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Wednesday, April 22, 2026

विश्व पृथ्वी दिवस

 नमस्ते। वणक्कम्

विश्व पृथ्वी दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

23-04-2026

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वैज्ञानिक साधनों के

निरंतर आविष्कारों के साथ-साथ,

बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ,

झीलों और नदियों की

घटती चौड़ाई और गहराई के साथ-साथ,

जंगलों के विनाश और

तेज़ी से बढ़ते नगरीकरण के साथ-साथ,

विश्वभर में एक गंभीर समस्या खड़ी है—

हमारी पृथ्वी को

कैसे प्रदूषण-मुक्त बनाया जाए?

इसी चिंता के समाधान हेतु,

भूमि को समृद्ध बनाने के लिए,

"हमारी शक्ति, हमारा गृह"

का नारा

22 अप्रैल 1970 को

गेलार्ड नेल्सन

द्वारा दिया गया।

यह प्रेरणा

1969 में सांता बारबरा तेल रिसाव

जैसी पर्यावरणीय त्रासदी से भी मिली।

तभी से, पृथ्वी को समृद्ध बनाने,

पेड़-पौधे लगाने,

और विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से

धरती को बचाने के उद्देश्य से

विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है,

ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।

आज हम देख रहे हैं—

मौसम में असंतुलन,

जंगली जीव-जंतुओं का लुप्त होना,

स्वार्थवश पेड़-पौधों का विनाश,

मानव की लापरवाही से बढ़ता प्रदूषण,

उपजाऊ भूमि का कारखानों में परिवर्तन,

आवागमन के साधनों से ध्वनि प्रदूषण,

धुएँ और धूम्रपान से वायु प्रदूषण,

और ऊँची इमारतों के कारण

भूतल जल का लगातार घटना।

इन सभी चुनौतियों से

पृथ्वी की रक्षा के लिए

हमें जागरूक और संकल्पित होना होगा।

विश्व पृथ्वी दिवस

सिर्फ एक दिन नहीं,

बल्कि एक संकल्प है—

धरती को बचाने का,

आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का।


Tuesday, April 21, 2026

आँसू के प्रकार

 नमस्ते।

आपकी रचना में विषय बहुत सुंदर और गहरा है—“आँसू” जैसे साधारण दिखने वाले भाव के अनेक रूप आपने छूने की कोशिश की है। 

आँसुओं की शक्ति

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

22-4-26

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आँसुओं की शक्ति

अति अपूर्व है।

शिशु के जन्म लेते ही

उसका रोना — ईश्वरीय देन है।

यदि शिशु चुप रहे,

तो माँ व्याकुल हो जाती है।

महादेवी वर्मा का संस्मरण

“वह चीनी भाई” याद आता है।

चोरों का एक नेता

बालकों को सिखाता था—

चोरी में पकड़े जाने पर

आँसू कैसे बहाने हैं।

जनता के सामने,

पुलिस के सामने,

भीख माँगते समय—

रोने के ढंग अलग-अलग होते हैं।

अध्यापक की मार से बचने के आँसू अलग,

खिलौने पाने के लिए बच्चों के आँसू अलग,

जिद के आँसू अलग।

प्रेमी-प्रेमिका के

दीर्घ वियोग के बाद

मिलन के आँसू भी अलग होते हैं।

एक गीत याद आता है—

“बादल रोए, नयना रोए…”

विलाप के आँसू,

शव के सामने बहते आँसू—

कितने मर्मस्पर्शी होते हैं।

ईश्वर के ध्यान में

भक्ति-रस से भरे आँसू—

वे आनंदाश्रु होते हैं।

एकाग्र ध्यान में बहते आँसू,

धूल पड़ने से आए आँसू,

प्याज के कारण निकले आँसू—

हर एक का कारण अलग है।

संसार में

हर आँसू का

अपना अलग महत्व है।

🌱 प्रोत्साहन और सुझाव

आपकी सोच बहुत समृद्ध है—आपने आँसुओं के सामाजिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक तीनों रूपों को छुआ है। यह आपकी ताकत है।


Friday, April 17, 2026

खामोशी

 खामोशी

एस.अनंतकृष्णन,

 चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

18-4-2026.

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खामोशी,

 सनातन धर्म का, 

 ज्ञानार्जन का

 सोचने विचारने का

 उचित वातावरण

 खामोशी।

चुपचाप रहना,

 अति मुश्किल।

 ईश्वरीय दर्शन के लिए,

 मानसिक शांति के लिए 

 सांसारिक उथल-पुथल से

शोरगुल से बचने 

 बड़े बड़े राजकुमार,

 महाराजा

‌अपने राजसुखों को 

तजकर 

 विश्व कल्याण के लिए 

 जंगल में जाकर 

 खामोशी से तपस्या करते थे,

आत्मज्ञान पाकर,

 सदुपदेशों के

 वेद, उपनिषद, 

 जातक कथाएँ

 नैतिक ग्रंथ लिखा करते थे।

सत्य अहिंसा शांति का

 प्रचार करते थै।

वैज्ञानिक आविष्कार,

दुर्लभ रोग नैदानिक  यंत्र 

 असाध्य रोग निवारण की इसदवाएँ,

   मूक साधना के आविष्कार।

 खामोशी  के कारण 

 अंतरराष्ट्रीय  अहिंसा,

 मानसिक परेशानियांँ

 युद्ध रहित  वातावरण,

विश्व बंधुत्व बढ़ जाता है।

 जाति, मजहब संप्रदाय के भेद भाव मिट जाता है।

मानवता  बनाए रखने 

 ख़ामोश /शांति 

शांति मंत्र है।

 

