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Monday, February 16, 2026

तिरु मंत्र

 नमस्ते। 🙏

आपका प्रयास अत्यंत सराहनीय है। भाव बहुत सुंदर है। मैं प्रत्येक पद को थोड़ा शुद्ध, सरल और दार्शनिक दृष्टि से सुसंगत हिंदी में प्रस्तुत कर रहा हूँ — मूल भावना को बनाए रखते हुए।

35. मेरा मार्ग – अनोखा मार्ग

(என் வழி – தனி வழி)

मेरा मार्ग एक अद्वितीय मार्ग है।

सर्वेश्वर शिव का भी अपना एक विलक्षण मार्ग है।

हम शिव का यशोगान करेंगे।

जब शिव प्रसन्न होते हैं,

तो देवलोक, भूलोक और अष्टदिशाओं के सभी सुख प्रदान करते हैं।

और तब हम अपनी इच्छाओं को भी उनके अनुग्रह से साध सकते हैं।

टिप्पणी:

यहाँ “उनको हम अपनी इच्छाओं के अनुसार शासन करेंगे” वाक्य थोड़ा कठोर प्रतीत होता है। शिव को शासन करना नहीं, बल्कि उनके अनुग्रह से इच्छाओं की सिद्धि होना — यह भाव अधिक उपयुक्त है।

36. प्रधान (मुदल्वन्)

(முதல்வன்)

हम अपने आदि पिता,

नंदी के स्वामी,

अमृत समान अनुपम दानी,

विश्वनाथ शिव की

निष्कपट भाव से प्रार्थना करें।

यदि हम बिना भेदभाव के, शुद्ध हृदय से प्रार्थना करें,

तो निश्चय ही सर्वेश्वर का अनुग्रह प्राप्त होगा।

37.

मैं प्रतिदिन स्थिर चित्त होकर भगवान की प्रार्थना करूँगा।

वह भगवान प्रज्वलित अग्नि के समान ज्योति-स्वरूप हैं।

जैसे आकाश में चन्द्रमा शीतल प्रकाश देता है,

वैसे ही वे मेरे शरीर में निवास कर

मुझे जीवन प्रदान करते हैं।

यदि आप चाहें तो मैं इसे और अधिक काव्यात्मक शैली में भी ढाल सकता हूँ —

जैसे आपने “दैनिक काव्य साधना” में आरंभ किया है।

आपका आध्यात्मिक चिंतन दिन-प्रतिदिन अधिक गहराता जा रहा है। 🙏

विचार

 आराधिका  साहित्यिक मंच  साप्ताहिक लेखन आयोजन

वार 16-2-26 to 22-226

सोमवार 16-2-26

शीर्षक--विचार

विधा - अपनी हिंदी अपने विचार अपनी स्वतंत्र शैली  भावाभिव्यक्ति

रचना--मन है विचारों के कंद्र।

           विचाह ही ऊँचे हीरे।

           हम जो भी दृश्य देखते हैंं,

           घटना देखते हैं, 

            उनसे जो अनुभव 

           संकलन त्रय के अनुसार। 

           विचारों में क्रांति लाते हैं

           स्वतंत्रता संग्राम के नारा ---जन्म सिद्ध  अधिकार.

             आज़ाद भारत --गरीबी हटाओ।

           जनसंख्या --- हम दो,हमारे दो।

            जय जवान जय किसान।

           विचार तरंगों में

            सद्विचार सदा सुख देता है,

           भूमि पर ठहरना,आकाश पर उडना,

          उत्थान-पतन विचारों पर निर्भर

         स्वाश्रित रहना,पराश्रित रहना 

           स्वाभिमान, मर्यादा , अवमर्यादा

           मान-अपमान  विचारों पर निर्भर।

          सादा जीवव उच्च विचार 

            धर्म चिंतन,मानवता

        मनुष्य को ले जाता शिखर पर।


रचनकार का नाम :- एस. अनंतकृष्णन ,तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक के द्वारा  रचित

