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Wednesday, May 27, 2026

शब्दों के खेल

 शब्दों के खिलाड़ी।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

28-5-26

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 मानव जीवन में 

 शब्द न तो 

 न दार्शनिक अभिव्यक्ति।

न   हास्य व्यंग्य संवाद।

 न नैतिक मार्गदर्शन।

निरर्थक और सार्थक शब्दों में 

 श्लेष अलंकार में 

 काका वक्रोक्ति में 

 कवि, चित्रपट संगीत कवि, संभाषण 

 कितना मन मोहक।

 कितना प्रभाव।

तमिलनाडु के शासक

 मुख्यमंत्री 

 द्रमुक पार्टी 

  शब्दों के खिलाड़ी।

 रजनिकांत का एक वाक्य 

 मैं एक बार कहूँ तो

 सौ बार कहने के समान।

 हर एक के मुँह से निकलता है।

 आजकल के मुख्यमंत्री 

 विजय,

 मेरा कहना मैं खुद नहीं सुनता।

स्वर्गीय मुख्यमंत्री एम जी आर का गाना,

 मैं हुकुम दूँ तो

 गरीबों को वेदना न होगी।

हिंदी सिनेमा के गाने शब्द अर्थ न जानने पर भी

 सपनों की रानी कब आएगी दूँ।

 मैं शायर तो नहीं 

हम तुम एक कमरे में 

बंद हो।

जिंदगी कुछ भी नहीं,

कुछ खोकर पाना है,

कुछ पाकर खोना है।

कबीर वाणी के डिक्टेटर 

 जाको राखै साइयां ---

बाल न बांका करि सकै,

जो जग वैरु होय।

बिहारी

मेरी भवबाधा दूर करो--

हरित दुती होय।

 रहिमन पानी राखिए,

बांध पानी सब सून।

 तुलसीदास 

 राम नाम मणि दीप धरूं

 अंदर बाहर  चाहूं और उजियार।

शब्दों के खिलाड़ी 

 शासकों के चापलूसी होते हैं।

 वीरगाथा काल में 

 राजा की वीरता 

 जिसका खाना, उसका गाना।

 रीतिकालीन शृंगार रस

‌आधुनिक काल देश भक्ति।

 कवि लेखकों के शब्द 

 अति प्रेरणा प्रद,

 प्रोत्साहन प्रद

 सुप्त जनता में 

 उत्तेजित नारे

 स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार।

 जय हिंद।

वंदेमातरम।

 परिवार नियोजन 

 हम दो हमारे दो।

  द्विपत्नियों वाले 

 कृष्ण के दो,

 कार्तिकेय के दो।

 दशरथ के तीन 

 हम क्या थे, क्या हो गये

नर हो न निराश करो मन को।

 शब्द नश्वर है।

सोच समझकर शब्दों से खेलना है।


  रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गै सरग पताल।

आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल!! 

 दोस्ती दुश्मनी प्रे नफरत

 त्याग भोग सब शब्दों के खेल।






 

 


 




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