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Sunday, March 29, 2026

लोभ की जंजीरें

 लोभ की जंजीरें 

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

30-3-26

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लोभ की जंजीरें 

बाँध  मन की चंचलता में 

फँस जाएंँगे तो

वह भवसागर के

 भँवर में ले जाकर 

बचने न देंगी।

  अपने पास सर्वसंपत्ति होने पर भी नाते-रिश्तेदारों और अड़ोस पड़ोस के

 आनंदोल्लास देखकर 

 लोभी का दिल जलेगा ही।

लोभ की जंजीरें आजीवन रहेंगे ही।

 सुंदरता देखकर जलन,

  लोभी की वस्तुएँ जैसी

  अन्यों के साथ देखकर

 अति दुख का एहसास होगा ही।

 समान वस्तुएँ होने पर भी,

 रंग  भेद, उनकी सुंदर

 देखरेख से मानसिक दुख  होगा ही।

 शांति क्या है? संतोष क्या है? आनंद क्या है?

 मृत्यु पर्यन्त जानने का

 प्रयत्न लोभी जानेगा, समझेगा ही नहीं।

 अभाव! अभाव! अभाव!

 यही उनके  सहज प्रवृत्ति होगी।

 लोभी सेदूसरों की तरक्की सहा नहीं जाता।

 लोभ की जंजीरें तोड़ने का प्रयास भी नहीं करता।

 संताप भरे विचार

 चिंतन से  तड़प तड़प कर घुट घुटकर  उदास चेहरे से ही इस लोक की लीला समाप्त कर देगा।

Saturday, March 28, 2026

अकाल की कल्पना

 कल्पना का जाल

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नै

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

29-3-26

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मानव ज्ञान चक्षु प्राप्त पशु।

