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Saturday, July 25, 2026

पुनर्जन्म से बचना

 श्री राम साहित्य सेवा संस्थान,अयोध्या उत्तर प्रदेश को नमस्कार। वणक्कम्।

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मानव जन्म कर्मफल का परिणाम।

 मानव जन्म में 

 पारिवारिक बंधन,

 रिश्ते-नातेदारों का बंधन,

इष्ट मित्रों के प्रति 

अंधे प्रेम,

परिणाम 

स्वार्थ मय जीवन,

 एक पक्षीय कार्रवाई 

 तटस्थता रहित जिंदगी,

अधूरी इच्छाएँ,

 मृत्यु 

 पुनर्जन्म।

 अतः मानव जीवन में 

 अनासक्त रहना, 

ईश्वर  के प्रति लगन।

 राम नाम जपना,

 सांसारिक 

बंधनों से दूर रहना,

 

 "राम-नाम-मनि-दीप धरु, जीह देहरी द्वार।तुलसी भीतर बाहिरौ, जौ चाहसि उजियार॥"

 अतः पुनर्जन्म न लेना है तो  केवल राम नाम जपना अनासक्त जीवन बिताना।

 यही भारतीय आध्यात्मिक सीख।।

 

 


 



 



 

 

 


 

 

 


 

 



 

 








 



 

पिघलती बर्फीली चट्टानें

 




पिघलते बर्फीली चट्टानें 

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

25-7-27.

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 प्रकृति के विरुद्ध,

 मानव वैज्ञानिक 

 आविष्कारों के अधीन 

  पराधीन जीवन।

 मानव के सारे काम 

यंत्रवत, 

सोच रहा है मानव

 प्रकृति हमारे वश में,

 पर प्राकृतिक बिगाड़ 

 ऐसा खतरा, 

कुपित प्रकृति से बचना 

 अति मुश्किल।

 सुनामी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण।

धनुषकोटी का विनाश 

 आधुनिक प्रमाण।

 मनुष्य के आविष्कार  से पता लगाये  आवागमन के साधन,

 कारखानों के विकास,

 उनसे निकले धुएँ,

 गर्म  वायु ,

 जंगलो का विनाश 

 नगरीकरण नगर विस्तार के नाम से

झीलों का नदारद

भूमि को गर्मा गर्म

   बना रहा है,

 परिणाम स्वरूप 

 बर्फीली चट्टानें,

पर्वत पिघल रहा है,

 इस परिस्थिति के 

 विपरीत  ऐसी स्थिति  होगी,

 जलप्रलय होगा,

पिघलने वाली 

चट्टानें 

 भूमि गर्मीकरण ,

अकाल की पूर्व सूचना।

 समुद्र जल स्तर में वृद्धि, 

पीने के पानी का अभाव,

 बाढ़  आने की  सौभानाएँ,

समुद्री भूकंप,

ज्वालामुखी विस्फोट 

 भू-स्खलन  आदि

 भयंकर  भावी

 संकट की सूचना।।

 इन बातों पर 

  ध्यान रखकर,

 अति सावधान से

 न रहें तो 

मानव जीवन 

  जीना दूभर।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित रचना।


आपकी रचना का भाव अत्यंत सामयिक है। इसमें ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण प्रदूषण और प्रकृति के प्रति मानव की उपेक्षा का प्रभावशाली चित्रण है। भाषा को थोड़ा परिष्कृत करने और प्रवाह बढ़ाने से यह और अधिक प्रभावशाली बन सकती है।


