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Tuesday, April 14, 2026

कसौटी पर

 कसौटी 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक, सौहार्द सम्मान प्राप्त  हिंदी सेवी के द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 15-4-26

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कसौटी के बिना 

असली नकली का पहचानना असंभव।

 मानव के गुण दोष,

 बुद्धि लब्धि, 

व्यक्तित्व वीरता

 शासन और प्रशासन की उत्तमता  को

 परखकर देखना है।

 कसौटी पर कसना 

 एक मुहावरा,

 केवल सोना, चाँदी का ही नहीं,

 मानव के ज्ञान, गुण,

 स्वार्थ, निस्वार्थ,

 वीरता, कायरता,

 वीरांगना , वारांगना।

 काम, क्रोध, मद,लोभ 

 सब मानव के गुण अवगुण की परख करना,

  खासकर  भारतीय मतदाता को

 सांसद और विधायक के गुण अवगुणों को कसौटी पर कसकर देखकर 

 सच्चे निस्वार्थ आदर्श 

 देश प्रेमी को पहचानकर 

 वोट देना चाहिए।

 कसौटी पर कसकर देखने पारखी नज़रों की आवश्यकता है।

 विश्व के  लोक प्रसिद्ध 

 भारत में होने का महत्व 

 आदि काल से है।

 अतः  कसौटी के  उदाहरण देकर कालीदास  के  काव्यों में उदाहरण मिलते हैं।

 रघुवंश काव्य में 

 अतिथि महाराजा के साथ धन की देवी लक्ष्मी

 कसौटी पर कसे  सोने की चमक की रेखा की तरह अमिट रही।

 मेघदूत में 

 प्रेमी प्रेमिका को

  मार्ग दिखाने,

 बिजली ऐसे चमकना,

 जैसे कसौटी पर कसे सोने की रेखा  की चमक जैसे हो।

 ऐसे कसौटी भारती कवियों के काव्य में 

 मिलते हैं। 

तमिल के काव्यों में 

भी तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल में भी

 कसौटी का उल्लेख मिलते हैं।

 कसौटी पर कसने वाले,

 पारखी न तो

 मानव जीवन में 

 मानव और मानवता का

 पता न‌ लगेगा।



 







 

 


 

 

 

 



 

 

 





 


 

 

 

 


