आज की चुनौती
जीवन का दृष्टिकोण
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
29-8-26
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जीवन क्या है?
जन्म और मृत्यु के बीच
मिला हुआ समय—
नश्वर जगत में
जीवन का एक अवसर।
जब तक जिएँ,
परोपकार के लिए जिएँ।
त्यागी और हितचिंतक का
यही दृष्टिकोण होना चाहिए।
परमार्थ के लिए
साधु भी शरीर धारण करते हैं।
स्वार्थी भी जीता है,
लोभी भी जीता है,
ईर्ष्यालु भी जीता है,
कामांध भी जीता है,
चोर-डाकू भी जीते हैं।
परंतु
हर व्यक्ति के जीवन का
दृष्टिकोण
भिन्न-भिन्न होता है।
देश के लिए
अपना सिर न्योछावर करना—
यह भी एक दृष्टिकोण है।
चुनाव जीतकर
जनसेवा करना—
यह भी एक दृष्टिकोण है।
पर मालामाल बनने के लिए
चुनाव लड़ना—
यह भी एक दृष्टिकोण है।
सेवा-भाव से
संसार चलता है।
निःस्वार्थता,
सत्यवादिता,
निष्काम कर्म
और ईमानदारी का दृष्टिकोण
सदैव स्तुत्य है।
जीवन का उद्देश्य
सकारात्मक होना चाहिए।
मानवता और परोपकार को
अपनाना चाहिए।
आदर्श दृष्टिकोण ही
जीवन को सार्थक बनाता है
और वही
स्थायी स्मृति बनकर रहता है।
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