Search This Blog

Thursday, July 9, 2026

सच का हौसला

 



सच का हौसला 

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

10-7-26.

+++++++++++

सच का हौसला 

दुख  सहकर

त्याग हम के मार्ग पर 

 अचल रहकर अंत तक 

100% कष्ट सहना।

 सत्य मार्ग का हौसला 

 राम में नहीं,

कृष्ण में नहीं,

 केवल हरिश्चन्द्र में था।

 पर उनका अनुसरण 

कोई नहीं कर सकता।

न द्रोण, न भीष्म

 शिव को भस्मासुर को वर देकर  जान बचाने भागना पड़ा।

 देवेन्द्र इंद्र  भी सत्य के हौसले का देव नहीं।

 कर्ण के विषय में 

 वामनावतार के विषय में 

 सत्य हौसला डांवाडोल।

 अफज़ल खान और सम्राट शिवाजी में सत्य नहीं।

 आजकल के लोकतंत्र शासन

 वोट के लिए नोट देना

 सत्य का सर्वनाश।

  आंटी करप्शन ब्यूरो 

 चुनाव कै काले धन न रोक सका।

 छिपकली का छिपकर आक्रमण,

 कीड़े के जाल

 ईश्वरीय सृष्टि।

 न जान सका ईश्वरीय लीला।

 असुरों की सृष्टि 

 देवों का संकट 

 असुरों के वन की कहानी,

 भक्तों का त्याग 

 मंदिर संपत्ति अपहरण 

 कार्रवाई में न सत्य का हौसला।

  प्राकृतिक कोप में 

  सत्य असत्य का नाश।

 मृत्यु तो पापा और पुण्यात्मा दोनों के लिए बराबर।

 भक्त आश्रित 

 भ्रष्टाचारी आश्रयदाता।

 सत्य का हौसला 

 बातों में संकटों में 

 मानव बूद्धि के साथ में 

 केवल सराहनीय है।

  एस. अनंत कृष्णन चेन्नई स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना



आपकी रचना का मूल भाव प्रभावशाली है। इसे भाषा, प्रवाह और काव्यात्मकता के साथ इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है।

Writing

आज की चुनौती : सच का हौसला

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई (तमिलनाडु)

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

दिनांक: 10-07-2026

सच का हौसला

सच का हौसला वही,

जो दुख सहकर भी

त्याग और धर्म के पथ पर

अंतिम क्षण तक अडिग रहे,

सौ प्रतिशत कष्ट सहकर भी

सत्य से कभी न डिगे।

सत्य का ऐसा अद्भुत साहस

राम में नहीं, कृष्ण में नहीं,

राजा हरिश्चन्द्र में दिखाई देता है।

किन्तु उनका अनुसरण

हर किसी के लिए संभव नहीं।

न द्रोण, न भीष्म,

न देवेन्द्र इन्द्र—

सत्य की कसौटी पर

सभी कहीं-न-कहीं डगमगाते दिखते हैं।

भस्मासुर को वरदान देकर

स्वयं शिव को भी

प्राण-रक्षा हेतु उपाय करना पड़ा।

कर्ण और वामनावतार के प्रसंग भी

जीवन की जटिलताओं का संकेत देते हैं।

इतिहास और वर्तमान

दोनों यही बताते हैं—

सत्य का मार्ग सरल नहीं।

आज के लोकतंत्र में

वोट के लिए नोट,

स्वार्थ और भ्रष्टाचार

सत्य का गला घोंट रहे हैं।

भ्रष्टाचार-निरोधी संस्थाएँ भी

हर काले धन को रोक नहीं पातीं।

प्रकृति के सूक्ष्म जीवों से लेकर

विशाल सृष्टि तक,

ईश्वर की लीला

मानव-बुद्धि से परे है।

असुरों का अत्याचार,

भक्तों का त्याग,

मंदिरों की संपत्ति का अपहरण—

इन सबके बीच

सत्य का साहस

कठिन परीक्षा से गुजरता है।

प्राकृतिक प्रकोप आने पर

सत्य और असत्य का भेद नहीं रहता;

मृत्यु पापी और पुण्यात्मा—

दोनों के लिए समान है।

भक्त आश्रय खोजता है,

भ्रष्टाचारी आश्रयदाता खोज लेता है;

किन्तु अंततः

सत्य का हौसला ही

मानवता का सबसे बड़ा आभूषण है।

संकटों में भी सत्य पर अडिग रहना—

यही मनुष्य का सर्वोच्च साहस है।

— एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

यदि चाहें, मैं इसे और अधिक �⁠ओजपूर्ण, �⁠छंदबद्ध या �⁠मुक्तक शैली में भी रूपांतरित कर सकता हूँ

Wednesday, July 8, 2026

विश्व शांति और प्रेम दिवस

 शांति और प्रेम दिवस 

एस.अनंतकृष्तन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

9-7-26

+++++++

 मानव जीवन में 

शांति और प्रेम?

