सच का हौसला
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
10-7-26.
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सच का हौसला
दुख सहकर
त्याग हम के मार्ग पर
अचल रहकर अंत तक
100% कष्ट सहना।
सत्य मार्ग का हौसला
राम में नहीं,
कृष्ण में नहीं,
केवल हरिश्चन्द्र में था।
पर उनका अनुसरण
कोई नहीं कर सकता।
न द्रोण, न भीष्म
शिव को भस्मासुर को वर देकर जान बचाने भागना पड़ा।
देवेन्द्र इंद्र भी सत्य के हौसले का देव नहीं।
कर्ण के विषय में
वामनावतार के विषय में
सत्य हौसला डांवाडोल।
अफज़ल खान और सम्राट शिवाजी में सत्य नहीं।
आजकल के लोकतंत्र शासन
वोट के लिए नोट देना
सत्य का सर्वनाश।
आंटी करप्शन ब्यूरो
चुनाव कै काले धन न रोक सका।
छिपकली का छिपकर आक्रमण,
कीड़े के जाल
ईश्वरीय सृष्टि।
न जान सका ईश्वरीय लीला।
असुरों की सृष्टि
देवों का संकट
असुरों के वन की कहानी,
भक्तों का त्याग
मंदिर संपत्ति अपहरण
कार्रवाई में न सत्य का हौसला।
प्राकृतिक कोप में
सत्य असत्य का नाश।
मृत्यु तो पापा और पुण्यात्मा दोनों के लिए बराबर।
भक्त आश्रित
भ्रष्टाचारी आश्रयदाता।
सत्य का हौसला
बातों में संकटों में
मानव बूद्धि के साथ में
केवल सराहनीय है।
एस. अनंत कृष्णन चेन्नई स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
आपकी रचना का मूल भाव प्रभावशाली है। इसे भाषा, प्रवाह और काव्यात्मकता के साथ इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है।
Writing
आज की चुनौती : सच का हौसला
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई (तमिलनाडु)
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
दिनांक: 10-07-2026
सच का हौसला
सच का हौसला वही,
जो दुख सहकर भी
त्याग और धर्म के पथ पर
अंतिम क्षण तक अडिग रहे,
सौ प्रतिशत कष्ट सहकर भी
सत्य से कभी न डिगे।
सत्य का ऐसा अद्भुत साहस
राम में नहीं, कृष्ण में नहीं,
राजा हरिश्चन्द्र में दिखाई देता है।
किन्तु उनका अनुसरण
हर किसी के लिए संभव नहीं।
न द्रोण, न भीष्म,
न देवेन्द्र इन्द्र—
सत्य की कसौटी पर
सभी कहीं-न-कहीं डगमगाते दिखते हैं।
भस्मासुर को वरदान देकर
स्वयं शिव को भी
प्राण-रक्षा हेतु उपाय करना पड़ा।
कर्ण और वामनावतार के प्रसंग भी
जीवन की जटिलताओं का संकेत देते हैं।
इतिहास और वर्तमान
दोनों यही बताते हैं—
सत्य का मार्ग सरल नहीं।
आज के लोकतंत्र में
वोट के लिए नोट,
स्वार्थ और भ्रष्टाचार
सत्य का गला घोंट रहे हैं।
भ्रष्टाचार-निरोधी संस्थाएँ भी
हर काले धन को रोक नहीं पातीं।
प्रकृति के सूक्ष्म जीवों से लेकर
विशाल सृष्टि तक,
ईश्वर की लीला
मानव-बुद्धि से परे है।
असुरों का अत्याचार,
भक्तों का त्याग,
मंदिरों की संपत्ति का अपहरण—
इन सबके बीच
सत्य का साहस
कठिन परीक्षा से गुजरता है।
प्राकृतिक प्रकोप आने पर
सत्य और असत्य का भेद नहीं रहता;
मृत्यु पापी और पुण्यात्मा—
दोनों के लिए समान है।
भक्त आश्रय खोजता है,
भ्रष्टाचारी आश्रयदाता खोज लेता है;
किन्तु अंततः
सत्य का हौसला ही
मानवता का सबसे बड़ा आभूषण है।
संकटों में भी सत्य पर अडिग रहना—
यही मनुष्य का सर्वोच्च साहस है।
— एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
यदि चाहें, मैं इसे और अधिक �ओजपूर्ण, �छंदबद्ध या �मुक्तक शैली में भी रूपांतरित कर सकता हूँ