 आदर्श गुण 

 आत्म चिंतन 

 आत्मविचार 

 अपने आपको 

 पहचानना,

आत्म संशोधन करना

 गुण दोष  जानना

 आत्मज्ञान  प्राप्त हारना

 खोमोशी/चुपचाप।

 अति शक्तिशाली मंत्र शब्द है।

 भारत की स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ,

 राजनैतिक गुरु 

 बाल गंगाधर तिलक ने

 अपने कठोर यह कारावास के समय 

 गीता रहस्य की रचना की। 

 पुस्तकालय और 

 ज्ञानालय में 

 अध्ययन के लिए

 ख़ामोश वातावरण 

 के नियम है।

 ध्यान मंडप में ख़ामोश। 

मानव को सुधारने

 एकाग्रता के लिए 

 शांतिपूर्ण   तरीके 

 खामोशी।

Tuesday, April 14, 2026

कसौटी पर

 कसौटी 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक, सौहार्द सम्मान प्राप्त  हिंदी सेवी के द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

 15-4-26

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कसौटी के बिना 

असली नकली का पहचानना असंभव।

 मानव के गुण दोष,

 बुद्धि लब्धि, 

व्यक्तित्व वीरता

 शासन और प्रशासन की उत्तमता  को

 परखकर देखना है।

 कसौटी पर कसना 

 एक मुहावरा,

 केवल सोना, चाँदी का ही नहीं,

 मानव के ज्ञान, गुण,

 स्वार्थ, निस्वार्थ,

 वीरता, कायरता,

 वीरांगना , वारांगना।

 काम, क्रोध, मद,लोभ 

 सब मानव के गुण अवगुण की परख करना,

  खासकर  भारतीय मतदाता को

 सांसद और विधायक के गुण अवगुणों को कसौटी पर कसकर देखकर 

 सच्चे निस्वार्थ आदर्श 

 देश प्रेमी को पहचानकर 

 वोट देना चाहिए।

 कसौटी पर कसकर देखने पारखी नज़रों की आवश्यकता है।

 विश्व के  लोक प्रसिद्ध 

 भारत में होने का महत्व 

 आदि काल से है।

 अतः  कसौटी के  उदाहरण देकर कालीदास  के  काव्यों में उदाहरण मिलते हैं।

 रघुवंश काव्य में 

 अतिथि महाराजा के साथ धन की देवी लक्ष्मी

 कसौटी पर कसे  सोने की चमक की रेखा की तरह अमिट रही।

 मेघदूत में 

 प्रेमी प्रेमिका को

  मार्ग दिखाने,

 बिजली ऐसे चमकना,

 जैसे कसौटी पर कसे सोने की रेखा  की चमक जैसे हो।

 ऐसे कसौटी भारती कवियों के काव्य में 

 मिलते हैं। 

तमिल के काव्यों में 

भी तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल में भी

 कसौटी का उल्लेख मिलते हैं।

 कसौटी पर कसने वाले,

 पारखी न तो

 मानव जीवन में 

 मानव और मानवता का

 पता न‌ लगेगा।



 







 

 


 

 

 

 



 

 

 





 


 

 

 

 