 दिवस?

 रामावतार में 

 राम कहानी सुनाना 

का मतलब अपना दुखड़ा रोना।

मानव प्रेम में 

 शांति दिवस कैसे?

विश्व शांति के लिए 

 प्रेम चाहिए।

 मुस्कान चाहिए।

 भारत का संदेश 

 अहिंसा परमो धर्म।

 सत्य मेव जयते।

सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।

जय  जगत।

यह नारा,

वसुंधैव कुटुंबकम् 

 विश्वनाथ,

जगन्नाथ 

 अति प्राचीनतम् संदेश।

 न जाने भारतीय संदेश 

 निभाने में भोग नहीं त्याग ही त्याग।

 

पर हर बात को पाश्चात्य देन मानना ,

 हम अपने को पहचानने में भूल करते हैं।

 पाश्चात्य स्वार्थता के कारण  सम्मिलित परिवार का नाश।

 धन कमाने विदेश में 

 भाईचारे की कमी।

 अतः शांति और प्रेम रहित संसार में 

 भारत ही ऐसे सनातन धर्म संदेश 

 हर बात को उन्नीसवीं शताब्दी पाश्चात्य नारा

 सही नहीं 

 भारतीय श्लोक नारा

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

अर्थ (भावार्थ):सभी लोग सुखी हों, सभी रोगमुक्त (निरोगी) रहें, सभी का कल्याण हो और किसी को भी कभी किसी दुःख का भागी न बनना पड़े। चारों ओर शांति ही शांति हो।

सोचो विचारों जानो पहचानो समझो 

‌विश्व शांति और प्रेम 

का नारा सनातन धर्म का है,

न पाश्चात्य देन।

 भारत ही स्वतंत्रता संग्राम में ऐसा भजन गाया

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई।

 न झगडाना  कोई लड़ाई।

 विश्व एकता , त्याग,

 नश्वर जगत 

 अनश्वर सत्य,धर्म , प्रेम शांति।

 नंगे बदन विश्व कल्याण 

साधु संतों की भूमी

 भारत में 

शांति और प्रेम दिवस 

 पाश्चात्य देन नहीं,

वेद उपनिषद का संदेश।

 पंच तत्व ही तटस्थ भगवान।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई 


सही रूप 

शांति और प्रेम दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई (तमिलनाडु)

9-7-2026

मानव जीवन में

शांति और प्रेम का

क्या है सच्चा आधार?

रामावतार की कथा

केवल कथा नहीं,

मानव के दुःख-दर्द का

जीवन-संदेश है।

विश्व में शांति चाहिए,

तो प्रेम चाहिए,

मधुर मुस्कान चाहिए,

आपसी विश्वास चाहिए।

भारत का सनातन संदेश—

"अहिंसा परमो धर्मः।"

"सत्यमेव जयते।"

"वसुधैव कुटुम्बकम्।"

"जय जगत।"

यही तो है वह अमर पुकार,

जो वेदों और उपनिषदों से

युगों-युगों से गूँज रही है।

हर श्रेष्ठ विचार को

केवल पाश्चात्य देन मान लेना

अपने गौरव को भूल जाना है।

स्वार्थ, भोग और धन की दौड़ ने

संयुक्त परिवारों को बिखेरा,

भाईचारे की डोर को कमजोर किया।

भारत ने सदा त्याग,

सेवा और विश्व-बंधुत्व का मार्ग दिखाया।

"सर्वे भवन्तु सुखिनः,

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु,

मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥"

यही है विश्व-कल्याण की प्रार्थना,

यही है शांति और प्रेम का

सनातन संदेश।

स्वतंत्रता संग्राम में भी

भारत ने गाया—

"हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,

आपस में हैं भाई-भाई।"

विश्व-एकता, प्रेम, त्याग,

सत्य और धर्म ही

मानवता के शाश्वत आधार हैं।

ऋषियों, मुनियों और संतों की भूमि भारत

आज भी विश्व को यही संदेश देती है—

शांति और प्रेम किसी एक युग या देश की देन नहीं,

वे वेदों, उपनिषदों और सनातन संस्कृति की अमर धरोहर हैं।

पंचमहाभूतों में व्याप्त परमात्मा

संपूर्ण सृष्टि को

शांति, प्रेम और सद्भाव का आशीर्वाद दें।

— एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई


   



   

बचपन से आज तक खट्टी-मीठी कडुवु बातें

 बचपन की खट्टी-मीठी यादें।

एस. अनंत कृष्णन चेन्नई 

8-7-26.

बचपन में खट्टी-मीठी यादें 

मेरे जन्म लेने के बाद 

 माँ के छे बच्चे,

 आर्थिक अभाव या कर्म फल। 

दो तीन साल पलकर

‌बच्चे मर जाते।

 कडुवी बातें बचपन की।

सत्रह साल तक ग़रीबी,

 रुग्णावस्था में माँ,

मीठी बातें बचपन में नहीं।

दीपावली पटाखे,

नये वस्त्र कल्पना की बातें।

बचपन की बातें खट्टी अंगुली 

न मीठी।

 अब 76साल की उम्र में 

‌न आर्थिक अभाव,

 पर मेरी स्वस्थ अर्द्धांगिनी 

 मेरी सेविका,

 मेरी सलाहकार 

 मेरी शुभ चिंतिका

चल बसी।

 बचपन में आर्थिक अभाव 

 आर्थ नाद।

 बुढ़ापे में न आर्थिक अभाव।

 मेरी प्राण प्रिया का निधन।

 न बचपन में मीठी बातें 

 न अब बुढ़ापे में।

Monday, July 6, 2026

विश्व ग्रामीण विकास दिवस

 विश्व ग्रामीण विकास दिवस।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

7-7-26.++++

++++++++++

नगर नगरीकरण, नगर विस्तार  

प्रकृति का विनाश।

 केवल धन का उद्देश्य।

 परिणाम ग्राम काली होना।

 धन से तन का स्वास्थ्य 

पौष्टिक आहार,

अन्न, धान,सब्जियाँ

खरीद सकते हैं।

 और ग्रामीण लोग

 खेती न करते तो

धनी शहरी लोग भूखों मर जाते।

 ग्राम शहर के सुखी जीवन जीने रीढ़ की हड्डियाँ हैं।

स्वस्थ शरीर,रक्त संचार 

 ग्रामीण लोग 

कृषी न करते तो बेकार।

अतः ग्राम राज्य की स्थापना,

विश्व ग्रामीण दिवस 

मनाकर ,

ग्रामोत्थान के लिए 

 लोगों को जगाना है।

ग्रामों में स्वच्छ वातावरण।

 साफ हवा,

न वायु,जल,भूमि

 प्रदूषण।

 न विचार प्रदूषण।

हर साल जुलाई में तारीख को मनाने वाले 

 ग्रामोत्थान दिवस

 ग्रामीण लोगों की शिक्षा,

 पानी की व्यवस्था,

 आवागमन की सुविधाएँ,

स्वास्थ्य केंद्र,

भोजन आदि

बुनियादी सुविधाएँ,

देना,

 खेती के विकास योग्य 

 बीज,  खाद,  आर्थिक सुविधाएँ,

गाय,बैल,बकरी, मुर्गा 

पालने की व्यवस्था,

सहकारी समिति की स्थापना।

सरकारी सहायता की जानकारी आदि।

 जय किसान का नारा

यही ग्रामीण विकास दिवस का लक्ष्य।

संत तिरुवल्लुवर ने कहा

சுழன்றும்ஏர்ப் பின்னது உலகம் அதனால் உழந்தும் உழவே தலை".

संसार उद्योग,धंधा, शिक्षा आदि की तरक्की करने पर भी  

कृषी पर ही आधारित है।

अतः ग्रामीण विकास को ही प्राथमिकता देनी है।

एस.अनंतकृष्णन।

विश्व ग्रामीण विकास दिवस


एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडुहिंदी प्रेमी प्रचारकदिनांक: 7-7-2026


विश्व ग्रामीण विकास दिवस


नगरों का विस्तार,नगरीकरण की अंधी दौड़,प्रकृति का होता विनाश—केवल धन कमानाजब जीवन का उद्देश्य बन जाए,तब गाँव उजड़ने लगते हैं।


धन से पौष्टिक आहार,अन्न, धान और सब्जियाँखरीदी तो जा सकती हैं,पर यदि ग्रामीण किसानखेती करना छोड़ दें,तो धनवान नगरवासी भीभूखे रह जाएँगे।


गाँव ही हैंशहरों के सुखी जीवन कीरीढ़ की हड्डी।किसानों के श्रम से हीस्वस्थ शरीर,रक्त का संचारऔर जीवन का आधारबना रहता है।


अतः ग्रामोत्थान का संकल्प लेकरविश्व ग्रामीण विकास दिवस मनाएँ,और जन-जन कोग्रामीण विकास के लिए जागरूक बनाएँ।


गाँवों में होस्वच्छ वातावरण,शुद्ध वायु, निर्मल जल,उपजाऊ भूमि,और प्रदूषण-मुक्त विचार।


ग्रामीणों को मिले—उत्तम शिक्षा,स्वच्छ पेयजल,सुगम आवागमन,स्वास्थ्य केंद्र,पौष्टिक भोजनतथा सभी बुनियादी सुविधाएँ।


कृषि के लिएउन्नत बीज, खाद,आर्थिक सहायता,पशुपालन की सुविधाएँ,सहकारी समितियों की स्थापनाऔर सरकारी योजनाओं की सही जानकारीहर किसान तक पहुँचे।


"जय किसान" का नारातभी सार्थक होगा,जब हर गाँवसमृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।


महान संत तिरुवल्लुवर ने कहा है—


"சுழன்றும் ஏர்ப் பின்னது உலகம்; அதனால் உழந்தும் உழவே தலை."


अर्थात—संसार चाहे उद्योग, व्यापार और शिक्षा मेंकितनी भी उन्नति कर ले,उसका आधार अंततः कृषि ही है।इसीलिए ग्रामीण विकास कोसर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।


