विश्व वन दिवस
एस.अनंतकृष्णन।
वन प्राकृतिक संपदा के मूल।
इतना ही नहीं ज्ञान की भूमि।
भारत के असुर ही नहीं,
ऋषि मुनि और सिद्धार्थ की तपोभूमि।
ईश्वर के दर्शन भूमि।
वहाँ खूँख्वार जानवर ही नहीं,
भयंकर जहरीले जंतु भी नहीं,
सर्वरोग निवारती जटिल बूटियाँ भी हैं।
वन की रक्षा न करें तो
प्राकृतिक संतुलन
बिगड जाता।
समय पर वर्षा न होती।
भूमी गर्म हो जाती।
नगरी करन, नगर विस्तार, तकनिकी शिक्षा संस्थाएँ, कारखाना, बढ़ती जनसंख्या आदि
जंगलों के नष्ट करने के कारण।
इसके कारण वन के जानवर भी कम होते जा रहे हैं।
अतः जंगलों की रक्षा करने विश्व वन्य सुरक्षा दिवस मनाने की योजना।
वन महोत्सव भारत में
मनाते थे।
विश्व कल्याण के लिए,
और ब्रह्मांड की समृद्धि के लिए,
वन संरक्षण में सहयोग देना हमारा
संकल्प होना चाहिए।
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