाम भी लिखा जाएगा।

धन्यवाद।

संक्षिप्त रामायण लिखी अनुवाद किया।

 रामायण प्रचार परिशोधन प्रतिष्ठान ने प्रकाशित किया।

 उसमें मूल लेखक डा.विशाल भरद्वाज ट

का नाम 

 और अनुवादक मेरा नाम लिखा है।

 अंतिम पृष्ठ में मेरा परिचय भी।

 वह आध्यात्मिक सेवा बिल्कुल मुफ़्त।

 भगवान देगा तो छप्पर तोड़कर देगा। लेगा तो छप्पर उड़ाकर लेगा।

जय श्रीराम।

 हिंदी विरोध प्रांत में 

 सर्वत्र हिंदी विरोध।

 तमिलनाडु सरकारी स्कूल में स्नातकोत्तर अध्यापक।

 ईश्वरीय देन।

[मैं पंद्रह  हजार की प्रतीक्षा में था।

 कम से कम दस हजार।

 एक मज़दूर  भी दो घंटे काम के लिए ढाई हज़ार माँगता है।  

 एक भिखारी भी अधिक कमाता है।

 3500/तो अधिक कम है।

 

पर साहित्यकार सब की स्थिति है ऐसी ही है।

 दिमाग से लड़ते हैं,

 प्रकाशन खर्च अलग।

 रामशंकर  झांसा के प्रसिद्ध कवि, 

वे अपनी पुस्तकों  की ताँता लगाकर  अपनी राम कहानी लिखते हैं।

 हिंदी किताबें किलो 

 15रूपये।

 अतः पता चलता है कि भारतीय भाषाओं का महत्व धीरे धीरे  युवकों के मन से मिट रहा है।

 इसलिए मैं धन को प्रधानता न देकर  हिंदी की सेवा  कर रहा हूँ।

 भारतीय भाषाएँ  देवभाषा  संस्कृत भी मृत्यु दशा में।

 125 वर्ष की खड़ी बोली

 व्रज माधुरी , मैथिली, अवधि आदि से नौ दो ग्यारह हो रहे हैं।

 हिंदी के विकास को रोकने तमिलनाडु कटिबद्ध है।

 अर्थ को छोड़कर 

 भारतीय भाषाओं की रक्षा करने हिंदी विरोध आंदोलन के समय मैं मार खाकर अपमान सहकर 

 तमिल द्रोही की उपाधि पाकर देश की एकता के लिए हिंदी का प्रचार कर रहा हूँ। सब ने कहा, हिंदी छोड़ो, गणित सीखो। मालामाल बन जाओगे।पर सच्चे सेवकों के साथ भगवान रहता है।

 आगे अंग्रेज़ी मोह से भारतीय युवक युवती सांसद विधायक सरकारी अधिकारी जिला देश,शिक्षा विभाग  के अधिकारी एंटी कंपनियां, निजी उद्योग जीविकोपार्जन के साधन के इस जमाने में 

 भारतीय भाषाओं की रक्षा सिवा  मानवेत्तर शक्ति ही कर सकती है।

 अनेक प्रांत  महाराष्ट्र   तक हिंदी   के विरोध में 

 कर्नाटक भी।

 भारत भर में  अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल  बढ़ रहे हैं। वहाँ नाम मात्र के लिए भारतीय भाषाएँ

 दसवीं कक्षा तक।

 उसके बाद अंग्रेज़ी माध्यम  अंग्रेज़ी मिश्रित 

संवाद में कितने गौरव 

 युवक युवतियाँ

 अनुभव करती हैं,

 भारतीय भाषाओं के पतन युवकों की अंग्रेज़ी प्रियता विज्ञापनों में 

 मोटे अक्षरों में अंग्रेज़ी 

  भारतीय भाषाएँ

 सिगरेट बाक्स में 

 धूम्रपान  फेफड़ों के लिए बरा है लिखने के समान है।

 शराब बोतल में 

शराब पीना घर और देश के लिए खराब लिखने के समान है।

 केंद्र सरकार और प्रांतीय सरकार दोनों दिल से अंग्रेज़ी स्कूल खोलने की अनुमति ।

 अनुमति लेने अब पचास लाख तक भ्रष्टाचार  ।

जय हिन्दी बाहर

व्यवहार में जीविकोपार्जन की भाषा 

धन कमाने की भाषा

उच्च शिक्षा की भाषा 

सर्वव्यापी अंग्रेज़ी राज।।

 एक पृष्ठ टंकण के लिए 

 सौ रूपये।

डाक्टर दस मिनट कंसल्ट के लिए हज़ार रूपये।

सद्यःफल जनता देने तैयार।

 एक कविता के अनुवाद 

  यों ही नाड़ी देख कर नहीं,

 चिंतन चिंतन उचित शब्द का प्रयोग फिर टंकण।

 हृदय से साहित्यकार को 

 पैसे दे नहीं सकते।

 क्योंकि एक किताब को प्रकाशित करके जन जन तक पहुंचाना आसान नहीं।

हो सकता है हिंदी प्रांत की सरकार पैसे दे सकती है।

पर उनके अपने नियम हैं।

मेरे दोस्त एक लाख तक खर्च करके बिक्री के अभाव में रो रहा है।

 संस्कृत के महान ब्राह्मण 

धन या संस्कृत के सामने धन को अपना लिया।

 विदेश में भारतीय वेद उपनिषद  अंग्रेज़ी माध्यम के कारण नित्यानंद जो भारतीय  अधिकारियों के सामने  अपराधी है,

वह अरबपति एक अलग देश के निर्माण।

 भारतीय भाषाओं के कारण नहीं अंग्रेज़ी के कारण।

 कोई भी राजभाषा अधिकारी,

 हिंदी प्राध्यापक 

 सांसद विधायक 

 अपनी संतानों को भारतीय भाषा माध्यम के द्वारा शिक्षा देना अमर्यादित अपमानित मानता है।

संस्कृत के प्रकांड विद्वान अंग्रेज़ी शासन काल में 

तुरंत अंग्रेज़ी के सिलवर  टंक  नाम पाने,

अंग्रेज गुमास्ता बनने,

 उनके खुशामद करने में अपनी दिव्य भाषा

 यहाँ तक गायत्री मंत्र भी भूल गये।

 अर्थ प्रधान ब्रह्मांड में 

 चांदी सोने के सिंहासन हीरे के मुकुट के आश्रम आचार्यो को मालामाल बनाने में लोग तैयार।

 अपनी भाषा की बरबादी पर विचार देने न तैयार।

  अंग्रेज़ी के डाकमेट के टंकण में एक दिन हजारों की आमदनी।

 अनुवादक अपने 

समय  को  एक मजदूर में लगने पर हजार रुपए।

 सोचिए उपन्यास सम्राट भी ग़रीबी में।

  अतःआज की परिस्थिति में आम विद्वत जनता हिंदी के लिए खर्च करने तैयार नहीं।

हर गाँव में अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल।

 हर गाँव में विदेश में नौकरी।

 मेरे शहर पवनी में 

 हर घर मे विदेशी नौकरी।

 उनके लिए रूपये हाथ का मैल।

अड़ोस पड़ोस देखने पर कर्जा लेकर अंग्रेज़ी माध्यम पढ़ाने तैयार।

आ सेतु हिमाचल में यही स्थिति है।

 मातृभाषा के पंडितों के घर में पैसों की तंगी।

 मनःसाक्षी से बोलिए 

 दिव्य भाषा संस्कृत से अधोगति की हालत में 

 भारतीय भाषाएँ।


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना