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Wednesday, February 4, 2026

मृत्यु झाँकती है।

 735.

 मृत्यु झाँकता है। மரணம் எட்டிப் பார்க்கிறது. 

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 तिरुमूलर् के तिरुमंत्र में 

 "अऴिकिन्र" शब्द नश्वर के अर्थ में है।

 शरीर का स्वभाव नश्वर है। 

उसका देखभाल सही ढंग से  

ध्यान, योग, प्राणायाम आदि से 

 सुरक्षित रखने पर 

 प्राण बचाकर लंबी उम्र तक जी सकते हैं।

शरीर के नष्ट होते ही प्राण पखेरू उड़ जाएंगे।

जब हम भूमि पर जन्म लेते हैं,

 तब मृत्यु की ओर ही जीवन  जुडता रहता है।

नश्वर शरीर में 25+3साल तक एक खंड है।

तीस -33तक।

62 में है ।

फिर 100साल की उम्र की ओर चलता है।

 मनुष्य जीवन दुख और संघर्षों से भरा है।

 बचपन में हम इसका एहसास नहीं करते।

स्वस्थ रहना है तो

 मन में चिंता नहीं होनी चाहिए। 

मन की चंचलता दूर होनी चाहिए।

 हर दिन उसको सोच विचार करना चाहिए 

कि 

सुख,दुख, आनंद शांति अशांति, 

तृप्ति अतृप्ति आदि स्थाई नहीं है।

 अस्थाई है।ये सब बचपन में नहीं जानते।

 तब अनुभवी बड़े लोग कहेंगे

 कि 

ये सब सहज बातें हैं।

 सब सही हो जाएगा।

दुख संताप जन्म से जारी है।

 दुख किसी भी रूप लेकर है आएगा।

 रोग के रूप  में 

 ज्येष्ठा देवी के रूप में

 मृत्यु के  रूप में 

असर डालेगा।

 तब हमें इन सब से विजय पाना कैसे?

 बड़ों से आशीषें पाना।

वही मार्कंडेय पुराण है।

 सोलह साल में मृत्यु के आने पर

 शिवलिंग से आलिंगन करता है।

नहीं तो यम उसके प्राण ले लेंगे। 

भगवान ही हममें

 रहकर हमारी रक्षा करता है।

 आत्मा परमात्मा एक हो जाता है।

बालारिष्ठ में जन्म लेते ही मर जाते हैं।

 ब्रह्म की शक्ति सर्वश्रेष्ठ है। असीमित है।

 वेद शास्त्रों के अनुसार 

मनुष्य अल्प आयु में मरनेवाला नहीं है।

वह सौ साल तक जी सकता है।

 इस के लिए योगाभ्यास है।

शरीर से प्रेम श्रद्धा भक्ति चाहिए। क्यों?

हमारे शरीर में परमात्मा बसें हैं। 

आहार, प्राणायाम, संयमित अनुशासित 

जीवन बिताने पर हम अपने कायम को

  स्वस्थ रख सकते हैं।

 हमें अपने  पूर्वज ऋषि मुनियों के 

मार्ग अपनाकर

 जितेन्द्र बनना चाहिए।

  हर रोज़ नियमानुसार 

 योगाभ्यास, प्राणायाम करना  चाहिए।

 हमेशा स्मरण करना चाहिए  

कि 

जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्यं।

अमानुषीय शक्ति की कठपुतली है प्रपंच।

 सर्वे जनाः सुखिनो भवन्तु।

उँ शांति:शांति:शांति:।

सोचो विचारो

 अपनी सोच बदलो

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 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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5-2-26

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मानव जीवन में 

सभ्यता के विकास के

मुख्य कारण  सोच बदलना।

सोच विचार करके 

 नये सिद्धांत, 

नयी क्रांति 

नये नये विकास।

 ईश्वर के ध्यान में में 

कितनी सोच बदलते 

 रहते हैं।

कितने मत संप्रदाय 

 कितनी मूर्तियाँ

 कितने नाम।

‌कितनी कल्पनाएँ

‌कितने अंधविश्वास।

 विसर्जन के नाम से

 करोड़ों की सुंदर

‌गणेश की मूर्तियाँ

‌कितनी काली की मूर्तियां 

 हर साल हिंदु ओं के द्वारा 

 छिन्न-भिन्न करके 

 अपमानित किए जा रहे हैं।

 यह किस वेद में 

 किस उपनिषद शास्त्रों में है ,

पता नहीं,

 सोच बदलो 

करोड़ों की मूर्तियां 

 बेकार होने के खर्च में 

सनातन धर्म के प्रचार में 

 हिंदू धर्म के 

प्रचार में,

 हिंदू धर्य के ग्रंथों 

 जन जन में पहुँचाना।

 प्रायश्चित के नाम से

 धोखा खाना छोड़ दो।

 मन चंगा तो कठौती में गंगा,

 याद रखो।

दान धर्म देकर

 देवालय के बाहर

‌भिखारियों की संख्या 

 बढ़ाने में साथ न दो।

 कितनी असली अपाहिज 

 कितने नकली भिखारी 

 पता नहीं।

 सोचो,

 समझो

  विचारों।

चुनाव में 

धनी भ्रष्टाचारियों को

वोट मत दो।

 गीताचार्य के अनुसार 

 अपने कर्तव्य ईमानदारी और तटस्थता से निभाओ।

धन प्रधान मानकर 

गलत मार्ग पर

कमाने पर तत्कालीन आनंद।

 शाश्वत आनंद, शांती संतोष 

तटस्थता में, सत्यता में 

ईमानदारी में है।

तन स्वास्थ्य पर ध्यान दो।

 धन कमाने में 

सोच सोच कर,

स्वास्थ्य नष्ट करके,

 चिकित्सालय में 

 खर्च न करो।

एकता के लिए 

 मजहब,

 मानव समाज में 

 जाति संप्रदाय मजहब के नाम टुकड़े टुकड़े करने कराने करवाने के

 सोच बदलो।।

मंदिरों की संख्या जितनी बढ़ती है, उतनी ही अनाचार बाह्याडंबर।

भक्ति नहीं मंदिर प्रदर्शनी

 बन रहै हैं।

 सोच बदलो

दैश और‌ विश्व कल्याण के विचार करो।

 मजहबी लडाइयाँ

मानव में भेद राग-द्वेष बढ़ा रहे हैं। 

 अपनी सोच बदलो।

Tuesday, February 3, 2026

चुनौती

 चुनौतियों के अजगर।

एस.अनंतकृष्णन,

चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-2-26.

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 मानव जीवन ही नहीं,

 पशु-पक्षी के जीवन में भी,

चुनौतियों के अजगर।

 अंडे निगलने नाग तैयार।

 हिरन को आहार बनाने 

 बाघ तैयार।

 संक्रामक रोग फैलाने 

 मच्छर मक्खियाँ तैयार।

मकड़ी के जाल तैयार,

 लघु  कीड़े को पकड़ने।

 कीड़े मकोड़े खाने

 पेड़ पौधे भी हैं 

प्राकृतिक कोप,

आँधी तूफान सुनामी आदि।

विद्यार्थी जीवन में 

 परीक्षा अंक।

 नौकरी की चुनौती।

 शादी योग्य पत्नी पति 

चुनौतियों के अजगर।

कोई धंधा शुरू करने के पहले 

 सरकारी अनुमति

 रिश्वत आदि।

 फुटपाथ के व्यापारी से

 मुफ्त में पुलिस ले जाने वाली वस्तुएँ।

  संक्षेप में कहें तो

 भूलोक में माया, लोभ 

क्रोध,  अहंकार काम 

 ये सब चुनौतियों के अजगर।

Sunday, February 1, 2026

गाँधी

 महात्मा गांधी 

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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2-2-26

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श्री मोहन दास करमचंद गाँधीजी

 विश्ववंद्य नेता।

अहिंसावादी 

 सत्याग्रही

 नमक सत्याग्रह 

 भारत छोड़ो आंदोलन 

 हर एक भारतीय के दिल में बसे,

आराध्य नेता।

 एक ही नेता का चरित्र 

 विदेशी निदेशक के द्वारा 

 चित्रपट।

  आज  उनके वंशज का पता नहीं ।

 खान परिवार गाँधी परिवार हो गया।

 गाँधी बनिया,

 व्यापारी वैश्य।

आज गाँधी माने

 इंदिरा गांधी,

 मेनका गांधी 

 राजीव गाँधी

 राहुल गांधी,।

 इटारली बहु

 सोनिया गाँधी।

 प्रियंका चार्ल्स नहीं 

 प्रियंका गाँधी।

 प्रसिद्ध नेता के नाम जोड़कर  उसके वंशज बन गए।

 सब की नागरिकता द्विदेशी। 

 भारतीय लोगों को 

सोचकर गांधी वंश का 

 पता लगाकर

 संसार के सामने लाना है।

 वास्तविक गाँधी वंश का आदर

 युवकों को जान समझकर 

 आदर करना चाहिए।

Saturday, January 31, 2026

मजदूर

 मजदूर के हाथ।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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1-2-26

