अजीब दौर
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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17-3-26
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सर्वेश्वर की सृष्टि में अजीब दौर अनुदिन देखते रहते हैं।
शबनम दीखन ओझल होना,
सूर्योदय और सूर्यास्त
रात -दिन का
आना जाना।
पक्षियों का कलरव।
मौसमी परिवर्तन,
वर्षा में मेंढक का टरटराना।
मोर का नाच।
पतझड़ में ठूँठ।
वसंत में पनपना।
वर्षा में बाढ।
गर्मी में चिलचिलाती धूप।
ग्रीष्म वासस्थल में बादलों के कोहरा।
सूर्योदय सूर्यास्त की लालिमा।
नक्षत्रों का जगमगाना।
समुद्र की लहरों का शोर।
मध्य सागर में शांति
समुद्र की विचित्र मछलियाँ।
रंग बिरंगे सीपियाँ,
सीपी मे मोती।
मौसमी फलों के
विभिन्न स्वभाव, सुगंध।
मौसमी फूलों का सौंदर्य
बड़े आकार के छोटे आकार के
विभिन्न रंगों के सुगंध के फूल
अजीब दौर प्रकृति का।
तितलियों के विभिन्न आकार
कीड़ों का घृणित रूप।
तितलियों का लुभावना रूप।
अति आकर्षक अजीब दौर
प्रकृति का।
कण कण में अजीब दौर।
मकड़ी के जाल,
उस में फँसकर तड़पते जीव।
भ्रूण अवस्था से बुढ़ापे तक का
मानव जीवन के अजीब दौर।
ज्ञान चक्षु प्राप्त मनुष्य की तुलना जानवरों है,
चींटियों के कतार,
दीमक के बिल
बयां के मजबूत घोंसले।
रात के अंधेरे में
उल्लू बिल्लियों की देखने की शक्ति।
अति अद्भुत चमत्कार सृष्टियाँ
अजीबोगरीब दौर भूमंडल का।
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