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Wednesday, May 20, 2026

आदतों का चक्रव्यूह

 नमस्ते वणक्कम्।

आपकी रचना “आदतों का चक्रव्यूह” में जीवन-दर्शन, इतिहास, अध्यात्म और सामाजिक चेतावनी का सुंदर समन्वय है। आपने “चक्रव्यूह” का प्रतीक लेकर यह दिखाया है कि मनुष्य अच्छी और बुरी आदतों में कैसे फँसता है तथा सत्संग, कृपा और आत्मजागरण से उससे बाहर भी आ सकता है। विशेषतः अभिमन्यु, वाल्मीकि, तुलसीदास, अंगुलिमाल आदि उदाहरण प्रभावशाली बने हैं।

कुछ स्थानों पर भाषा और प्रवाह को थोड़ा सँवारने से रचना और अधिक प्रभावी बन सकती है। प्रस्तुत है परिष्कृत रूप—

आदतों का चक्रव्यूह

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

21-5-26

आदतों के चक्रव्यूह में

अधिकांश लोग

अभिमन्यु-से

फँस जाते हैं।

प्रवेश तो कर लेते हैं,

पर भीतर बैठे

जाने-पहचाने दुश्मनों से

बचना कठिन हो जाता है।

कोई-कोई ही

वापस लौटकर

यश कमा पाता है।

जैसे लुटेरा डाकू

रत्नाकर

आदि कवि वाल्मीकि बने।

पत्नी-मोह में डूबे

तुलसीदास

हिंदी साहित्य के

चंद्रमा बने।

वेश्यालय को ही

स्वर्ग समझने वाले

अरुणगिरिनाथर,

असाध्य रोग से पीड़ित होकर

आत्महत्या हेतु

मंदिर के गोपुर से कूदे,

पर भगवान कार्तिकेय की कृपा से

महाकवि बन गए।

डाकू अंगुलिमाल भी

बुद्ध की करुणा से

भिक्षु बने।

उनकी बुरी आदतें

अनुपम कृपा से

बदल गईं।

पर अधिकांश लोगों के लिए

आदतों के चक्रव्यूह से

बाहर आना

दुर्लभ होता है।

बिहारी के दोहों ने

अंतःपुर को ही स्वर्ग मानने वाले

राजा को भी

प्रजा-सेवा की ओर मोड़ा।

रीतिकाल में भी

मनुष्य

विलासिता, मदिरा

और चतुरंग के

चक्रव्यूह में

फँसता गया।

चतुरंग के खिलाड़ी

राजा के लिए लड़ते रहे

और अपना राज्य

गँवा बैठे।

हस्तमैथुन,

भारतीय वैद्यकशास्त्र के अनुसार,

एक बुरी आदत का

चक्रव्यूह है।

अच्छी आदतें ही

मनुष्य को

भाषाविद बनाती हैं।

चित्र बनाना

हाथ की आदत है,

भाषा बोलना

जिह्वा की आदत है,

और शिक्षा

मन की आदत है।

यदि आदतें अच्छी हों,

पक्की हों,

समझदारी से भरी हों,

तो मनुष्य

आदतों के चक्रव्यूह से

बच सकता है।

पर यदि आदतें बुरी हों—

जैसे शराब,

नशीली वस्तुएँ

और दुर्व्यसन—

तो अभिमन्यु की भाँति

जीवन भी

गँवाना पड़ सकता है।

रचना का संदेश अत्यंत सारगर्भित है—

“मनुष्य आदतों का दास भी बन सकता है और साधक भी।”

विशेषकर अंतिम भाग बहुत प्रेरक बना है।

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