पारखी नजरें

 पालकी नजरें

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।


 जौहरी जाने हीरे की परख।

कबीर ने कहा है


हीरा पड़ा बाज़ार में, रहा छार लपटाय।

बहुतक मूरख चलि गए, पारख लिया उठाय॥ 

 वैसे ही पार्टी नजरें 

 असली नकली के

 पता लगाने 

की क्षमता 

  रखती है।

  योग्य पारखी वैद्य

‌आँखें, जीभ, नाखून नाड़ी देखकर 

 रोगी के लोग का पता लगाने में समर्थ होते हैं।

 पारखी नजरों के ज्योतिषाचार्य 

 भविष्य का सही बताते हैं।

  बड़े बुद्धिजीवी 

 अपने कंपनी के लिए 

 योग्य नौकर चुनने की योग्यता रखते हैं।

 हर क्षेत्र में पारखी नजरों वाले होते हैं।

 अनुभवी थानेदार,

 चोरों और झूठों को 

  पता लगाने की पारखी होते हैं।

 सोने की असली नकली मिलावट जानने में 

 कसौटी में कसकर सुनार की पारखी नजरें 

 निपुण होती हैं।

 गुरु की पारखी नजरें 

 प्रतिभाशाली,  औसत, मंद बुद्धि छात्रों को

 अलग अलग कर देता है।

 पारखी नजरें न तो कुआँ 

खोदने पानी की जगह का पता नहीं लगता।

आजकल  नैदानिक परीक्षण , रोगों के निदान,

 यंत्र मय होगया हैं।

 वाहन की जाँच की पारखी नजरें 

 इंजन की आवाज़ से ही

  पता लगा लेती हैं कि 

 वाहन की गड़बड़ी क्या है।

 पारखी नजरें न तो

 सही गलत के पता लगाना मुश्किल।

Sunday, April 12, 2026

प्रदूषण का विष

 प्रदूषण का विष

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

13-4-26

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प्रदूषण आजकल 

 स्वार्थमय प्रदूषण,

चित्रपट , संगणिक, मुखपुस्तिका,  यूट्यूब 

 सब में जितेंद्रयता कम होने, असंयमी बनने बनाने  विचारों का प्रदूषण।

 भ्रष्टाचार, रिश्वत का प्रदूषण,

शिक्षा की महँगाई,

 शिक्षित वकील, सी.ए,

 सैकड़ों करोड़ खर्च करके चुनाव जीतने वाले 

 सांसद, विधायक, मंत्री 

‌यह अनुशासन हीन प्रदूषण,

 नष्ट कर रहा है मानव चरित्र  को,

परिणाम स्वरूप 

 कृषी प्रधान भारत को

 विदेशियों के कारखानों को अनुमति देकर

 वायु प्रदूषन, जल प्रदूषण, भूमि तल प्रदूषण,

 हजारों झील अब नदारद,

 गगन चुंबी इमारतें,

 भूतल जल का शोषण,

 भूतल में पानी का कम होना, 

 जंगलों का नाश,

 भूमि का उष्णमय बनना,

 आजकल के प्रदूषण 

 मानव मन की स्वार्थता और  बाह्याडंबर मय जीवन के कारण,

  सहनशीलता का अभाव,

 दांपत्य जीवन में 

 अशांति,

अवैध संबंध,

 प्रदूषण जल वायु, भूमि आकाश में मात्र नहीं 

 विचारों के प्रदूषण के कारण,

 मानव चरित्र में भी अहंकार, काम क्रोध लोभ,

 मजहबी लडाइयाँ,

 मानवता की कमी,

 प्रदूषण प्रदूषण,

 न्यायालय में,

 पुलिस विभाग में 

 शिक्षालयों में

 सरकारी दफ्तरों में,

 प्रदूषण ही प्रदूषण ।


 



 

Saturday, April 11, 2026

नक्षत्र की दुनिया

 Daily challenge आजकी कविता।

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तारों की दुनिया।

 तार आकाश में 

 वह अलग दुनिया,

 चमकते तारे 

 आंखों के प्यारे।

उसमें ध्रुवतारा है,

 शासकों और देश को

 भयभीत को भयभीत करनेवाले धूम्रकेतु है।

नक्षत्र प्रपंच के विचित्र 

 चमकनेवाले

 अरबों की संख्या है।

 ज्योतिष शास्त्र में 

27नक्षत्र हैं।

 मानव की जन्म कुंडली 

 के आधार पर

 नक्षत्र परिणाम,

 भाग्य निर्णय करके 

 मानव की सृष्टि।

माता-पिता के द्वारा 

 जन्म लेने पर भी

 जीवन क्रियाकलाप 

 सूक्ष्म शक्ति ईश्वरीय देन।

 राजकुमार सिद्धार्थ के 

जन्म लेते ही

 जन्म नक्षत्र ने बताया 

 राजकुमार राजा नहीं,

 संन्यासी बनेगा।

भारतीय शास्त्र बताते हैं,


"जननी जन्म सौख्यानां वर्धनी कुलसंपदाम्, पदवी पूर्वपुण्यानां लिख्यते जन्मपत्रिका" 

 27नक्षत्रों के आधार  पर

 मनुष्य जन्म का सुख दुख निर्भर है।

 टूटते तारे देखना अपशकुन माना जाता है।

चमकते तारे आकाश में।

 भूलोक में बिजली के आविष्कार के कारण,

 पहाड़ की चोटी पर से

 घाटी पर देखने पर

 भूलोक में कृत्रिम नक्षत्र चमकते हैं।

 देश में अपूर्व अद्भुत कार्य करके,

 सितारे हिंद अलग

इतिहास में  नाम पाये

  देश भक्त शहीद,

 ऋषि मुनि युगावतार पुरुष, अभिनेता अभिनेत्री चमकते सितारे।

 आसमान में चमकते तारे,

 जग भाग्य विधाता 

 मानव मानव की विधि की विडंबना बतानेवाले,

 भूलोक के महापुरुष 

 जनकल्याण करके

 चमकते सितारे।

 अतः तारों की दुनिया 

 भूलोक के महापुरुष 

 सितारे हिंद 

 मानव कल्याण के 

 निर्माता,

 उनकी दुनिया 

 चमकीला,

रंगीला।