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Friday, May 1, 2026

मज़दूर का महत्व


मज़दूर दिवस

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

2-5-26

मैं मालिक हूँ,

मैं करोड़पति हूँ,

मैं सिविल इंजीनियर,

मैं नामी डॉक्टर हूँ।

शहर का बड़ा अस्पताल मेरा,

हजारों एकड़ खेतों का मैं स्वामी,

बिजली विभाग का मुख्य अभियंता,

बड़े कॉलेज का भी अधिकारी।

मैं विधायक, सांसद,

मुख्यमंत्री भी कहलाता हूँ—

पर ज़रा ठहर कर सोचिए,

क्या मैं सच में अकेला हूँ?

इन ऊँची इमारतों की बुनियाद में,

पत्थर किसने जमाए हैं?

बिजली के खंभे, तार बिछाकर,

रोशनी किसने लाए हैं?

सूखे खेतों में जीवन भरने,

कुएँ किसने खोदे हैं?

नहरों का जल बहाने को,

पसीने किसने बोए हैं?

बीज बोना, फसल काटना,

अनाज के बोरे ढोना,

वाहनों पर लाद-उतार कर,

जीवन का चक्र संजोना।

हर सुविधा, हर निर्माण के पीछे,

एक ही नाम उभरता है—

न कोई मालिक, न अधिकारी,

वह साधारण मज़दूर होता है।

यदि उनका श्रम न हो साथ,

तो न चुनाव में जीत मिले,

न शहर की सफाई हो पाए,

न जीवन में संगीत खिले।

कूड़ा उठाने वाला मज़दूर,

यदि अपना काम न करे,

तो यह मानव सभ्यता भी,

बदबू के नरक में उतरे।

सड़कें, पटरी, हर निर्माण—

सब उनके श्रम की पहचान,

हर सुविधा के पीछे छिपा है,

उनका अदृश्य बलिदान।

आओ उनका मान बढ़ाएँ,

आभार हृदय से जताएँ,

मई महीने की प्रथम तिथि को,

मज़दूर दिवस मनाएँ।

यह केवल एक दिवस नहीं,

सम्मान का है संदेश—

मज़दूरों के श्रम से ही,

सजता है यह देश।