पिघलती बर्फीली चट्टानें

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

25-7-2027

प्रकृति के विरुद्ध

मानव के वैज्ञानिक

आविष्कारों ने

जीवन को

यंत्रवत बना दिया है।

मनुष्य सोचता है—

प्रकृति उसके वश में है,

किन्तु प्रकृति का संतुलन

बिगड़ने पर

उसके प्रकोप से बचना

अत्यंत कठिन है।

सुनामी इसका

प्रत्यक्ष उदाहरण है।

धनुषकोडी का विनाश

आज भी

उस त्रासदी की

याद दिलाता है।

आवागमन के बढ़ते साधन,

कारखानों का विस्तार,

धुएँ और गर्म गैसों का उत्सर्जन,

जंगलों की कटाई,

नगरों का अनियंत्रित विस्तार,

झीलों का लुप्त होना—

ये सब मिलकर

धरती को

लगातार गर्म कर रहे हैं।

परिणामस्वरूप

बर्फीली चट्टानें

और हिमालय के हिमनद

तेज़ी से पिघल रहे हैं।

यदि यही स्थिति रही,

तो जलप्रलय,

समुद्र के जलस्तर में वृद्धि,

पीने के पानी का संकट,

बाढ़, सूखा,

भूस्खलन,

समुद्री भूकंप,

ज्वालामुखी विस्फोट

जैसी अनेक प्राकृतिक आपदाएँ

मानवता के सामने

गंभीर चुनौती बन जाएँगी।

समय रहते

यदि हम

प्रकृति का सम्मान करें,

पर्यावरण की रक्षा करें

और सजग बनें,

तभी मानव जीवन

सुरक्षित और सुखमय

बना रह सकेगा। – एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई :::**

आप चाहें तो मैं इसे और अधिक काव्यात्मक छंदबद्ध शैली में भी परिष्कृत कर सकता हूँ।

Wednesday, July 22, 2026

खुशियों की‌ चाबी

 



खुशियों की चाबी

‌एस.अनंतकृष्णन्

चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

23-7-26

++++++++++++

चाबी का काम बंद कमरे को खोलना।

 खुशियों की चाबी का मतलब  संताप के अंधेरे से  बाहर आना।

 वह चाबी है, 

अपने लक्ष्य पर

 दृढ़ रहना।

 मार्ग के अन्य आकर्षणों से बचना।

चक्रव्यूह के समान 

 राह में अड़चनें,

 ईर्ष्यालु  सब आएँगी।

 चाबी खुशियों के लिए 

 ज्ञान का प्रयोग,

 चतुराई आदि।

सदा चाहिए सकारात्मक सोच।

हार में हतोत्साहित नहीं होना।

 सदा कामयाब के चिंतन में रहना।

 स्वस्थ तन,मन,तन

अध्यवसाय आदि 

 सफलता की चाबी।

सुविचार, सद्चिंतन,

वचन में पक्का,

 करने में लग्न।

 ये हैं सफलता की चाबी।




आज की चुनौती

खुशियों की चाबी

एस. अनंतकृष्णन्
चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
23-7-26

चाबी का कार्य
बंद कमरे का द्वार खोलना है।

खुशियों की चाबी का अर्थ है—
संताप के अंधेरे से
आशा के उजाले में आना।

यह चाबी है—
अपने लक्ष्य पर
दृढ़ बने रहना,
मार्ग के आकर्षणों से
स्वयं को बचाए रखना।

जीवन के चक्रव्यूह में
अनेक बाधाएँ आएँगी,
ईर्ष्यालु लोग भी
रास्ता रोकने का प्रयास करेंगे।

खुशियों की चाबी है—
ज्ञान का सदुपयोग,
विवेक, चतुराई
और सकारात्मक सोच।

हार से
कभी हतोत्साहित न हों,
सदैव सफलता का
सकारात्मक चिंतन करें।

स्वस्थ तन,
स्वस्थ मन,
निरंतर अध्यवसाय,
सुविचार, सद्चिंतन,
वचन का पालन
और कर्म के प्रति लगन—

यही हैं
सफलता और
खुशियों की सच्ची चाबियाँ।

Tuesday, July 21, 2026

दीपक और सबेरा

 