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मैं करोड़ पति हूँ।

 कारखाना खोलना है,

 घर बनवाना है।

 पूँजी मेरे हाथ में।

 मैं इंजीनियर हूँ,

 योजना है

 मैं उद्योग पति हूँ

 मैं सिनेमा निर्देशक हूँ।

पर उपर्युक्त लोगों की योजना लागू करने

 चाहिए मजदूर के हाथ।

 स्वर्ण और हीरे का खान।

 कोयले के खानों का पता लगा है।

 पर इन सब को निकालने

 मजदूर के हाथ।

शहर भर कूड़ा कचरा है

 निकालने  चाहिए 

 मज़दूर के साथ।

 नल की व्यवस्था 

 बिजली की सुविधा 

 सब के लिए चाहिए 

मजदूर के हाथ।

 खेत में बीज बोने

 फसल काटने

 बोरे में बाँधने 

चाहिए 

मजदूर के हाथ।।

 मजदूर नहीं तो

  गड्ढे खोदकर

 बिजली स्तंभ का

 स्थापित करना असंभव।

माली न तो बाग नहीं।

 हर हाल, अस्पताल मंदिर साफ रहना है तो

 चाउ मजदूर के हाथ।

शौचालय सार्वजनिक 

स्थान में 

 साफ़ करने मज़दूर के हाथ।,

 पैसे, बड़े पद, रईश आदि  मजदूर साथ हाथ न देगा तो 

 कुछ न होगा जान।

मजदूर के हाथ मजबूत।

 हर क्षेत्र में मजदूर 

 के साथ न लगने पर

 सारे काम चौपट जान।।












 


Thursday, January 29, 2026

लाला लाजपत राय

 +लाला लाजपत राय++++++++++++++++

एस . अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

+++++++++30-1-26


भारत के स्वतंत्रता

 संग्राम में तीन नाम लाल-पाल-बाल के नाम से प्रसिद्ध हैं।

 लाल का मतलब लालालजपत राय।

 पाल का मतलब है

 विपिन चंद्र पाल।

 बाल का मतलब है

 बालगंगाधर तिलक।

 लाला लाजपत राय है

 पंजाब के सिंह।

 लाहौर में साइमन कमिशन के विरुद्ध 

 आंदोलन में लाठीचार्ज सहे। इसी कारण वे देश के शहीद हो गए।

 अपने प्रिय नेता की मृत्यु के कारक पुलिस अधिकारी 

सांडर्स को भाग्य सिंह, सुखदेव चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु मिलकर 

 हत्या कर दिया।

 इस कारण से ही 

तीनों को अंग्रेजी सरकार ने फाँसी पर चढ़ा दिया।

 लाल ने  पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना की।

हिंदी  के प्रचार में उनका योगदान भी महत्वपूर्ण है।

 उनके यादगार में अनेक संस्थान की स्थापना हुई।

लाला लाजपत राय की जय हो।

उनके देशभक्ति मार्ग पर चलना ही हर भारतीय को उनके प्रति बड़ी श्रद्धांली होगी।

Wednesday, January 28, 2026

कल्पनाएँ

 कोमल कल्पनाएँ

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

29-1-26

++++++++++

कोमल कल्पनाएँ,

परिस्थितिवश

 कठोर भी हो जाती है।

सर्वे जना सुखिनो भवन्तु 

 जय जगत

 वसुधैव कुटुंबकम् 

 ये कोमल कल्पनाएँ।

 मंडन मिश्र का तोता

 वेद मंत्र सुनाता।

 डाकू का तोता 

विपरीत।

 भद्रकुल की कलपनाएँ कोमल,

विश्वकल्याण के लिए।

खलनायक, चुनाव लड़नेवालों की कल्पना 

 विपरीत।

करोड़ों के खर्च 

कैसे पाँच साल में 

कमाना शत्रु पक्ष

 को हराने के षडयंत्र 

 कल्पनाएँ।

 साहित्यकार की कल्पना 

 जगतोद्धार के लिए 

उनमें धन लोभी स्वार्थी 

 साहित्यकार समाज बिगाड़ने अश्लील कल्पनाएँ।

 ईमानदारी अधिकारियों की कलपनाएं कोमल

 जनकल्याणकारी।

पर भ्रष्टाचार रिश्वतखोरों की कल्पनाएँ न्याय विरुद्ध।

 रत्नाकर कीकल्पना 

  चोरी डाकू,

वाल्मीकि ने कल्पना 

दिव्य शक्ति भक्ति।

राष्ट्र प्रेमियों की कल्पना 

 आंबी जैसे देश द्रोही की कल्पना कठोर।

 तटस्थ परोपकारी लोगों की कल्पना अलग।

 कर्ण के जैसे।

 दुर्योधन के संग

 कृतज्ञतावश अलग।

 पाश्चात्य देशवासियों की कल्पना जन हित 

आविष्कार। पर

 भारतीय कल्पना 

 जगत मिथ्या,

ब्रह्म सत्यं 

 ईश्वर भक्ति।

 भारतीय सुखी वातावरण 

 भोजन पदार्थ के

 हजारों किस्म।

शांति अहिंसा प्रिय देश।

 अतः कल्पनाएँ कोमल 

 मानव कल्याणकारी।

 सोचिए विचारिए 

 देश कल्याण की कल्पनाएँ।

समाज कल्याण की कल्पनाएँ 

 मातृभाषा रक्षा की कल्पना।

विश्व हित की कल्पनाएँ।