कसौटी
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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक, सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी सेवी के द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।
15-4-26
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कसौटी के बिना
असली नकली का पहचानना असंभव।
मानव के गुण दोष,
बुद्धि लब्धि,
व्यक्तित्व वीरता
शासन और प्रशासन की उत्तमता को
परखकर देखना है।
कसौटी पर कसना
एक मुहावरा,
केवल सोना, चाँदी का ही नहीं,
मानव के ज्ञान, गुण,
स्वार्थ, निस्वार्थ,
वीरता, कायरता,
वीरांगना , वारांगना।
काम, क्रोध, मद,लोभ
सब मानव के गुण अवगुण की परख करना,
खासकर भारतीय मतदाता को
सांसद और विधायक के गुण अवगुणों को कसौटी पर कसकर देखकर
सच्चे निस्वार्थ आदर्श
देश प्रेमी को पहचानकर
वोट देना चाहिए।
कसौटी पर कसकर देखने पारखी नज़रों की आवश्यकता है।
विश्व के लोक प्रसिद्ध
भारत में होने का महत्व
आदि काल से है।
अतः कसौटी के उदाहरण देकर कालीदास के काव्यों में उदाहरण मिलते हैं।
रघुवंश काव्य में
अतिथि महाराजा के साथ धन की देवी लक्ष्मी
कसौटी पर कसे सोने की चमक की रेखा की तरह अमिट रही।
मेघदूत में
प्रेमी प्रेमिका को
मार्ग दिखाने,
बिजली ऐसे चमकना,
जैसे कसौटी पर कसे सोने की रेखा की चमक जैसे हो।
ऐसे कसौटी भारती कवियों के काव्य में
मिलते हैं।
तमिल के काव्यों में
भी तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल में भी
कसौटी का उल्लेख मिलते हैं।
कसौटी पर कसने वाले,
पारखी न तो
मानव जीवन में
मानव और मानवता का
पता न लगेगा।