दीपक और सबेरा


 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

22-7-27

+++++++---

  रात का अंधेरा,

  दिन का उजाला 

 मानव जीवन को

 सोने जगाने 

प्रकृति का देन।

 अंधेरे रात में 

 लघु दीप हमारे 

 प्रकाश देता हैं।

 उस दीप के प्रकाश में 

 पतंगा अपने जान देता है।

 उल्लू की आँखें प्रकाशित होती हैं।

 जुगनू चमचमाती है।

 धूप में छाया की तरह

 अंधेरे में दीपक का     प्रकाश।

 थकामांदा मानव

 आराम से सोने का समय।

 अंधेरे में जीने 

निशीचर

 ईश्वर की सृष्टि में अद्भुत।।

  सबेरे सूर्योदय,

  मुर्गी ,पक्षियों  का कलरव,

  प्रकाश मय वातावरण में  जगना जगाना,

व्यस्त मानव समाज।

 ग्वाले का दूध दुहना,

 समाचार पत्र वाले का व्यस्त रहना 

 मंदिरों में घंटी बजना,

 बच्चों का स्कूल जाना।

 आराम के बाद 

  दिन में ज्ञानार्जन,

  धनार्जन 

 अहर्निशं सेवा में

 ऐसे काम करनेवाले 

 पुलिस विभाग,

 वैज्ञानिक प्रगति 

 हमेशा व्यस्त 

 रेल, विमान,बस 

 के आवागमन सेवा,

 डे डूटी, नैट डूटी करनेवाले कर्मचारी 

 दिन में सोना, रात में काम।

 अंधेरा का आनंद 

 जनसंख्या की वृद्धि

 यह भूलोक दिवा रात 

 दीपक का उजाला,

 सबेरे सूर्य का प्रकाश 

 मानव जीवन में सुख दुख का आना।

 ईश्वरीय सूक्ष्म लीला 

 न समझ सकता मानव का ज्ञान।

 जन्म लेना  सबेरा

 मृत्यु जीवन का अंधियारा।

 यही दीपक और सबेरा

 सुख दुख का अद्भुत ज्ञान।


आपकी रचना में दीपक और सबेरा के माध्यम से जीवन, प्रकृति, कर्म और जन्म–मृत्यु का सुंदर दार्शनिक चित्रण है।

आज की चुनौती

दीपक और सबेरा

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

रात का अंधेरा,

दिन का उजाला—

मानव जीवन को

सुलाने और जगाने

प्रकृति का अनुपम उपहार।

अंधेरी रात में

छोटा-सा दीपक

अपना प्रकाश बिखेरता है।

उसी दीपक की लौ पर

पतंगा प्राण न्योछावर कर देता है।

उल्लू की आँखें

अंधकार में भी देख पाती हैं,

जुगनू अपनी चमक से

रात को आलोकित करता है।

जैसे धूप में छाया,

वैसे अंधेरे में दीपक का प्रकाश।

थका-माँदा मानव

आराम से सो जाता है।

रात्रि में विचरण करने वाले निशाचर भी

ईश्वर की अद्भुत सृष्टि हैं।

सबेरे सूर्योदय होता है,

मुर्गे की बाँग,

पक्षियों का मधुर कलरव,

प्रकाशमय वातावरण में

जगना और जगाना।

ग्वाले का दूध दुहना,

समाचार-पत्र वाले की व्यस्तता,

मंदिरों में घंटियों का नाद,

बच्चों का विद्यालय जाना—

सब जीवन की गति का संकेत हैं।

आराम के बाद

दिन में ज्ञानार्जन,

धनार्जन और सेवा का क्रम चलता है।

पुलिस विभाग,

वैज्ञानिक,

रेल, विमान और बस सेवाएँ—

सब निरंतर कार्यरत रहते हैं।

कुछ दिन में काम करते हैं,

तो कुछ रात की ड्यूटी निभाते हैं।

अंधकार का भी अपना आनंद है,

प्रकाश का भी अपना महत्व।

यह दिवा-रात्रि का क्रम,

दीपक का उजाला

और सूर्य का प्रकाश—

मानव जीवन में

सुख-दुःख का संदेश देते हैं।

ईश्वर की सूक्ष्म लीला को

मानव का ज्ञान

पूर्णतः नहीं समझ सकता।

जन्म है सबेरा,

मृत्यु है जीवन का अंधियारा।

यही दीपक और सबेरा

हमें सुख-दुःख का

अद्भुत ज्ञान कराते हैं। :::**

यदि चाहें, मैं इसे �⁠और अधिक **काव्यात्मक, छंदबद्ध और प्रभावशाली** रूप भी दे सकता हूँ।

Monday, July 20, 2026

कलम का धर्म

 कलम का धर्म 

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

21-7-26

++++++++++-

कलम का धर्म लिखना ,

जगने के लिए लिखना,

जगाने के लिए लिखना

उत्तेजित  करने के लिए लिखना।

यथार्थता लिखना,

आदर्श बातें लिखना,

समाज हित के लिए ,

 समाज कल्याण के लिए 

 राष्ट्र हित के लिए 

 राष्ट्र प्रेम के लिए 

 राष्ट्रोन्नति के लिए 

 निस्वार्थ सेवा के लिए 

 परोपकार की भावना के लिए,

दान धर्म के विकास के लिए 

जगत मिथ्या,

 ब्रह्म सत्यं 

 समझाने के लिए,

 शिक्षा के महत्व समझाने के लिए,

 लिखना 

कलम का धर्म है।

जीना,जीने देना कलम का धर्म है।

विश्वशांति के लिए 

अहिंसा परमो धर्म 

 वसुधैव कुटुंबकम् 

 सर्वे जना सुखिनो भवन्तु आदि

सिखाने

 अच्छी चालचलन सिखाने,

 लिखना कलम का धर्म है।


आपकी रचना का संदेश अत्यंत प्रेरणादायक है। भाषा और प्रवाह को थोड़ा परिष्कृत करके इसे अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

