आज की चुनौती
सद्भावना दिवस
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
21-8-26
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भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है।
यहाँ प्रत्यक्ष रूप में
विविधता दिखाई देती है—
प्राकृतिक विविधता,
मजहबी विविधता,
भाषाई विविधता,
सांस्कृतिक विविधता।
इन विविधताओं के बावजूद
विचारों की एकता,
राष्ट्रीय भावना,
भाईचारा और राष्ट्रप्रेम
भारत को एक सूत्र में बाँधते हैं।
आसेतु हिमाचल तक
एकता और सद्भावना को मजबूत करने के लिए
हर वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री
स्वर्गीय राजीव गांधीजी के जन्मदिन
“सद्भावना दिवस” के रूप में
मनाया जाता है।
भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएँ
और सनातन चिंतन
आसेतु हिमाचल
एकता और सह-अस्तित्व की भावना को
मजबूत करने में अपना योगदान देते आए हैं।
भारत की संस्कृति की विशेषता है—
अनेक धर्म, अनेक भाषाएँ,
अनेक परंपराएँ होते हुए भी
एक-दूसरे के प्रति सम्मान और
सह-अस्तित्व की भावना।
तमिलनाडु में भी
विभिन्न धार्मिक परंपराओं में
स्थानीय सांस्कृतिक प्रभाव दिखाई देते हैं।
कई गिरिजाघरों में
रथयात्रा जैसी स्थानीय परंपराएँ
और चर्चों में ध्वजस्तंभ
भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की
सुंदर झलक प्रस्तुत करते हैं।
सद्भावना दिवस के अवसर पर
सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में
राष्ट्रीय एकता और सद्भावना की
शपथ दिलाई जाती है।
आज के समय में
क्षेत्रीय राजनीति और
विभिन्न राजनीतिक मतभेदों के कारण
नीट, नवोदय विद्यालय और
राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे विषयों पर
विभिन्न राज्यों में अलग-अलग विचार
सामने आते हैं।
मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं,
लेकिन मतभेदों के कारण
मनभेद नहीं होना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता,
भाईचारा,
राष्ट्रप्रेम और सद्भावना को बढ़ाना
आज समय की माँग है।
आइए, सद्भावना दिवस पर
हम केवल शपथ ही न लें,
बल्कि अपने व्यवहार में भी
सद्भावना को अपनाएँ।
विविधता हमारी शक्ति है,
एकता हमारी पहचान है,
और सद्भावना हमारे राष्ट्र की
सबसे बड़ी आवश्यकता है।