मौलिक स्वरचित रचना,

Saturday, February 14, 2026

शिवरात्रि

 शिव रात्रि 

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 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

15-2-26

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शिव विश्वनाथ, लोकनाथ।

निराकार आकार

मेक्का में भी वही रूप।

 वेटिकन सिटी  में भी 

शिव के आकार।

आ सेतु हिमाचल  की

आध्यात्मिक एकता 

शिव भगवान के नाम से

 अक्षुण्ण है।

 काशी रामेश्वर 

  शैव वैष्णव दोनों की 

एकता के आधार।।

तमिल में नारा है

 दक्षिण के शिव की जय।

देश देश के शिव की जय।

 कैलाश से कार्तिक शिवपुत्र दक्षिण आये,

वे बन गए तमिल भगवान।

 भारतीय  एकता के सूत्र धारी ‌शिव।

 पुण्य कमाने काशी जाने के पहले  

रामेश्वर जाना शास्त्र नियत सत्य है।

शिव शक्ति की महिमा अनंत।

 आदि शिव  अपनी शक्ति माया 

द्वारा संसार  को दुखी बनाकर 

‌लोगों को  अपनी ओर 

 ध्यान मग्न कराते हैं।

 महान शिव की आराधना

  फाल्गुन महीने में।

  15-2-26 महाशिवरात्रि।


 व्रत  पद्धति 

 शिवरात्रि के दिन सबेरे से 

दूसरे दिन के सबेरे तक

  उपवास रखते हैं।

रात भर शिव नाम जपा करते हैं।

 मंदिरों में पूजा 

 रात भर मेला लगता है।

 चार काल  पूजा करते हैं।

अभिषेक आराधना करते हैं।

 भक्ति पूर्ण वातावरण में 

शिव नाम जपकर 

  शिव के अनुग्रह  के पात्र बनते हैं।

 तमिलनाडु के शिव क्षेत्र में 

रात भर जागकर 

 शिव  का यशोगान करते हैं।

फाल्गुन महीने चतुर्थी तिथि में 

 एक शिकारी रात भर

 बिल्व पेड़ पर बैठकर 

बिल्वपत्र तोड़कर

 एक एक करके नीचे डालता रहा।

पेड़ के नीचे ‌शिवलिंग था।

 उसके है अज्ञान के

 इस कार्य शिव प्रसन्न हुए।

सुबह तक वह  बिल्र्चव पत्र  डालता रहा।

अनजान अर्चना  शिव प्रसन्न।

वह दिन फाल्गुन महीने 

चतुर्दशी में मनाया जाता है।

देव असुर समुद्र मंथन में 

 जो विषय निकला, उसे 

‌शिव ने पिया।

शिव और पार्वती का विवाह हुआ।

अनेक कहानियां।

हरि अंत हरि कथा अनंत।

जो भी हो,

 मानव मन में 

 शिवरात्रि शिवाराधना 

 मनोवांछित फल प्राप्त करने का मार्ग है।

जलसंकट

 जल संकट

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

14-2-26

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जल संकट क्यों?