पारखी नजरें

 पालकी नजरें

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।


 जौहरी जाने हीरे की परख।

कबीर ने कहा है


हीरा पड़ा बाज़ार में, रहा छार लपटाय।

बहुतक मूरख चलि गए, पारख लिया उठाय॥ 

 वैसे ही पार्टी नजरें 

 असली नकली के

 पता लगाने 

की क्षमता 

  रखती है।

  योग्य पारखी वैद्य

‌आँखें, जीभ, नाखून नाड़ी देखकर 

 रोगी के लोग का पता लगाने में समर्थ होते हैं।

 पारखी नजरों के ज्योतिषाचार्य 

 भविष्य का सही बताते हैं।

  बड़े बुद्धिजीवी 

 अपने कंपनी के लिए 

 योग्य नौकर चुनने की योग्यता रखते हैं।

 हर क्षेत्र में पारखी नजरों वाले होते हैं।

 अनुभवी थानेदार,

 चोरों और झूठों को 

  पता लगाने की पारखी होते हैं।

 सोने की असली नकली मिलावट जानने में 

 कसौटी में कसकर सुनार की पारखी नजरें 

 निपुण होती हैं।

 गुरु की पारखी नजरें 

 प्रतिभाशाली,  औसत, मंद बुद्धि छात्रों को

 अलग अलग कर देता है।

 पारखी नजरें न तो कुआँ 

खोदने पानी की जगह का पता नहीं लगता।

आजकल  नैदानिक परीक्षण , रोगों के निदान,

 यंत्र मय होगया हैं।

 वाहन की जाँच की पारखी नजरें 

 इंजन की आवाज़ से ही

  पता लगा लेती हैं कि 

 वाहन की गड़बड़ी क्या है।

 पारखी नजरें न तो

 सही गलत के पता लगाना मुश्किल।

Sunday, April 12, 2026

प्रदूषण का विष

 प्रदूषण का विष

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

13-4-26

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प्रदूषण आजकल 

 स्वार्थमय प्रदूषण,

चित्रपट , संगणिक, मुखपुस्तिका,  यूट्यूब 

 सब में जितेंद्रयता कम होने, असंयमी बनने बनाने  विचारों का प्रदूषण।

 भ्रष्टाचार, रिश्वत का प्रदूषण,

शिक्षा की महँगाई,

 शिक्षित वकील, सी.ए,

 सैकड़ों करोड़ खर्च करके चुनाव जीतने वाले 

 सांसद, विधायक, मंत्री 

‌यह अनुशासन हीन प्रदूषण,

 नष्ट कर रहा है मानव चरित्र  को,

परिणाम स्वरूप 

 कृषी प्रधान भारत को

 विदेशियों के कारखानों को अनुमति देकर

 वायु प्रदूषन, जल प्रदूषण, भूमि तल प्रदूषण,

 हजारों झील अब नदारद,

 गगन चुंबी इमारतें,

 भूतल जल का शोषण,

 भूतल में पानी का कम होना, 

 जंगलों का नाश,

 भूमि का उष्णमय बनना,

 आजकल के प्रदूषण 

 मानव मन की स्वार्थता और  बाह्याडंबर मय जीवन के कारण,

  सहनशीलता का अभाव,

 दांपत्य जीवन में 

 अशांति,

अवैध संबंध,

 प्रदूषण जल वायु, भूमि आकाश में मात्र नहीं 

 विचारों के प्रदूषण के कारण,

 मानव चरित्र में भी अहंकार, काम क्रोध लोभ,

 मजहबी लडाइयाँ,

 मानवता की कमी,

 प्रदूषण प्रदूषण,

 न्यायालय में,

 पुलिस विभाग में 

 शिक्षालयों में

 सरकारी दफ्तरों में,

 प्रदूषण ही प्रदूषण ।


 



 

Saturday, April 11, 2026

नक्षत्र की दुनिया

 Daily challenge आजकी कविता।

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तारों की दुनिया।

 तार आकाश में 

 वह अलग दुनिया,

 चमकते तारे 

 आंखों के प्यारे।

उसमें ध्रुवतारा है,

 शासकों और देश को

 भयभीत को भयभीत करनेवाले धूम्रकेतु है।

नक्षत्र प्रपंच के विचित्र 

 चमकनेवाले

 अरबों की संख्या है।

 ज्योतिष शास्त्र में 

27नक्षत्र हैं।

 मानव की जन्म कुंडली 

 के आधार पर

 नक्षत्र परिणाम,

 भाग्य निर्णय करके 

 मानव की सृष्टि।

माता-पिता के द्वारा 

 जन्म लेने पर भी

 जीवन क्रियाकलाप 

 सूक्ष्म शक्ति ईश्वरीय देन।

 राजकुमार सिद्धार्थ के 

जन्म लेते ही

 जन्म नक्षत्र ने बताया 

 राजकुमार राजा नहीं,

 संन्यासी बनेगा।

भारतीय शास्त्र बताते हैं,


"जननी जन्म सौख्यानां वर्धनी कुलसंपदाम्, पदवी पूर्वपुण्यानां लिख्यते जन्मपत्रिका" 

 27नक्षत्रों के आधार  पर

 मनुष्य जन्म का सुख दुख निर्भर है।

 टूटते तारे देखना अपशकुन माना जाता है।

चमकते तारे आकाश में।

 भूलोक में बिजली के आविष्कार के कारण,

 पहाड़ की चोटी पर से

 घाटी पर देखने पर

 भूलोक में कृत्रिम नक्षत्र चमकते हैं।

 देश में अपूर्व अद्भुत कार्य करके,

 सितारे हिंद अलग

इतिहास में  नाम पाये

  देश भक्त शहीद,

 ऋषि मुनि युगावतार पुरुष, अभिनेता अभिनेत्री चमकते सितारे।

 आसमान में चमकते तारे,

 जग भाग्य विधाता 

 मानव मानव की विधि की विडंबना बतानेवाले,

 भूलोक के महापुरुष 

 जनकल्याण करके

 चमकते सितारे।

 अतः तारों की दुनिया 

 भूलोक के महापुरुष 

 सितारे हिंद 

 मानव कल्याण के 

 निर्माता,

 उनकी दुनिया 

 चमकीला,

रंगीला।

Friday, April 10, 2026

अधूरी ख्वाहिशें

 अधूरी खुशियाँ

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

11-4-26.