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आज की चुनौती

कलम का धर्म

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

21-7-2026

कलम का धर्म

कलम का धर्म है लिखना,

जगने के लिए लिखना,

जगाने के लिए लिखना,

जन-जन को जागृत करने के लिए लिखना।

यथार्थ लिखना,

आदर्शों की बात लिखना,

समाजहित के लिए,

समाज-कल्याण के लिए,

राष्ट्रहित के लिए,

राष्ट्र-प्रेम के लिए,

राष्ट्रोन्नति के लिए,

निस्वार्थ सेवा के लिए,

परोपकार की भावना के लिए,

दान-धर्म के विकास के लिए लिखना।

"जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्य" का बोध कराना,

शिक्षा का महत्व समझाना,

सदाचार और उत्तम आचरण सिखाना—

यही कलम का धर्म है।

जीओ और जीने दो का संदेश देना,

विश्व-शांति का मार्ग दिखाना,

"अहिंसा परमो धर्मः",

"वसुधैव कुटुम्बकम्",

"सर्वे जना: सुखिनो भवन्तु" जैसे

उदात्त विचारों का प्रसार करना—

यही कलम का सच्चा धर्म है। :::


Sunday, July 19, 2026

अंधविश्वास।

 आज की चुनौती : अंधविश्वास

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
20-7-2027

अंधविश्वास

नमस्ते। वणक्कम्।

वैज्ञानिक प्रमाण और वास्तविकता के बिना जिन बातों पर विश्वास किया जाता है, उन्हें अंधविश्वास कहा जाता है।

जैसे—
इमली के पेड़ में भूत होना,
राहुकाल देखकर ही कार्य करना,
घर से निकलते समय किसी का "कहाँ जा रहे हो?" पूछना अशुभ मानना,
छींक आने पर रुक जाना,
बिल्ली का रास्ता काटना,
अकेले ब्राह्मण का सामने आना,
विधवा का सामने आना आदि अनेक धारणाएँ अंधविश्वास की श्रेणी में आती हैं।

तमिल का एक प्रसिद्ध भक्तिगीत कहता है—

दिन क्या करेगा?
कर्मफल क्या करेगा?
ग्रह क्या करेंगे?
निर्दयी यम क्या करेगा,
जब भगवान कुमारेश की कृपा प्राप्त हो जाए।

अर्थात भगवान पर विश्वास रखो। शकुन-अपशकुन और शुभ-अशुभ की अनावश्यक चिंता मत करो।

संत कबीर ने भी कहा है—

"जाको राखे साइयाँ, मारि सके न कोय।
बाल न बाँका कर सके, जो जग बैरी होय।।"

भक्ति का संदेश यही है कि ईश्वर पर विश्वास रखो, अपने कर्म करते रहो और अंधविश्वासों के जाल में मत फँसो।

हाँ, नमस्कार करना, बड़ों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना तथा मंदिर में साष्टांग प्रणाम करना अंधविश्वास नहीं हैं। ये हमारी संस्कृति, विनम्रता और स्वास्थ्यप्रद अभ्यास के प्रतीक हैं।

दुर्भाग्य से आजकल अभिवादन भी केवल हाथ हिलाने या सैन्य शैली के सैल्यूट तक सीमित होता जा रहा है। अनेक शिक्षित युवक-युवतियाँ भी साष्टांग प्रणाम की परंपरा से दूर होते जा रहे हैं।

आइए, विवेक अपनाएँ,

 अंधविश्वास छोड़ें,

 विज्ञान और सदाचार को स्वीकार करें ।

तथा ईश्वर में सच्ची श्रद्धा रखते हुए 

कर्मपथ पर आगे बढ़ें।

Saturday, July 18, 2026

अंध भक्ति में भला नहीं।

 अंध भक्ति में भला नहीं।


अंध भक्ति प्रह्लाद में अपने पिता के प्रति नहीं।

अंध। भक्ति के कारण एकलव्य अंगूठा को बैठा।

कर्ण  अपने पुण्य को बैठा।

 हरिश्चंद्र अपने जीवन को बैठा।

 सीता  को संन्यासी वेशधारी रावण को भक्त समझकर लक्ष्मण रेखा पारकर रावण के अशोक वन  में रहना पड़ा।

 पिता के अंधभक्ति के कारण रावण के बेटा

प्राण को बैठा।

 अंध भक्ति तोड़कर 

 कार्तिकेय तमिलनाडु पलनी शहर में आकर 

‌तमिल भगवान बन गये।

 पिताजी को उपदेश देकर 

 स्वामि नाथ बन गये।

 अंध भक्ति प्रेम के कारण 

 भ्रष्टाचारी नेता  जीतता है।

 अभिनेता पर अंधविश्वास तमिलनाडु के शासक।

 यही अंध भक्ति अंधे प्रेम का परिणाम।