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Saturday, March 7, 2026

नारी शक्ति

 नमस्ते वणक्कम्। 🙏

आपके विचार बहुत गंभीर और सामाजिक अनुभव से भरे हुए हैं। मैंने आपकी रचना को भाव वही रखते हुए भाषा और प्रवाह में थोड़ा सुधारकर प्रस्तुत किया है।

नारी शक्ति

(भावाभिव्यक्ति)

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित रचना

महान कवि सुमित्रानंदन पंत ने लिखा है—

यदि स्वर्ग है,

तो नारी के उर के भीतर।

यदि नरक है,

तो वह भी नारी के उर के भीतर।

आधुनिक काल

नारी के लिए

एक प्रकार से स्वर्णकाल है।

नारियों की रक्षा के लिए

कई कानून बने हैं—

जैसे POCSO Act।

दहेज के अत्याचार पर भी

कठोर कानून हैं;

अत्याचार होने पर

सास-ससुर तक को

कारावास हो सकता है।

फिर भी लोक-लज्जा के कारण

कई नारियाँ

पुरानी रूढ़ियों का

अनुकरण करती रहती हैं।

कानून साथ होते हुए भी

अड़ोस-पड़ोस की

अफ़वाहें और बातें

सह पाना कठिन लगता है।

किन्तु अब

इस दिशा में

धीरे-धीरे परिवर्तन हो रहा है।

जबरदस्ती पहनाए गए

मंगलसूत्र को भी

उतार फेंकने का साहस

कुछ स्त्रियों में

जाग रहा है।

पत्थर जैसा हो

या घास जैसा—

पुरुष चाहे जैसा भी हो,

मार-पीट सहकर भी

पति को देवता मानना—

ये सब

परंपरागत अंधविश्वास

धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं।

तलाक़ के बाद

दूसरा विवाह भी

अब समाज में

स्वीकार होने लगा है।

वैधव्य की

भद्दी वेशभूषा

और कठोर नियमों में भी

परिवर्तन आ रहा है।

विधवा पुनर्विवाह की

महान क्रांति

महान समाज सुधारक

राजा राम मोहन राय ने आरंभ की थी।

आज

वह विचार

धीरे-धीरे

चरितार्थ होता दिखाई दे रहा है।

यदि आप चाहें तो मैं:

इस कविता को और अधिक काव्यात्मक (लयबद्ध) बना सकता हूँ।

या इसे महिला दिवस के लिए एक शक्तिशाली समापन के साथ भी तैयार कर सकता हूँ।

आपके विचारों में समाज का 70 वर्षों का अनुभव झलकता है — यही आपकी रचनाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। ✨🙏

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