प्रकृति की देन।

मरुभूमि वहाँ पानी

की संभानाएँ नहीं।

जीव नदियाँ रहित भूमि।

वर्षा पर निर्भर भूमि।

 जो भी हो, सरकार की योजना,

नदियों का राष्ट्रीयकरण 

  देश को समृद्ध बनाने 

 जीवों को सुखी रखने 

आजकल  की वैज्ञानिक सुविधाएँ,

 दूर कर सकती है।

भारत में स्वार्थ राजनीति 

 बाह्याडंबर भक्ति,

 काली, विनायक सुंदर मूर्तियों के करोड़ों रूपए बेकार।

 इन रूपयों को जलसंकट दूर करने

 समाधि मूर्तियाँ छोटी कम खर्च में करके 

 वर्षा के पानी को सुरक्षित  रखने बाँध बाँधंने  पर 

 जल संकट नहीं के बराबर।

 चेन्नई नगर में मात्र 

 तीन हज़ार से अधिक झील नदारद।

 अधिक पढ़ें लिखे इंजनीयर कलक्टर 

 शासक दल के बेगार।

 कानून न्याय के विरुद्ध 

 इमारतें बनाने

 झील के ओझल होने

 पहाड़ चूर्ण होने,

गगनचुंबी इमारतें बनाने 

जंगलों को नगरीकरण नगर विस्तार 

 कृषी प्रधान देश को

उद्योग मंडल बनाना

जल प्रदूषण 

सब कारण है 

जलसंकट का।

 राजाओं ने राजमहल बनवाया।

धर्माचार्य साईं देव पुटृटभर्ति साईं

चेन्नई के लिए कृष्णा नदी नहर बनवाया।

राजनैतिक 





Wednesday, February 11, 2026

रैन बसेरा

 रेन बसेरा 

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एस . अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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12-2-26

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भारत आज़ादी के बाद 

 हिंदू मुस्लिम संघर्ष,

 अतिथि  हिंदू मुस्लिम 

 बेरहमी मजहबी लड़ाई

 देश का बँटवारा

 भारत से पाकिस्तान 

 पाकिस्तान से भारत 

 आये अतिथि

 हजारों गृह हीन

भारत शरणार्थी 

 उनके निवास में 

रेन बसेरा अधिक सहारा।

 गाँधीजी नेहरू जैसे

 पाश्चात्य प्रेमी

 एक मजहब के लिए 

अलग देश देकर भी

 धर्मनिरपेक्ष राज्य।

 नाम मात्र का समान अधिकार।

 अल्पसंख्यकों की सुविधाएं 

 उनके मजहब की शिक्षा 

 पाठशालाओं में।

पर बहुसंख्यक हिन्दूओं के लिए 

 अपने वेद ग्रंथ उपनिषद 

 आध्यात्मिक वर्ग   चलिना मना है।

विश्व भर में ऐसा देश नहीं है।

 भारतीय गरीब फुटपाथ वासी,

 वर्षा, आँधी तूफान 

 आदि में ठहरने

  रैन बसेरा।

 आज़ादी के 78साल के बाद  भी,

 चुनाव वोट के लिए 

 फुटपाथ वासियों को

 मताधिकार देकर 

 कष्ट दे रहे हैं।

 न उनके लिए स्थाई बसेरा।

उनके प्रति 

 स्थाई सहानुभूति 

नहीं है।

 चुनाव के समय 

चंद रूपये,

 ब्रियायाणी,

 शराब बस 

 रैन दिन  के बसारे हीन

 गरीब लोग।

 उनके छोटे मोटे 

व्यापार में लूटनेवाले 

जबर्दस्ती से रिश्वत लेनेवाले। 

ज़रा भी   उन अधिकारियों में  दया नहीं। न्याय नहीं।

 जन्म दिन प्रमाण पत्र के लिए रिश्वत,

 मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 

 रिश्वत।

  रैन बसेरा हीन

‌गरीबों को सताकर 

 लूटनेवाले अधिकारी 

 राजनैतिक दल

‌तभी सोचना पड़ता है

 रैन बसेरों के  चिंतनीय स्थिति   रिश्वत विभाग 

बेकार।

 चुनाव आयोग बेकार।

 रैन बसेरे   शिक्षा भी

 उचित नहीं।

 भगवान और जनता की दृष्टि से पापी।


 

 

 

 


 

 

 


 






 

 

 



 




 

 


 

 


 

 


 






 







 


 






Tuesday, February 10, 2026

दीप और पतंगा

 दीपक और पतंगा

एस. अनंतकृष्णन,चेन्ने,तमिल्नाडु हिंदी प्रेमी,प्रचारक द्वारा रचित भावात्मक रचना

11-2-26.


