உள்ளம் பெருங்கோயில் ஊனுடம் பாலையம்
வள்ளற் பிரானார்க்கு வாய்கோ புரவாசல்தெள்ளித் தெளிந்தார்க்குச் சீவன் சிவலிங்கங்
கள்ளப் புலனைந்துங் காளா விளக்கே."
(பாடல் எண்: 1823)
उळ्ळम् पेरुम कोयिल ऊनुडंबालैयम्
वळ्ळल् पिरानार्क्कु वाय गोपुरवासल्
तॆळ्ळित् तॆळिंतारुक्कु जीवन शिवलिंगंकळ्ळप्पुलनैंतुंकाळा विळक्के।
(तिरुमंत्र 1823)
उळ्ळम --मन
पेरुम कोयिल =भगवान बसा बडा मंदिर
ऊनुडंबु आलयम् =इस माँस का शरीर उस मंदिर की इमारत है।
वाय गोपुरम वासल =मुख गोपुरम द्वार है
जीवन शिवलिंग ==स्पष्ट ज्ञानी को हमारे प्राण ही शिवलिंग है।
कळ्ळप्पुलनैंदुम काळा मणिविळक्कु = हानियाँ पहुँचानेवाली पंचेंद्रियाँ मणि दीप होते हैं।
मानव मन ही ईश्वर बसा एक बड़ा मंदिर है।इस
माँस का शरीर उस मंदिर की इमारत है। मुख गोपूर का द्वार है। स्पष्ट ज्ञानियों के लिए हानियाँ पहुँचानेवाली
पंचेंद्रियाँ ही मणि दीप होते हैं।
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