  जिज्ञासु प्रवृत्ति वाला मानव

विचारशील और चिंतन शील।

  यथार्थ घटनाएँ,

 वास्तविक दृश्य

उसकी है कल्पना का आधार।

पक्षी को देखा,

उड़ने की कल्पना,

 परिणाम हवाई जहाज का आविष्कार।

 दृश्य, दृश्य से विचार चिंतन सच्चाई के आधार पर  कल्पना,

परिणाम आदर्शोंन्मुख यथार्थवाद।

 रंग-बिरंगी बिल्लियों को देखा, सोचा, मानव की एकता की कल्पना की।

एक ही बिल्ली ने बच्चे दिये नाना रंग के।

कल्पना जागी,

 कवि ने लिखा

 भले ही रंग भिन्न-भिन्न,

 पर एक ही माँके बच्चे।

 आगे इस की कल्पना,

एक ही भारतवासी,

भारत माौ एक

 कश्मीरियों के ,

 उत्तर प्रदेश के गोरे लोग,

दक्षिण के काले लोग

 भिन्न-भिन्न भाषाएँ,

 आसेतु हिमाचल में 

 विचारों की एकता,

 आध्यात्मिक एकता,

कैलाश का शिव,

रामेश्वर का शिव

 लोकनाथ विश्वनाथ 

 एकता की यथार्थता

 आदर्श एकता प्रेरणा।

 उत्तर के बाढ़ भरी जीव नदियाँ,

दक्षिण के सूखे इलाके,

  यथार्थ में कल्पना 

 जोड़ों नदियों को,

 व्यर्थ पानियों को 

 नदियों को जोड़कर 

 देश को समृद्ध बनाओ।

उत्तर के गेहूँ, दक्षिण के चावल, पान सुपारी।

 समृद्ध कृषि प्रधान भारत भूमि

विश्वभर के अन्नदाता,

 पाश्चात्य बर्फीले,

आहार सामग्रियों का अभाव,

 अतः भारत को औद्योगीकरण के नाम से 

 मरुभूमि मत बनाओ।

 सोना चांदी,रकम

 भूखे के सामने कुछ नहीं 

 खेती की प्रधानता पर ध्यान रखो,

 विश्व भर को भूख से बचाओ,

स्वर्ण उगलते कृषी भूमि को कारखानों की  भूमि

 बनाकर भावी पीढ़ियों के लिए भारत को अकाल-ग्रस्त मत बनाओ।

 मैदान टच कहानी याद रखो,

 मैदान ने वर पाया,

 जिसको वह छुएगा,वह सोना बनना है,

वर मिल गया,

 उसकी मनोकामना पूरी हुई।

 पत्नी बेटे माँ बाप जिसको भी स्पर्श करता,

 बन जाता सोना।

 भूखे लगी, खाने भोजन पर हाथ रखा तो

 भोजन सोना।

समझा भोजन ही प्रधान।

 यह साधारण कल्पना नहीं,

 भारत के कृषी संपन्न देश को नगरीकरण, नगर विस्तार के नाम से 

 मरुस्थलीय प्रदेश बनाना

 सही नहीं,

 झीलों का नदारद करना

 समृद्ध भारत भूमि को

 मृग मरीचिका बनाना है।

वहाँ मरुभूमि को कृषि प्रधान बना रहे हैं,

 यहाँ कृषी प्रधान को

‌सद्यःफल के लिए 

 नगर विस्तार।

 भारतीय सहनशीलता 

 पाश्चात्य भाषा धन दे रही है,

 पर पारिवारिक शांति नष्ट कर रही है।

 तलाक बढ़ रहा है।

 जितेंद्रियता, मर्यादा पुरुषोत्तमता  अशांति ला रही है।

  यही कल्पना कीजिए,

 भारत को कृषी प्रधान बनाइए।

न तो  भावी पीढ़ी अकाल पीड़ित  दाने दाने के लिए तड़पेगा ही।

 यह कल्पना भावी अकाल भारत की सावधानी।

Friday, March 27, 2026

विश्व रंगमंच दिवस

 विश्व रंगमंच दिवस।

 एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

28-3-26.

समाज में क्रांति लाने,

 सुप्त जनता को जगाने 

 नये विचार  चिंतन बढाने

 नाटक और अभिनेता का मुख्य अंग रहा।

 जीवन में   नारियों के

 जागृत करने 

 आज़ादी  के  संग्राम में 

 देश भक्ति जगाने 

‌अंग्रेजों के दमन नीति से

 उनके आँखों में धूल झोंकने,

 भक्ति वेश मैं अंग्रेज़ी अत्याचार के विरुद्ध 

 स्वतंत्रता की भावना जगाने अंग्रेज़ी के विरुद्ध 

 लड़ने   प्रेरित करने रंगमंच का

 अपना महत्व रहा।

 चित्रपट संसार के आने के बाद नाटक का महत्व कम होने लगा।

 गाँवों में लोकगीत के द्वारा रामायण, महाभारत, सत्य हरिश्चन्द्र नाटक आदि का प्रचार 

 आ सेतु हिमाचल तक

 विचारात्मक एकता लाने

 बहुत बड़ा हाथ दिया।

 ऐसे रंगमंच के अभिनेता, अभिनेत्री और अन्य कलाकारों को 

 सम्मान देने विश्व 

रंगमंच दिवस 

  मनाने लगे।

 शेक्सपियर के नाटक 

 अति प्रसिद्ध रहा।

 देश भक्ति भरे गीत 

 भगवद्भक्ति 

 समाज सुधार आदि में 

 नाटक का महत्वपूर्ण स्थान रहा।

 बिना मैक के ही

 उस जमाने के  अभिनेता के स्वर दूर दूर  तक  सुनाई पड़ती थी।

अभिनेता उस जमाने में 

 गायक भी होते थे।

अतः विश्व रंगमंच दिवस 

 हर साल 27-3-26 को

 मनाया जाता है।

 जय नाटक रंगमंच

प्राचीन  कला की याद दिलाने  यह दिन अति आवश्यक है।









 










