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Thursday, August 27, 2026

रक्षाबंधन

 

आज की चुनौती

रक्षाबंधन

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

बहन के हाथों भाई की कलाई पर
राखी बाँधना—
यही है रक्षाबंधन।

यह त्योहार
परंपरागत रूप से उत्तर भारत में
विशेष रूप से मनाया जाता रहा है।
पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते
और प्रेम का यह पर्व
अब उत्तर-दक्षिण का भेद मिटाकर
दक्षिण भारत में भी
उत्साह से मनाया जाने लगा है।

आज राखी के पर्व में
मजहब और जाति का भेद नहीं।
यह प्रेम, भाईचारे और एकता का
सुंदर संदेश देता है।

प्रचलित ऐतिहासिक कथा के अनुसार,
मेवाड़ की रानी कर्णावती ने
हुमायूँ को राखी भेजकर
भाई का रिश्ता बनाया था।
हुमायूँ ने भी
रानी को अपनी बहन मानकर
उनकी सहायता करने का प्रयास किया।

पौराणिक कथा में कहा जाता है कि
जब श्रीकृष्ण की उँगली से रक्त निकला,
तब द्रौपदी ने
अपने आँचल का कपड़ा फाड़कर
उनकी उँगली पर बाँध दिया।
कृष्ण ने द्रौपदी को
अपनी बहन के समान माना।

बाद में जब भरी सभा में
दुःशासन ने द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया,
तब श्रीकृष्ण ने
उनकी लाज की रक्षा की।
इसी कथा को भी
रक्षाबंधन के पवित्र भाव से जोड़ा जाता है।

एक अन्य प्रचलित कथा
राजा महाबली और माता लक्ष्मी से जुड़ी है।

वामन अवतार में
भगवान विष्णु ने महाबली से
तीन पग भूमि माँगी।
महाबली की दानशीलता से प्रसन्न होकर
विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया
और स्वयं उनके द्वारपाल बनकर
वहीं रहने लगे।

भगवान विष्णु के वापस न लौटने पर
माता लक्ष्मी पाताल लोक पहुँचीं।
उन्होंने महाबली की कलाई पर
रक्षा-सूत्र बाँधकर
उन्हें अपना भाई बनाया।

महाबली ने बहन लक्ष्मी की इच्छा का सम्मान करते हुए
भगवान विष्णु को
उनके साथ जाने की अनुमति दी।

रक्षाबंधन केवल
कलाई पर धागा बाँधने का पर्व नहीं है।
यह भाई-बहन के बीच
पवित्र प्रेम, विश्वास, स्नेह
और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है।

आज बहनें केवल अपने सगे भाई की ही नहीं,
बल्कि अनेक लोगों की कलाई पर
राखी बाँधकर
भाईचारे का संदेश देती हैं।

प्रधानमंत्री सहित अनेक सार्वजनिक व्यक्तियों को भी
राखी बाँधने की परंपरा दिखाई देती है।

रक्षाबंधन—
भाई-बहन के पवित्र प्रेम,
अटूट विश्वास
और परस्पर सुरक्षा के संकल्प का
एक सुंदर भारतीय पर्व है।

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