दीपक तम मिटानेवाले  ,

दीप ज्योति में दिव्य शक्ति ।

दीप प्रकाश ही देव है। 

तमिल सिद्ध रामलिंग अडिकलार का मंत्र है

अनुग्रहित बृहद् ज्योति,अनुग्रहित बृहद ज्योति!

विशिष्ट बृहद् करुणा अनुग्रहित बृहद ज्योति !

पतंग निशाचर एकनिश्चित दिशा पर उडनेवाले,

रात की रोशनी दिशा निर्देशक ।

दीप के प्रकाश से आकर्षित  वह ,

चक्कर लगाकर थककर मर जाते हैं।

दीप माया है, पतंगों का प्यारा है।

अनजान पतंगा दीप को प्रेमी बनाकर

चक्कर लगाकर प्राण तज देता है।


दीप माया है तो पतंगा  माया मोहित

न समझता,चमकनेवाले सब सोना।

दीप की चारों ओर रोशनी ही रोशनी।

तब पतंगा दिशा हीन हो,माया में चक्कर लगाकर

अज्ञानता से  प्राण तज देता है। 

बाह्य आकर्षम मानव को दिशाहीन कर देता है।

Monday, February 9, 2026

विद्यार्थी जीवन

 विद्यार्थी जीवन 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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10*2*26.

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विद्यार्थी  जीवन,

 आदर्श सर्वांगीण 

विकास का

 आधार शिला।

 होनहार बिरवान  के होत  चीकने  पात।

 हमारे जमाने में 

 गुरु अति आदरणीय रहे।

राजा भी उनके सामने 

 घुटने देकर विनम्र रहता था।

गुरु की माँग पर

 अंगूठा काट देते।

 वह गुरु शिष्य परंपरा 

 स्वार्थ जातिवाद 

 कर्ण के शाप की परंपरा 

 महान ग्रंथों  के कलंकित 

 गुरु परंपरा, सर्वशिक्षा 

 अभियान अब गुरु को

 अध्यापक बनाकर पेशेवर बना दिया।

 अब भी न गुरु तटस्थ।

ट्यूशन पैसे वेतन।

 पंद्रह हजार अप्रशिक्षित 

 निजी स्कूलों के अध्यापक का आदर

सरकारी स्कूल के अध्यापकों को नहीं।

 निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का सम्मान 

 सरकारी स्कूलों के छात्रों में ,

मातृभाषा के माध्यम के  छात्रों  में 

एक हीनता ग्रंथी।

बुद्धि लब्धी में फर्क।

 तन मन धन  की प्रतिभा में फर्क।

आजकल के विद्यार्थी जीवन में 

 प्राचीन काल के जाति भाव,

 आधुनिक काल में  धन।

 विद्यार्थी जीवन  में 

आजकल धन की महिमा।

 ट्यूशन छात्र का सम्मान।

 पक्षपात 

 प्रतिभा  का महत्व नहीं।

दान के आधार पर 

धन के आधार पर

 स्कूलों में भर्ती।

 सरकारी स्कूल में 

 न खड़िया,

 न श्याम पट 

 सब के होने पर

 अध्यापक की नियुक्ति में देरी।

 अध्यापक  की नियुक्ति के बाद छुट्टी की  सुविधाएँ।

 निजी स्कूलों के अध्यापक  एक दिन भी

न देरी से  आने पर

 छुट्टी लेने पर वेतन में 

कटौती।

 आधुनिक समाज विद्यार्थी धन के महत्व पर  शिक्षा तोलते हैं।

 विद्यार्थी को हर फन मौला बनाने 

 अभिभावक उनको 

 आज़ादी नहीं देते।

आधुनिक विद्यार्थी जीवन 

 चिंताजनक है,

 मातृभाषा के महत्व को को मंद करनेवाले है।