शहर की भाग दौड़ में।
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।
7-10-26.++++++
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शहरी जीवन
तनाव से पूर्ण।
घर एक जगह,
कार्यालय एक जगह।
अधिक दूरी।
समय पर जाना आना
कभी कभी रेल से थोड़ी दूर,
उतरकर बस से थोडी दूर।
पैदल थोड़ी दूर।
शहरी भाग दौड़ में
यात्रा में ही अधिक समय।
सुबह घर से निकला तो रेल में ही नाश्ता।
कर्मचारियों के लिए ।
घर की तलाश में,
घर के मालिक की शर्तें मानने में,
अपार्टमेंट में ही अड़ोस पड़ोस वालों के व्यवहार में
वाहन पार्किंग में
शहरी भाग दौड़।
जो वहाँ के
रहन- सहन के आदी हो जाते हैं,
सब्र कर लेते हैं।
गाँव से जो शहर आते हैं,
उनके लिए तनिक भी
शहरी तडक भटक पसंद नहीं होते।
द्वि चक्र गाड़ी हो या
पैर गाड़ी भी हो
बाज़ार में स्टैंड मिलना मुश्किल।
भूल से छोड़ने पर पुलिस की परेशानियां।
चोरों का भय, जेबकतरे का भय।
थोड़े में कहना है तो
शहर के भागदौड़ में
सब्रता की जरूरत है।
शहर की भाग-दौड़ में
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक
7-10-2026
शहरी जीवन
तनाव से पूर्ण।
घर एक जगह,
कार्यालय दूसरी जगह—
दोनों के बीच
लंबी दूरी।
समय पर जाना,
समय पर लौटना—
कभी रेल से थोड़ी दूर,
उतरकर बस से थोड़ी दूर,
फिर पैदल भी थोड़ी दूर।
शहरी भाग-दौड़ में
यात्रा में ही
बीत जाता है
अधिक समय।
सुबह घर से निकले,
तो कभी-कभी
रेल में ही नाश्ता।
कर्मचारियों के लिए
घर की तलाश,
मकान मालिक की शर्तें,
अपार्टमेंट में
अड़ोस-पड़ोस वालों का व्यवहार,
वाहन की पार्किंग—
हर जगह
शहरी भाग-दौड़।
जो लोग
इस जीवन के
रहन-सहन के आदी हो जाते हैं,
वे धीरे-धीरे
सब्र करना सीख लेते हैं।
लेकिन गाँव से
जब कोई शहर आता है,
तो उसे यह
शहरी तड़क-भड़क
तनिक भी पसंद नहीं आती।
द्विचक्र वाहन हो
या पैदल चलना हो,
बाज़ार में भी
जगह मिलना मुश्किल।
भूल से वाहन छोड़ दिया,
तो पुलिस की परेशानी;
चोरों का भय,
जेबकतरों का भय—
हर कदम पर
सावधानी जरूरी।
थोड़े में कहना हो तो—
शहर की भाग-दौड़ में
सुविधाओं से अधिक
सब्र की जरूरत है।
शहरी जीवन
सिर्फ इमारतों का नाम नहीं;
यह तो
समय से संघर्ष करते हुए
जीने की एक कला है।