 

 




 

  


 


Saturday, March 21, 2026

वनसंरक्षण

 विश्व वन दिवस 

 एस.अनंतकृष्णन।

 वन प्राकृतिक संपदा के मूल।

 इतना ही नहीं  ज्ञान की भूमि।

 भारत के असुर ही नहीं,

 ऋषि मुनि और सिद्धार्थ की तपोभूमि।

 ईश्वर के  दर्शन  भूमि।

 वहाँ खूँख्वार जानवर ही नहीं,

 भयंकर  जहरीले जंतु भी नहीं,

 सर्वरोग निवारती जटिल बूटियाँ भी हैं।

 वन की रक्षा न करें तो

 प्राकृतिक संतुलन 

बिगड जाता।

समय पर वर्षा न होती।

 भूमी गर्म हो जाती।

 नगरी करन, नगर विस्तार, तकनिकी ‌शिक्षा संस्थाएँ, कारखाना, बढ़ती जनसंख्या आदि

 जंगलों के नष्ट करने के कारण।

 इसके कारण वन के जानवर भी कम होते जा रहे हैं।

  अतः जंगलों की रक्षा करने विश्व वन्य सुरक्षा दिवस मनाने की योजना।

 वन महोत्सव भारत में 

 मनाते थे।

 विश्व कल्याण के लिए,

और  ब्रह्मांड की समृद्धि के लिए,

 वन संरक्षण में सहयोग देना हमारा 

 संकल्प होना चाहिए।

Thursday, March 19, 2026

दोहरी बात

 दोहरी बात।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई 

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

 20-3-26.

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 हमारे प्रांत में, केरल में,

 पश्चिम बंगाल में  असम,

पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव।

 इस शुभ वेला में 

 दोहरी बात शीर्षक।

 पिछले चुनाव में 

 विपक्षी, अब सपक्षी।

 एक तालाब में पानी सूखने पर 

 पानी भरे तालाब में 

पक्षी बस्ते।

 यों ही दोहरी बात के 

राजनीतिज्ञ,

 तितलियों की तरह।

 मतदाता भी  धन देखते ही दोहरी बातें।

वहीं वादा जो पिछले चुनाव में वही नये रूप में वादा।

 ऊपरी जिह्वा एक बात,

 अंतर्मन एक बात।

 जो भी हो 

 भारत में 30% मत नहीं देते।

राम हो या रावण,

 हमारी जिंदगी अपने हाथ।

 ज्योतिष तो असली दुर्लभ।

 अनेक ज्योतिष फुटपाथ पर।

उनकी दोहरी बात अति चालाकी।

 आज की राशि के अनुसार पुत्र होगा।

 पत्नी के ग्रह दशा विपरीत।

 दस दिन के बाद 

परिवर्तन संभव।

 हो सकता है पुत्री भी।

 आठ बजे प्रसव पीडा,

 तब तो समय प्रतिकूल।

 साढ़े आठ बजे तो

 मनोनुकूल   सिद्ध होगा।

 चुनाव में संगति का फल

‌उनके ग्रह और गुण दोष का प्रभाव होगा।

भगवान में भी शांत,

 क्रूर भगवान।

 आम में भी खट्टे मीठे फल।

  दुरंगी दुनिया दुरंगी  बातें।

  पंच पांडवों के गुण एक नहीं 

 बातें भी भिन्न।

 रावण के गुण  विभीषण के विपरीत।

 राम शांत है तो लक्ष्मण क्रोधी।

 राम के नाम मर्यादा पुरुषोत्तम 

 कृष्ण तो लोक रंजक और लोक रंजन।

 यों ही दोहरी बातें 

‌ चल अचल संपत्ति की चाह।

यह तो प्रकृति का सहज गुण।

  पानी में भी दोहरी बात।

Wednesday, March 18, 2026

ममता की बारिश

 ममता की बारिश।

 एस.अनंतकृष्णन , चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

19-3-26

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ममता क्या है?

