तिरुक्कुरल।
कालत्तिनाल् चेय्त उदवि चिऱितेनिनुम् ज्ञालत्तिल माणप्पेरितु --- संत तिरुवल्लुवर का तिरुक्कुरल।
समय पर की गयी मदद ब्रह्मांड से बड़ा है।
कालत्तिल --समय पर
चेय्त =की गयी
उदवि =मदद
चिरितेनिनुम् ==छोटा होने पर भी
ज्ञालत्तिल - ब्रह्मांड से
माणप्पेरितु == बहुत बड़ा है।
भावार्थ --
समय पर अर्थात वक्त पर की गई मदद
अति छोटी होने पर भी ब्रह्मांड से बड़ी है।
ब्रह्माण्ड तो सद्यःफल नहीं देता। उसमें बीज बोने पर अंकुर फूटकर पौधे बनकर फल देने देर लगेगा।
दोस्ती ==
उडुक्कै इऴंदवन कै पोल अंगे इडुक्कण कळैवताम् नट्पु।
उडुक्कै -- कमर की धोती
इऴंदवन = फिसलने पर
कै =हाथ के जैसे
इडुक्कन =दुख
कळैवताम् =दूर करना ही
नट्पु ==मित्रता है।
कमर की धोती गिरने पर तुरंत हाथ उसे पकड़कर मान की रक्षा करेंगे, वैसे ही दुख के आते ही दुख दूर करना ही सच्ची मित्रता है।
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित अनूदित भावाभिव्यक्ति रचना।
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