चिंता को चुनौती
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक
14-7-26
मानव का जन्म
सुख दुख के मिलन में।
चिंता के चक्कर में मानव।
भूख मिटाने की चिंता,
पहनावे ओढावे की चिंता
आवास की चिंता।
आर्थिक चिंता,
नौकरी की चिंता,
वेतन वृद्धि और पदोन्नति की चिंता,
योग्य पत्नी पति मिलने की चिंता
संतानोत्पत्ति की चिंता।
सुपुत्री सुपुत्र की चिंता।
संतानों की शिक्षा,
नौकरी, बहु-दामाद की चिंता।
इन चिंताओं की
चुनौतियों का सामना करने की चिंता।
जीवन पर्यंत चुनौतियां।
लोभ और ईर्ष्या की चिंता।
यों ही जीवन भर चिंता ही चिंता।
बचपन में चिंता ,
जवानी में चिंता
बूढापे में चुनौतियाँ।
आज की चुनौतीचिंता को चुनौती
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई (तमिलनाडु)14-7-2026
मानव का जीवनसुख-दुःख का संगम है।चिंता के चक्र मेंहर मानव निरंतर व्यस्त है।
भूख मिटाने की चिंता,तन ढकने के वस्त्रों की चिंता,अपने घर-आवास की चिंता,आर्थिक अभाव की चिंता।
नौकरी पाने की चिंता,वेतन-वृद्धि और पदोन्नति की चिंता,योग्य जीवनसाथी मिलने की चिंता,संतान-सुख की चिंता।
सुपुत्र-सुपुत्री के भविष्य की चिंता,उनकी शिक्षा और रोजगार की चिंता,बहू-दामाद के चयन की चिंता,परिवार के सुख-समृद्धि की चिंता।
इन सब चुनौतियों कासाहस से सामना करना हीजीवन की सबसे बड़ी चुनौती है।
लोभ और ईर्ष्याचिंताओं को और बढ़ाते हैं।यों ही बीत जाता हैमानव का पूरा जीवन।
बचपन में छोटी-छोटी चिंताएँ,जवानी में बड़ी जिम्मेदारियाँ,और बुढ़ापे में नई-नई चुनौतियाँ।
इसलिए चिंता नहीं,चिंतन और पुरुषार्थ अपनाइए।
साहस, धैर्य और विश्वास के साथ हर चुनौती पर
विजय पाइए।