जानने के पहले ममता  बारिश हुईकी प्रतीक्षा कितने  उत्साह वर्धन है,

कर्ण को मालूम है,

 भरत को मालूम है

कबीर को मालूम है 

ममता की बारिश कैसी है?

माँ की ममता की बारिश 

 अनुपम और अतुलनीय।

  सम्राट शिवाजी जानता है,

माँ की ममता की बारिश।

 ध्रुव जानता है,

सौतेली माँ की निर्ममता।

 प्रह्लाद की कहानी हिरण्य कश्यप की निर्ममता का प्रमाण।

 हर कोई जानता है 

 माँ की ममता की बारिश की शीतलता।

ममता की बारिश नहीं तो

मानव जीवन में समृद्धि नहीं।

देशप्रेम की बारिश न तो

 देश की प्रगति नहीं।

 भाषा प्रेम की वर्षा न तो 

‌भाषा का विकास नहीं।

देश भक्त शासक के प्रेम की वर्षा न तो देश में 

 अमन चैन नहीं।

ममता की बारिश 

 सर्वे संपन्न और सर्वांगीण विकास के‌विलक्षण प्रतिभा।


 


Tuesday, March 17, 2026

बेटियाँ

 बिटिया की किलकारी


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

18-3-26.

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बिटिया महालक्ष्मी की देन।

 भारतीय रूढ़िवादी 

 देवी स्वरूपा की प्रशंसा 

 करते करते

 उनकी आराधना के साथ साथ,

बेगार भी बनाती थी।

 भ्रूण हत्या करने में 

 ज़रा भी हिचकती नहीं।

 पति के मरते ही जिंदा जलाना।

 बालविवाह शादी क्या है

 जानने के पहले ही शादी।

 विधि की विडंबना से

 पति मर जाएगा,तो

 असीमित वेदनाएँ,

 अमंगल रूप,

 अपशकुन का पात्र।

 जवाहर व्रत न जाने 

 कितनी परेशानियां।

 आज भी शिक्षित युवतियाँ,

 ससुराल में किलकारियां न कर सकती।

 किलकारी मायके के साथ नौ दो ग्यारह हो जाती।

सीता से लेकर मीरा लक्ष्मीबाई तक 

 उर्मिला  तक

 मंदोदरी तक शादी के बाद किलकारी नहीं।

 दमयंती शकुंतला चंद्रमणि तक कितने संकट

 मानसिक पीडाएँ।

 मुमताज के पति को 

 मारकर शाहजहां के अपहरण और  प्रेम महल का नाटक ताजमहल।

 शेरखाँ की हत्या

  बुढ़ापे में शाहजहाँ ने ताजमहल को छेद के द्वारा  देखा।

 आधुनिक 

काल में  बेटियों का 

 समान अधिकार,

  भ्रूण हत्या को दंड

 पोक्सो कानून ,

 जो भी हो 

बेटियों की ‌किलकारियाँ

 अब तक  अंतर्मन में नहीं।

 अधिकांश बेटियाँ,

 छे साल की उम्र में भी

 डर की संभावनाएँ

 पाठशालाओ में 

 अच्छा स्पर्श बुरा स्पर्श 

 की सीख,

 अब शिक्षा, नौकरी।

 पर पुरुष सत्तात्मक 

 दमन नीति कम नहीं हुई।

 नौकरी करके 

घर आते ही

 सब काम,

 दफ़्तर  जाने के पहले

 रसोई, पति की सेवा,

 सास ससुर का डर,

 सामाजिक अफ़वाहें 

 बेटियों की किलकारी 

 अंतर्मन से नहीं,

 दिल में रोती हुई बाहर की किलकारी।

  बेटियाँ बहुएँ बनते ही

  मायके के प्रेम दिखाने में भी पूरी स्वतंत्रता नहीं।