साहित्य संगम संस्थान, मध्यप्रदेश इकाई को नमस्कार।
मुंशी प्रेमचंद दिवस।
एस.अनंतकृष्णन , चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।
हिंदी साहित्य संस्थान लखनऊ उत्तर प्रदेश द्वारा सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी सेवक अनुवादक। हिंदी प्रचारक।
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मुंशी प्रेमचंद हिन्दी कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में सम्राट है।
उनकी कहानियाँ और उपन्यास
सदा हर युग के अनुकूल
चिर स्मरणीय और अनुकरणीय हैं।
उनकी कहानियों के उद्धरण
सदा स्मरणीय और प्रेरणादायक हैं।
1.दौलत से आदमी को जो इज्ज़त मिलती है,
वह उसकी नहीं, उसकी दौलत की इज्ज़त होती है।
2. जीवन --खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है आगे बढ़ते रहने की लगन का।
3.न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं, इन्हें वह जैसे चाहती है नचाती हैं।
4.सुंदरता मन की चीज़ है,तन की नहीं।
5.चली हुई बात और सीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता।
6. जो अपने घर में ही सुधार न कर सका हो,उसका दूसरों को सुधारने की चेष्टा करना बड़ी भारी धूर्तता है।
7.क्रोध अत्यंत कठोर होता है, वह देखना चाहता है कि मेरा वाक्य निशाने पर बैठता है या नहीं, वह मौन को सहन नहीं कर सकता।
8.अपमान को निगल जाना चरित्र पतन की अंतिम सीमा है।
9.स्पष्टवादिता मनुष्य का एक उच्च गुण है।
10.माता का हृदय दया का आगार है। उसे जलाओ तो उसमें दया की ही सुगंध निकलती है,
पीसो तो दया का ही रस निकलता है। वह देवी है, विपत्ति की क्रूर लीलाएँ भी उस स्वच्छ निर्मल स्रोत को मलिन नहीं कर सकती।