होली
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
2-3-26.
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होली
क्यों?
रंगीला होली क्यों?
आनंदोल्लास होली क्यों?
अपने को ही ईश्वर ऐलान किये,
हिरण्यकश्यप
अपने ही पुत्र के वध के
प्रयत्न में हारते हारते
अपनी निर्दयी बहन की याद आती।
होलिका ने वर पाया है
वह आग में न जलेगी,
अपने विष्णु भक्त पुत्र
हिरण्याय नमः जप करने इन्कार किया तो
अपने ही पुत्र को मारने
होलिका के गोद में
प्रह्लाद भक्त को बिठाकर आग जलाया तो
भक्त प्रह्लाद तो
मुस्कुराते हुए जिंदा निकला।
होलिका जलकर भस्म हो गई।
आम जनता की खुशी का ठिकाना न रहा।
इस दिन वह की याद में,
आनंदोल्लास होली पर्व।
आश्चर्य की बात है आदि होली दक्षिण के विजयनगर में यह पहले पहल होली मनाया गया।
अन्याय के नाश में
यह त्योहार भ्रष्टाचारी रिश्वतखोरों यह के लिए एक ख़तरनाक घंटी।
दूसरी भी कहानी राधा कृष्ण प्रेम मे।
उनके लिए यह आनंद उल्हास भी।
दुष्टो़ का वध।
सत्यं वद ।
याद रख ।
ईश्वरीय दंड पुरस्कार निश्चित।
आदर्श भक्त जीवन को
ईश्वरीय शक्ति और बाकी निश्चित ।
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