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Sunday, May 10, 2026

विश्प्रववासी पक्षियों के दिवस।

 विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

लखनऊ हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा सौहार्द सम्मान प्राप्त

हिंदी सेवक, प्रेमी, प्रचारक, लेखक एवं अनुवादक

द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

10-5-26

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मानव जीवन से

पशु-पक्षी जीवन तक,

ऋतुओं के अनुसार

स्थान परिवर्तन

प्रकृति का शाश्वत नियम है।

पाषाण युग में

जब एक वन में

शिकार समाप्त हो जाता,

तब मानव को

दूसरे वन की ओर

प्रवास करना पड़ता था।

कृषि का ज्ञान मिलते ही

मानव का भटकता जीवन

एक स्थान पर

स्थिर हो गया,

किन्तु प्रकृति की अद्भुत सृष्टि में

आज भी असंख्य पक्षी

हजारों मील की यात्रा कर

ऋतु परिवर्तन के साथ

अपने गंतव्य तक पहुँचते हैं।

प्रवासी पक्षियों का यह

अनुशासन, धैर्य और

प्रकृति-निष्ठ जीवन

मानव को भी

संदेश देता है।

इनकी सुरक्षा करना,

मार्ग में होने वाले

शिकार, प्रदूषण और

विनाश से बचाना

मानवता का धर्म है।

दुर्भाग्य से

अनेक प्रवासी पक्षियों की

प्रजातियाँ निरंतर

कम होती जा रही हैं।

अनुसंधानों के अनुसार

विश्व की लगभग

४० प्रतिशत प्रवासी प्रजातियाँ

घट चुकी हैं।

इसके प्रमुख कारण हैं—

प्रदूषण,

जलवायु परिवर्तन,

प्राकृतिक मार्गों में बाधाएँ,

अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश,

विमानों की आवाजाही

और पर्यावरण असंतुलन।

इसी जागरूकता हेतु

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

सन् 2006 से

विश्वभर में मनाया जा रहा है।

वेडंतांगल पक्षी अभयारण्य

तमिलनाडु का यह प्रसिद्ध

पक्षी शरणालय

प्रवासी पक्षियों के लिए

सुरक्षित आश्रय बना हुआ है।

मौसम आने पर

यहाँ दर्शकों की

विशाल भीड़ उमड़ती है।

आइए,

हम सब मिलकर

प्रकृति के इन अतिथियों की

रक्षा का संकल्प लें,

क्योंकि

वैश्विक प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा

ही सच्चा मानव धर्म है।

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