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Tuesday, August 4, 2026

पिंजरे का बंद पक्षी

 आज की चुनौती – पिंजरे का बंद पक्षी



पिंजरे के पक्षी

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

5-8-26

नमस्ते वणक्कम्।

 पिंजरे के पक्षी

 गुलाम है मानव का।

यह एक मानव के मनोरंजन के साधन।

अपनी खुशी के लिए 

 स्वतंत्र हम उड़ान के

 पक्षी की आज़ादी 

 छीनना  निर्दय मानव का गुण।

 नवविवाहिता बहु को भी लोग घर के पिंजड़े में बंद कर रखते हैं।

 एक कवि ने लिखा 

 पिंजरे में बन्द पक्षी

 गा न सकता।

अपनी आज़ादी खोकर

 दुखी रहता है।

आज़ादी की लड़ाई में 

 अनेक लोग  कारावास में रहे।

 पिंजड़े के पक्षी का पंख भी काट देते हैं।

 यातना सहकर

 वह मूक पक्षी  

  रोता रहेगा।

स्वच्छ गगन में उड़ना,

 मन पसंद दाल चुगना

अपने अन्य पक्षियों से मिलना, 

 प्यार हम करना सब कल्पना करके घुट-घुट कर मरेगा।

 हिंदू शास्त्रों के अनुसार 

 पक्षी को जो

 पिंजड़े में बंदकर 

 सताता है,

 उसको उसके वंशज को जेल की सज़ा भोगना पड़ेगा।

 जैसी करनी,

 वैसी भरनी।

कर्म फल भोगना 

 निश्चित।


+++++++++++

पिंजरे का पक्षी
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई (तमिलनाडु)
5-8-2026

नमस्ते। वणक्कम्।

पिंजरे का पक्षी,
मानव का गुलाम बन जाता है।
वह किसी के मनोरंजन का साधन है,
पर उसकी स्वतंत्रता छिन जाती है।

मनुष्य अपनी खुशी के लिए
उसकी उड़ान रोक देता है।
खुले आकाश में विचरने का अधिकार
निर्दयता से छीन लेता है।

कभी-कभी नवविवाहिता बहू भी
घर की चारदीवारी में
मानो पिंजरे की चिड़िया बनकर रह जाती है।

एक कवि ने ठीक ही कहा है—
"पिंजरे में बंद पक्षी
मन से गा नहीं सकता।
स्वतंत्रता खोकर
वह भीतर ही भीतर रोता है।"

स्वतंत्रता की रक्षा के लिए
अनेक वीरों ने कारावास सहा।
पिंजरे के पक्षी के तो
पंख भी काट दिए जाते हैं।

यातना सहता वह मूक प्राणी
कुछ कह नहीं पाता,
केवल मौन आँसू बहाता है।

स्वच्छ गगन में उड़ना,
मनचाहा दाना चुगना,
अपने साथियों से मिलना,
प्रेम से जीवन जीना—
ये सब उसके लिए
केवल कल्पना बनकर रह जाते हैं।
वह घुट-घुटकर जीता है।

हिंदू शास्त्रों में भी कहा गया है कि
निर्दोष प्राणियों को कष्ट देना
पाप का कारण बनता है।
हर कर्म का फल
एक न एक दिन अवश्य मिलता है।

जैसी करनी, वैसी भरनी।
कर्मफल से कोई बच नहीं सकता।

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