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Thursday, August 20, 2026

सद्भावना दिवस


आज की चुनौती

सद्भावना दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

21-8-26

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भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है।

यहाँ प्रत्यक्ष रूप में

विविधता दिखाई देती है—

प्राकृतिक विविधता,

मजहबी विविधता,

भाषाई विविधता,

सांस्कृतिक विविधता।

इन विविधताओं के बावजूद

विचारों की एकता,

राष्ट्रीय भावना,

भाईचारा और राष्ट्रप्रेम

भारत को एक सूत्र में बाँधते हैं।

आसेतु हिमाचल तक

एकता और सद्भावना को मजबूत करने के लिए

हर वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री

स्वर्गीय राजीव गांधीजी के जन्मदिन

“सद्भावना दिवस” के रूप में

मनाया जाता है।

भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराएँ

और सनातन चिंतन

आसेतु हिमाचल

एकता और सह-अस्तित्व की भावना को

मजबूत करने में अपना योगदान देते आए हैं।

भारत की संस्कृति की विशेषता है—

अनेक धर्म, अनेक भाषाएँ,

अनेक परंपराएँ होते हुए भी

एक-दूसरे के प्रति सम्मान और

सह-अस्तित्व की भावना।

तमिलनाडु में भी

विभिन्न धार्मिक परंपराओं में

स्थानीय सांस्कृतिक प्रभाव दिखाई देते हैं।

कई गिरिजाघरों में

रथयात्रा जैसी स्थानीय परंपराएँ

और चर्चों में ध्वजस्तंभ

भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की

सुंदर झलक प्रस्तुत करते हैं।

सद्भावना दिवस के अवसर पर

सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में

राष्ट्रीय एकता और सद्भावना की

शपथ दिलाई जाती है।

आज के समय में

क्षेत्रीय राजनीति और

विभिन्न राजनीतिक मतभेदों के कारण

नीट, नवोदय विद्यालय और

राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे विषयों पर

विभिन्न राज्यों में अलग-अलग विचार

सामने आते हैं।

मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं,

लेकिन मतभेदों के कारण

मनभेद नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रीय एकता,

भाईचारा,

राष्ट्रप्रेम और सद्भावना को बढ़ाना

आज समय की माँग है।

आइए, सद्भावना दिवस पर

हम केवल शपथ ही न लें,

बल्कि अपने व्यवहार में भी

सद्भावना को अपनाएँ।

विविधता हमारी शक्ति है,

एकता हमारी पहचान है,

और सद्भावना हमारे राष्ट्र की

सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Wednesday, August 19, 2026

नेकी की छाँव

 नेकी की छाँव।

 एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

20-8-26

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नेक रहना श्रेष्ठ है।

 नेकी की छाँव में 

 रहना हिफाजत है।

 संगति का फल

 भलाई में है।

 

 हमें ज़रूरत के समय मदद करनेवाले हमारे लिए सज्जन हैं।

सज्जनता में धर्म है, 

परोपकार है,सत्य है।


भलाई करने पर

 हमारे दायरे में नाम मिलेगा।

 दोस्ती मिलेगी।

हम समाज के 

विश्वास पात्र बनेंगे।

बुराई करने पर

 हमारा मन  बेचैन होगा।

 भलाई करने पर चैन की नींद सोएँगे।

मानसिक हलचल न होगा।

 शांति मिलेगी।

 ईश्वर का अनुग्रह मिलेगा।

 नेकी की छाया 

 संतोष देगी।

बद विचार 

सद विचार में बदलेगा।

 सदाबहार है 

नेकी की छाँव में।





Tuesday, August 18, 2026

सुभाष चंद्र बोस

 नेता जी सुभाष चंद्र बोस 

एस. अनंतकृष्णन चेन्नई 

19-8-26

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भारत के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम के नेता,

