चैन का मार्ग
नमस्ते। वणक्कम्।
जीवन में सुख और दुःख मानो जन्म के साथ ही ईश्वर द्वारा भाग्य-रेखा में लिख दिए जाते हैं।
तमिलनाडु जैसे प्रतिकूल, हिंदी-विरोधी वातावरण में भी मुझे हिंदी की सेवा करने का अवसर मिला और अपने सीमित दायरे में सम्मान तथा उच्च पद प्राप्त हुए। यह सब ईश्वर की कृपा है।
इक्कावन वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद मेरी पत्नी ईश्वर में विलीन हो गई। आज जो अकेलापन और असह्य वेदना मैं अनुभव कर रहा हूँ, उसे सहने की शक्ति भी शायद उसी ईश्वर की देन है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भी रोए थे। इसलिए कहा जाता है—"घर-घर में रामकहानी।" जीवन में दुःख किसी एक का नहीं, हर घर का सत्य है।
समाज का अध्ययन, महान व्यक्तियों के जीवन का चिंतन और श्रेष्ठ साहित्य का मनन मानसिक अशांति को दूर करने का सरल मार्ग है।
तमिल के महान कवि कुमरगुरुपरर् ने नीति
नेरि विळक्कम् (नीति रीति व्याख्या )कहा है—
தம்மின் மெலியாரை நோக்கித் தமதுடைமை
அம்மா பெரிதென் றகமகிழ்க;
தம்மினும் கற்றாரை நோக்கிக் கருத்தழிக;
கற்றதெல்லாம் எற்றே, இவர்க்கு நாம் என்று.
भावार्थ:
अपने से अधिक अभावग्रस्त लोगों को देखकर यह अनुभव करना चाहिए कि ईश्वर ने हमें बहुत कुछ दिया है, इसलिए कृतज्ञ और प्रसन्न रहना चाहिए। साथ ही, अपने से अधिक विद्वानों को देखकर यह विनम्रता रखनी चाहिए कि हमारा ज्ञान अभी बहुत कम है, इसलिए निरंतर सीखते रहना चाहिए।
इसी भाव को महान तमिल कवयित्री औरैयार ने इन शब्दों में व्यक्त किया है—
"हमने जो कुछ सीखा है, वह मुट्ठी भर है; जो नहीं सीखा, वह अनंत सागर के समान है।"
यही जीवन का संदेश है—जो मिला है उसके लिए कृतज्ञ रहें, जो नहीं सीखा उसे सीखने के लिए विनम्र रहें, और जो दुःख मिला है उसे धैर्यपूर्वक स्वीकार करते हुए आगे बढ़ें।