— एस. अनंत कृष्णन

Sunday, July 5, 2026

इंसाफ़ की ताकत

 इंसाफ़ की ताकत।

 एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

+++++++++

इंसाफ़  की ताकत 

अत्यंत महत्वपूर्ण।

पर इंसाफ़ देनेवाले 

 ज्ञानी होना चाहिए।

 धनलोलुपता वकील 

 अपने तर्क चातुर्य से

 अपराधी और खूनी को 

छुड़ा देता है।

 झूठे गवाह देना एक धंधा बन गया है।

 भ्रष्टाचारी मंत्री,

 हत्यारे अमीर

 अमीर कार चालक 

 सबको दंड देने बारह वर्ष।

 तब फ़ाइल गायब

‌गवाह गायब

 इंसाफ़ कमजोर।

 मुख्यमंत्री जयललिता 

अपराधिन

 शादी प्रतिवादी तर्क 

 खत्म, पर फैसला 

 उसकी मृत्यु के बाद।

 वह अब निरपराधिन नेत्री।

 उसकी सखी शशिकला

 चार वर्ष की ही सजा ।

 भारतीय न्यायालय धनियों के लिए।

एक गरीब चालक 

  ग़लती से टकराने पर तुरंत दंड।

एक प्रसिद्ध  अभिनेता पियक्कड़, कार चलाते 

 अनेकों की मृत्यु।

 बारह साल तक के मुकद्दमे में,

 फाइल, गवाह सब नदारद।

 अभिनेता के समर्थन में 

 सब ।

 वह साफ़ साफ़ दंड से बचा।

 मंदिर के पर्वत पर  दीप जलाने का फैसला,

पर शासक दल दीप जलाने नहीं दिया।

 हिंदू मंदिर अति प्राचीन।

 पर बीच में दर्गाह

 एक मुगल कब्र 

 न्याय का ताकत कमज़ोर।

 अदालत में धन की महिमा

 सत्य का हार, अधर्म की जीत।

 प्रेमचंद की कहानी 

 नमक का दारोगा।

 सत्य के पक्ष में न गवाह

न वकील।

  अपराधी काले धनी

 उसको बचाने

 वकीलों का तांता।

स्वतंत्रता संग्राम में 

 इंसाफ़ अति कमजोर।

  राजीव गांधी के मुकद्दमे  में न  सच्चाई का पता।

सिविल केस चलाते चलाते अमीर बन गया गरीब।

 न इंसाफ़।

 इंसाफ़ की देरी

 सत्य हरिश्चन्द्र की परेशानियाँ,

 लेखकों की ग़रीबी,

 प्रकाशकों की अमीरी।

 भारत के सड़कों के फुटपाथ चलने के लिए नहीं,

फुट पाथ की दूकानों के लिए।

 मंदिर भक्ति के लिए नहीं 

 व्यापारियों का केंद्र 

 मनमाना दाम धोखा।

ट्राफिक पुलिस का रिश्वत।

जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र में 

 रिश्वत।

 थोड़े में कहें तो

 देवदर्शन में धन प्रधान।

 श्मशान में भी।

 इंसाफ़ की ताकत 

 दुर्बल ही लगता है,

 धन,पद, अधिकार, सिफारिश दोस्ती के कारण।

 तटस्थ इंसाफ 

यम के दरबार में,

पंचतत्व के चलन में।

जहाँ न अपील न उच्च उच्चतम न्यायालय।

Saturday, July 4, 2026

समय और कर्म

 

समय और कर्म

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
दिनांक: 06-07-2026

समय और कर्म

ईश्वर की इस सृष्टि में
सबके कर्म एक समान नहीं।
आहार में भिन्नता,
आकार में विविधता,
स्वास्थ्य, बुद्धि और क्षमता में
सबका स्वरूप अलग-अलग है।

धन, तन और मन में भी
प्रकृति ने विविध रंग भरे हैं।
जल का स्वाद भी बदलता है,
धरती का रूप भी बदलता है।

सभ्यता और असभ्यता के कर्म,
कृषि, पोशाक और खाद्यान्न में भी
स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
सद्कर्म और दुष्कर्म,
सत्संग और कुसंग—
यही जीवन का फल निर्धारित करते हैं।

अनपढ़ कबीर का अमूल्य ज्ञान
सत्संग की ही देन था।
उनकी वाणी आज भी
मानवता का मार्गदर्शन करती है।

मंगत मिश्र के तोते ने
वेद-मंत्रों का उच्चारण सीखा,
और डाकू के तोते ने
"पकड़ो, मारो, लूटो" कहना।
संगति का प्रभाव ही
कर्म का स्वरूप गढ़ता है।

समय सबके लिए समान है—
चाहे राजा हो या रंक।
समय किसी का पक्ष नहीं लेता,
वह निरंतर आगे बढ़ता रहता है।

संत कबीर का अमर संदेश—

"काल करे सो आज कर,
आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी,
बहुरि करेगा कब।।"

समय को खोना
मानो जीवन को खोना है।
जो कर्म समय पर नहीं होता,
वह जीवन भर पछतावा बन जाता है।

समय की हानि की भरपाई
ईश्वर भी नहीं कर सकते।

"आछे दिन पाछे गए,
हरि से किया न हेत।
अब पछताए होत क्या,
जब चिड़िया चुग गई खेत।।"

आइए, समय का सम्मान करें,
सद्कर्म को जीवन का आधार बनाएँ,
क्योंकि समय और कर्म ही
मनुष्य के सच्चे भाग्य-विधाता हैं।

— एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी प्रेमी, सेवक एवं अनुवादक

समय और कर्म

 समय और कर्म

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

6-7-26

------++-++++++

कर्म ईश्वरीय सृष्टियों में 

 एक समान नहीं।

 आहार विषय में,

 आकार विषय में 

 स्वास्थ्य विचार में 

 बुद्धि लब्धि में 

 अलग अलग।

धन ,तन,मन

में भी भिन्न-भिन्न।

 पानी में भी भिन्नता।

 अतः सभ्यता असभ्यता के कर्म  ,कृषि में पोशाक में, खाद्यान्न में भी फर्क।

अतः सद्कर्म बद्कर्म  सत्संग बद्संग का फल।

अनपढ़ कबीर का ज्ञान 

वाणी का डिक्टेटर बनना

 सत्संग का फल।

 मंगत मिश्र के तोते का

 वेद मंत्र बोलना,

 डाकू के तोते का 

 पकड़ो,मारो,लूटो कहना

 सत्संग और बदचलन का संग।

 अतः कर्म में फ़र्क।

 समय 

 समय तो सब के लिए बराबर।

 राजा हो या रंक

 समय तो किसी की परवाह नहीं करता।

 

संत कबीर का यह प्रसिद्ध दोहा 

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।पल में प्रलय होएगी,

 बहुरि करेगा कब।।

 समय को खोना,

मरण समान।

  कर्म  समय पर न 

करने पर 

पछताना पड़ेगा।

 समय का घाटा भरना

ईश्वर से भी असंभव।

 

आछे दिन पाछे गए, हरि से किया न हेत।

अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

 सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी प्रेमी सेवक अनुवादक