 स्वाभिमानी ऐएएस उत्तीर्ण होकर भी

 अंग्रेज़ी सरकार के अधीन नौकरी करने से मना कर दिया।

 कांग्रेस के नेता चुने जाने पर भी,

 कांग्रेस से मत भेद होकर,

 आज़ाद हिन्द सेना  की स्थापना की।

 उन्होंने  घोषणा की कि

 मुझे खून दो,

मैं देश को आज़ाद दूँगा।

उनकी सेना में  

आ सेतु हिमाचल से

 सभी देश भक्त वीर 

भाग लेने आये।

 उस महान वीर सेनानी 

 जर्मन गये ।

 हिटलर से मिले।

 जापान आये।

सैना को आज्ञा दी दिल्ली चलो।

 ऐसे वीर  नेता के 

 पक्ष में  मोहन दास करमचंद गांधीजी नहीं थे।

  कांग्रेस के नेता चुने 

जाने पर भी बोस 

गांधीजी के कारण  नेता न बने।

उन्होंने फार्वेडब्लाक  की स्थापना की।

 देश के लिए  वीर धीर 

साहसी   नेता  का स्वर्गवास 

 विमान दुर्घटना में हो गया।

 पर जनता को इस पर विश्वास नहीं है।।

अनेक लोगों का विश्वास है कि

वै आज़ादी के बाद भी जिंदा रहे।

 ऐसे महान नेता को‍ वीर सलाम।

वीर वणक्कम्।








 

 


 

 

 

 

 

 


 


   

 


Sunday, August 16, 2026

 

आज की चुनौती

अंधविश्वास का जाल

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

17-8-26

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अंधविश्वास का जाल
मनुष्य को भय में बाँधता है।

माता-पिता,
दादा-दादी भी कभी-कभी
बच्चों को भय दिखाकर
अनजाने में अंधविश्वास फैलाते हैं—

“आधी रात बाहर मत जाना,
इमली के पेड़ पर भूत रहता है!”

ऐसी बातें
बालमन में भय पैदा करती हैं।

बिल्ली का रास्ता काटना,
विधवा का सामने आना,
अकेले किसी ब्राह्मण का सामने आना—
इन सबको अपशकुन मानना
किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है।

सर्पदोष जैसे भय भी
कई बार लोगों की अज्ञानता और चिंता का
लाभ उठाने का माध्यम बन जाते हैं।

अंधविश्वास
एक मनोवैज्ञानिक भय है।
जिसके पीछे
प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होता।

अंधविश्वास
अज्ञानता बढ़ाता है,
मनुष्य को भयभीत करता है,
उसकी आत्मशक्ति को कमजोर करता है।

कुछ आश्रमों में
आचार्य दीक्षा देकर
ईश्वर-दर्शन का वादा करते हैं।
लोग दीक्षा-शुल्क भी देते हैं।
लेकिन प्रश्न यह है—
क्या उन सभी को
ईश्वर के दर्शन हुए?

राहुकाल, यमगंड आदि का
अनावश्यक भय दिखाकर
मनुष्य को अपने कर्म से विमुख करना
कहाँ तक उचित है?

तमिल में एक सुंदर भाव है—

“भगवान साथ हैं,
उनका अनुग्रह है,
तो दिन, ग्रह और नक्षत्र
कुछ नहीं कर सकते।”

अंधविश्वास
केवल एक मायाजाल है।
यह मनुष्य को भय दिखाकर
बलहीन बनाता है।

विवेकहीन भय
मनुष्य की शक्ति को छीन लेता है।
आलस्य और अज्ञान
उसकी उन्नति में बाधक बनते हैं।

सच्चा ईश्वर-भक्त
ईश्वर पर विश्वास रखेगा,
लेकिन अंधविश्वास पर नहीं।

ईश्वर में श्रद्धा रखें,
लेकिन विवेक को न छोड़ें।
प्रार्थना करें,
परिश्रम करें,
सत्य को प्रमाण से परखें—
यही अंधविश्वास से मुक्ति का मार्ग है।

Saturday, August 15, 2026

திருமந்திரம். श्रीमंत्र

 உள்ளம் பெருங்கோயில் ஊனுடம் பாலையம்

வள்ளற் பிரானார்க்கு வாய்கோ புரவாசல்
தெள்ளித் தெளிந்தார்க்குச் சீவன் சிவலிங்கங்
கள்ளப் புலனைந்துங் காளா விளக்கே."
(பாடல் எண்: 1823)

उळ्ळम्  पेरुम कोयिल ऊनुडंबालैयम्
वळ्ळल्  पिरानार्क्कु वाय गोपुरवासल्
तॆळ्ळित् तॆळिंतारुक्कु जीवन  शिवलिंगंकळ्ळप्पुलनैंतुंकाळा विळक्के।
(तिरुमंत्र 1823)

