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Saturday, March 7, 2026

नारी शक्ति

 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

(भावाभिव्यक्ति)

अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित रचना

8-3-2026

मैं छिहत्तर वर्ष का बूढ़ा हूँ।

मेरी अपनी दस वर्ष की आयु से लेकर

आज तक नारियों की

असंख्य शोक-कथाएँ सुनी हैं।

नारी जीवन के चरित्र में

भारतीय स्त्रियाँ

कभी बेगार बनी रहीं।

बालिका विवाह,

पति-पत्नी का अनमेल विवाह,

शादी क्या है —

यह जानने से पहले ही शादी।

बारह वर्ष में वैधव्य,

सती-प्रथा की अग्नि,

पतिव्रता के कठोर सिद्धांत।

भले ही राम की पत्नी हो —

अफवाहों के कारण त्याग;

सीता का वनवास।

वसुदेव-देवकी की कथा,

द्रौपदी को जुए में हारना,

भरी सभा में अपमान।

दुष्यंत-शकुंतला की पीड़ा,

नल का दमयंती को

आधी रात जंगल में छोड़ जाना।

हरिश्चंद्र द्वारा

पत्नी को बेचकर दासी बनाना,

और सीता का

भूमि में समा जाना।

भारतीय नारियों की

रामकहानी अनंत है।

जौहर की अग्नि में

जीवित जलती स्त्रियाँ,

अबला रूप में

युगों की वेदना।

फिर भी —

नारी का सबला रूप भी है।

त्रिदेवियों की आराधना,

नारी के अनेक रूप —

भद्रमहिला, वीरांगना।

आज की आधुनिक,

शिक्षित महिलाएँ भी

कष्टों से पूर्ण मुक्त नहीं।

पति-पत्नी दोनों

नौकरी करते हैं,

पर घर की जिम्मेदारी

अधिकतर नारी ही संभालती है।

अब भी

नारी पूर्ण स्वतंत्र नहीं।

ईश्वर की सृष्टि में

गर्भधारण और वंशवृद्धि का भार

नारी पर ही है।

पुरुष का सुख एक दिन,

नारी का दुःख

दस महीनों का।

फिर शिशु का पालन,

ममता का अमृत।

प्रकृति की इस सृष्टि में

नर के सामने

नारी कभी-कभी

अबला दिखाई देती है।

पर इतिहास गवाह है —

जब समय पुकारता है,

वही नारी

वीरांगना बनकर उठती है,

जैसे रानी लक्ष्मीबाई।

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