नमस्ते वणक्कम्
आलस्य का विष
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
27-4-26
++++++++++++
तमिल में एक कहावत है—
"काणिच्चोम्बल कोटि नष्टम्"।
एक छोटे-से काम में
ज़रा-सी आलसी,
लापरवाही बनकर
करोड़ों का नुकसान कर देती है।
कबीर ने भी चेताया है—
"कल करे सो आज कर,
आज करे सो अब;
पल में प्रलय होएगी,
बहुरि करेगा कब?"
दिन आते-जाते रहते हैं,
हरि से होता क्या?
अब पछताने से क्या होगा,
जब चिड़िया चुग गई खेत?
तमिल के विश्वविख्यात कवि
तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल में कहा—
आलस्य के कारण
परिवार तक नष्ट हो जाता है।
प्रयत्न न करने पर
घर-परिवार बिगड़ते हैं,
और अपराध भी बढ़ते हैं।
आज का पाठ यदि
आज ही पढ़ लिया जाए,
तो परीक्षा देना
सरल हो जाता है।
पर साल भर का पाठ
इकट्ठा कर लेने से
परीक्षा के समय
मन व्याकुल हो जाता है।
नेत्र बिगड़ जाने के बाद
सूर्य नमस्कार से क्या लाभ?
आलसी व्यक्ति
किसी भी कार्य में
सफलता प्राप्त नहीं करता।
आलसी प्रशंसा का पात्र नहीं,
जीवन की प्रगति में
सुस्ती सबसे बड़ी बाधा है।
बचपन से ही चुस्त रहना—
यही सफलता का रहस्य है।
नमस्ते वणक्कम्।
आलस्य का विष
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
27-4-26
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तमिल में एक कहावत है—
"काणिच्चोम्बल कोटि नष्टम्"।
एक छोटे-से काम में
ज़रा-सी आलसी,
लापरवाही बनकर
करोड़ों का नुकसान कर देती है।
कबीर ने भी चेताया है—
"कल करे सो आज कर,
आज करे सो अब;
पल में प्रलय होएगी,
बहुरि करेगा कब?"
दिन आते-जाते रहते हैं,
हरि से होता क्या?
अब पछताने से क्या होगा,
जब चिड़िया चुग गई खेत?
तमिल के विश्वविख्यात कवि
तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल में कहा—
आलस्य के कारण
परिवार तक नष्ट हो जाता है।
प्रयत्न न करने पर
घर-परिवार बिगड़ते हैं,
और अपराध भी बढ़ते हैं।
आज का पाठ यदि
आज ही पढ़ लिया जाए,
तो परीक्षा देना
सरल हो जाता है।
पर साल भर का पाठ
इकट्ठा कर लेने से
परीक्षा के समय
मन व्याकुल हो जाता है।
नेत्र बिगड़ जाने के बाद
सूर्य नमस्कार से क्या लाभ?
आलसी व्यक्ति
किसी भी कार्य में
सफलता प्राप्त नहीं करता।
आलसी प्रशंसा का पात्र नहीं,
जीवन की प्रगति में
सुस्ती सबसे बड़ी बाधा है।
बचपन से ही चुस्त रहना—
यही सफलता का रहस्य है।
जो जागे, वही पाए,
जो सोये, वही खोए।