उळ्ळम --मन
पेरुम कोयिल  =भगवान बसा बडा मंदिर 
ऊनुडंबु आलयम् =इस माँस का शरीर उस मंदिर की इमारत है।
वाय गोपुरम वासल =मुख गोपुरम द्वार है
जीवन शिवलिंग ==स्पष्ट ज्ञानी को हमारे प्राण ही शिवलिंग है।
 कळ्ळप्पुलनैंदुम  काळा मणिविळक्कु = हानियाँ पहुँचानेवाली पंचेंद्रियाँ मणि दीप होते हैं।

  मानव मन ही ईश्वर बसा एक बड़ा मंदिर है।इस 
माँस का शरीर उस मंदिर की इमारत है। मुख गोपूर का द्वार  है।  स्पष्ट ज्ञानियों के लिए हानियाँ पहुँचानेवाली 
पंचेंद्रियाँ ही मणि दीप होते हैं।








जीवन की दिशा

 जीवन की दिशा 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

16-8-26

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जीवन की दिशा


एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

16-8-26


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जीवन की दिशा

हर एक की रुचि,

क्षमता, बुद्धि-लब्धि,

जीवन-रेखा—

भगवान के अनुग्रह की

दिशा दिखाती है।


मानव अपने प्रयत्न करता है,

अपने परिश्रम करता है,

सफलता के लिए

दिशा स्वयं निर्धारित करता है।

लेकिन हर किसी को

अपनी चाही हुई दिशा में

कामयाबी नहीं मिलती।


मेरे जीवन में

तमिलनाडु में हिंदी-विरोध के बीच

हिंदी का ज्ञान,

हिंदी का प्रचार,

हिंदी से जीविकोपार्जन—

सब ईश्वर की देन है।


मैं अपने क्षेत्र में ही

नौकरी ढूँढ़ता रहा।

अपने ही शहर में रहने के लिए

लाखों प्रयास किए।

पर मेरे जीवन की दिशा

किसी और ओर थी।


मेरा भाई

अपने शहर से बाहर

नौकरी ढूँढ़ता रहा।

आज वह

अपने ही शहर में है।


मैं बाहर आया,

जिस दिशा को मैंने नहीं चुना,

वही मेरे जीवन की दिशा बनी।


तब समझ में आया—

मनुष्य दिशा चुनता है,

पर जीवन की अंतिम दिशा

ईश्वर निर्धारित करता है।


हमारी इच्छा

एक रास्ता दिखाती है;

ईश्वर का अनुग्रह  ही

 जीवन की दिशा का निर्धारण करता है।

 सबहीं नचावत राम गोसाईं।

Friday, August 14, 2026

तिरुक्कुरल

 

तिरुक्कुरल।


कालत्तिनाल् चेय्त उदवि चिऱितेनिनुम् ज्ञालत्तिल माणप्पेरितु --- संत तिरुवल्लुवर का तिरुक्कुरल।

  समय पर की गयी मदद ब्रह्मांड से बड़ा है।

 कालत्तिल --समय पर

 चेय्त =की गयी

 उदवि =मदद 

चिरितेनिनुम् ==छोटा होने पर भी

ज्ञालत्तिल - ब्रह्मांड से

 माणप्पेरितु == बहुत बड़ा है।

  भावार्थ --

     समय पर अर्थात वक्त पर  की गई मदद 

अति छोटी होने पर भी ब्रह्मांड से बड़ी है।

 ब्रह्माण्ड तो सद्यःफल नहीं देता। उसमें बीज बोने पर अंकुर फूटकर पौधे बनकर फल देने देर लगेगा।

 

दोस्ती ==

 उडुक्कै इऴंदवन कै पोल अंगे इडुक्कण कळैवताम् नट्पु।

 उडुक्कै  -- कमर की धोती

 इऴंदवन = फिसलने पर

कै =हाथ के जैसे 

 इडुक्कन =दुख

 कळैवताम् =दूर करना  ही

 नट्पु ==मित्रता है।

  कमर की धोती गिरने पर तुरंत हाथ उसे पकड़कर  मान की रक्षा करेंगे, वैसे ही दुख के आते ही दुख दूर  करना ही  सच्ची मित्रता है।


एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित अनूदित भावाभिव्यक्ति रचना।