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Wednesday, March 11, 2026

अनमोल रत्न

 अनमोल रत्न।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी प्रचारक द्वारा स्वरचित रचना।

11-3-26

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ज्ञान चक्षु प्राप्त 

मानव के लिए

 भ्रष्टाचार और घूस से

 ठगाकर  चल अचल 

 संपत्ति जोड़ना,

अमूल्य

हीरे,चाँदी,सोना 

ढेर  जमाना,

 अनमैल रत्न नहीं जान।

 बड़े बड़े राजमहल,

 राज सुख  

 अश्वमेध यज्ञ की वीरता,

 कमजोरों से धन कमाना,

 एक वीर राजा तो

उसी वंशज के कमजोरी 

 अब उनके अमूल्य 

 मजबूत किले

 कोई काम नहीं।

 कर्म ही अनमोल रत्न।

 अंग्रेज़ चले गये,

 पर उनकी भाषा ज्ञान से

 तकनिकी विकास,

  चिकित्सा,

 संगणिक ज्ञान 

 जीविकोपार्जन के साधन।

 आवागमन के साधन,

 रेल पट्रियाँ,

 प्राण रक्षक नैदानिक यंत्र

 गर्मी में ठंडा,

 सर्दी में गर्म।

 रक्त दान, नेत्र दान,। किडनी दान, केंसर की दवाएँ,

 वेदों, पुराणों, उपनिषदों

 के  अमूल्य शास्त्र,

जितेंद्रिय की प्रधानता

 योग, प्राणायाम, और

 स्वास्थ्य प्रद मुद्राएँ।

कबीर की अमृतवाणी,

‌तुलसी ,सूर के भक्ति मार्ग।

 मानव एकता के लिए 

 जाति न पूछो साधु की,

पूछ लीजिए ज्ञान।

काम क्रोध मद लोभ

गुण के कारण 

 पंडित भी मूर्ख समान। 

 ये नहीं भक्त।

जिस कृष्ण की कृपा

लंगड़ा चल सकता है,

 गूँगा बोल सकता है,

 बहरा सुन  सकता है,

 उसकी वंदना करता हूँ।

ये कवि वचन अनमोल रत्न।

विश्व कल्याण, एकता, शांति के अमोल वचन।

 स्वतंत्रता जन्म सिद्ध अधिकार।

अहिंसा परमो धर्मः 

 जय जगत,

 वसुधैव कुटुंबकम्।

 सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।

 जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्य ये सब अमूल्य 

अनमोल रत्न।

 अमर रत्न विश्वकल्याण के लिए।

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