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  मानव जीवन में 

 थोड़े में कहें तो 

 भूलोक के जीवन में 

पूरी खुशियाँ  न 

 दशावतार में,

 न शिव पुराण में 

 न नलदमयंती कै 

दुष्यंत शकुंतला की प्रेम कहानी में,

विश्व विजयी

 सिकंदर के जीवन में।

 न चक्रवर्ती दशरथ के जीवन में,

न पांडवों में,

 न कौरवों में 

 न महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी के जीवन में,

 नेहरू के जीवन में,

 इंदिरा गांधी फेरोजखाँ के जीवन में 

 नाम के साथ बनिया गाँधीजी के जोडने  से

 न जीवन की खुशियाँ,

 न कबीर के जीवन चरित्र में,

 न तुलसी के चरित्र मैं 

 जन्म से अंधै सूरदास के 

निजी जीवन में।

 न सुकरात के जीवन में,

न उपन्यास सम्राट के जीवन में।

स्वर्गीय राष्ट्रपति यही कहा करते थे,

 ख्वाब देखो,

 क्या ख्वाब देखने से

 पूरी खुशियाँ मिलेगी क्या?

सत्यं वद,

 इस नारे का आदर्श पुरुष सत्य हरिश्चन्द्र 

 के जीवन में दुख ही दुख।

 दानवीर कर्ण के जीवन में ,

गहराई से सोचता हूँ,

 न जीवन में,

 किसी को न मिली 

 पूरी खुशियाँ।

 राम कहानी सुनाना

 यह मुहावरा राम के जीवन की अधूरी खुशियों की झाँकी।

 हिंदी क्षेत्र में 

 राजभाषा बनाने में 

 आज़ादी के बाद ही अड़चनें।

 पूरी खुशियाँ 

 देश भाषा संस्कृत है तो

‌वह क्यों मृत्यु भाषा बनी।

 हिंदी के विकास मैं 

 नागरी लिपि की चर्चा 

 अब भी जारी।

मानव मन  अति चंचल।

न उसमें  पूरी खुशियाँ,

 महात्मा बुद्ध की तपस्या भी अधूरी,

 किस उद्देश्य से  वे संन्यासी बने,

 रोग, बुढ़ापे, मृत्यु रहित 

 मानव जीवन बनाना,

उनकी इच्छा अधूरी,

 भारतीय नदियों का राष्ट्रीयकरण अधूरी।

 कृषी प्रधान देश में 

‌झीलों, तालाबों और जंगलों को नाश करके 

 किसानों को गांव में

खेती तंज नगर की ओर

 आकर्षित करना

‌भावी पीढ़ी को पूरी खशियाँ न देंगी।

 रेगिस्तान को उपजाऊ भूमि बनाने के प्रयत्न कर रहे हैं,

हम उपजाऊ भूमि को

 रेगिस्तान बना रहे हैं

 पता नहीं भावी जीवन 

 पानी के तड़पेगा।

 पैसा  है, वह पूर्ण खुशियाँ बुढ़ापे में न देंगी।

 मानव अधूरी खुशियाँ से

 सदा के लिए आँखें बंद कर लैगा।

 अभिनेताओं को

 एक ओर धन, यश ,सब मिलते हैं,

 पर उनके व्यक्तिगत जीवन में न पूरी खुशियाँ।

संसार में रोग है,

 दुर्घटनाएँ हैं,

 बुढ़ापा है,

 अल्पायू है,

 निस्संतान लोग हैं,

 जन्म से अपाहिज,

 अंधे बहरे गूँगे 

 असाध्य रोगी 

 ग़रीबी, अमिरी

 जय-पराजय 

काम, क्रोध मद लोभ

 माया महा ठगिनी,

अधूरी ख्वाहिश से भरा

 भूलोक जीवन।





 








 



Wednesday, April 8, 2026

शहीद मंगल पांडे

 शहीद मंगल पांडे।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

9-4-2026

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नवयुवकों! 

आज़ाद देश में 

 आनंद से,

 मूल अधिकार पाकर

भ्रष्टाचार रिश्वत भरे

सांसद विधायक चुननेवाले 

 अल्पसंख्यक शासक

के समर्थकों।

 मत देनै लेने

 रिश्वत देने लेनेवाले 

 अपराधी मतदाताओं!

सुनो!

 देश की आज़ादी 

आसानी से न मिली।

तन,मन,धन, प्राण तजे,

कठोर कारवास के दंड भोगे,

 लाठी के मार रहे,

फाँसी पर चढ़े

 महान देश भक्त 

 त्यागियों के

 रक्त है की धारा  में 

पनपी ,

स्वतंत्रता का होम यज्ञ।

 उनमें पहली स्वतंत्र की

 आवाज़ उठाकर 

 अंग्रेज़ी अफ़सर को

 मारकर सिपाही क्रांति है के अगुआ थै 

शहीद मंगल पांडे।

अंग्रेज़ों ने  बंदूक  में 

 भरने गाय और स्वर की

 चर्बी लगाने

 सनातन धर्म और मुगल मजहब के विरुद्ध आदेश दिया।

अपने धर्म विरुद्ध कार्य करने  मंगल पांडे

 तीस वर्ष का नवजवान 

तैयार नहीं थे।

 वे अंग्रेज़ी सेना के

 सिपाही होने के 

बावजूद भी,

इस कार्रवाई के

विरूद्ध पहली आवाज़ उठाई।

 अंग्रेज़ी सैनिक अधिकारियों को मारा।

 देश और धर्माभिमानी

 मंगल पांडे के कारण 

 सिपाही कलह प्रारंभ हुआ।

मंगल पांडे को फाँसी की सजा मिली।

 तीस साल की उम्र 

 देश और धर्म के स्वाभिमान के लिए 

 साहस के कदम उठाए 

वीर त्यागी मंगल पांडे को

‌अंतःदिल से सादर प्रणाम।

 सिपाही कलह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में के लिए एक चिंगारी बनी।

 मंगल पांडे का त्याग 

 चिर स्मरणीय है,

चिर अनुकरणीय है।

 ऐसे त्यागियों के मार्ग 

 अपनाना देश की आज़ादी, एकता,

 राष्ट्रीयता बनाए रखने 

 अत्यंत आवश्यक हैं।

 आजकल के भोगैश्वर्य 

 भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी 

 देश के लिए कलंक।

 उन भोगियों का अनुसरण न करके 

‌मंगलपांडे, सुखदेव, राजगुरु, खुदीराम बोस

 वांचीनाथन आदि

 त्यागियों के अनुसरण ही

 देश कल्याण का सर्वोच्च मार्ग हैं।

 जय शहीद मंगल पांडे,

 जिनके कारण सुप्त भारतीय जाग उठे,

 विदेशियों को सिर दर्द बना।

 आज़ादी देकर भागना पड़ा।


 



 


 

 

 


Monday, April 6, 2026

छत्रपति शिवाजी महाराज

 [5:40 am, 07/04/2026] +91 97844 79720: 

मराठा एवं संस्कृत को राज भाषा घोषित किया

[5:40 am, 07/04/2026] +91 97844 79720: यह स्वरचित व मौलिक है।

[6:33 am, 07/04/2026] sanantha.50@gmail.com: छत्रपति शिवाजी महाराज

एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै तमिलनाडु

7-4-26

महाराष्ट्र सिंह,छत्रपति शिवाजी महाराज,

महाराष्ट्र साम्राज्य के मूल शक्ति,

मुगल साम्राज्य का सिंह स्वप्न,

गोरिल्ला युद्ध नीति के द्वारा महाराष्ट्र का निर्माता।

उनकी वीरता भरे वचन है--

भारत देश प्राचीनतम् देश है,

इस बात को कभी न भूलना।

धनी धन से, अक्लमंद अक्ल से, बलवान बल से

सेवा कीजिए।

शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु समर्थ रामदास,

उन्होंने शिवाजी के चिंतन में

धैर्य,धर्म और स्वराज्य सिद्धांतों के बीज बोये।

शिवाजी के राजनैतिक गुरु दादाजी कोंडदेव.

शिवाजी की माता जीजाबाई भक्ता और धैर्यवान स्त्री।

माता ने ही शिवाजी को बचपन से ही

रामायण,महाभारत की कथाओं के द्वारा 

हिंदू धर्म ,देश भक्ति भरकर हिंदवी स्वराज की प्रेरणा दी थी। 

शिवाजी महाराज के कारण ही जनता में हिंदुत्व की भक्ति बढी। 

जय शिवाजी महाराज।

उनके जीवन चरित्र पढकर उनकी नैतिक सिद्धांतों का अनुकरण ही 

उनके प्रति श्रद्धांजली होगी।

उनकी देशभक्ति,गुरुभक्ति,ईश्वर भक्ति, विदेशी धर्म का आदर,आदि

चिरस्मरणीय और अनुकरणीय होते हैं।