नमस्ते वणक्कम्।
राम नाम जपना
राग-द्वेष भूलना
भेदभाव रहित
चंचल मन को
आत्मा में विलीन करना
आत्म चिंतन करना
अनेक विचारों का समन्वय
राम नाम जपने का परिणाम।।
राम नाम
शिवनाम
आध्यात्मिक भूमि में
आसुरी शक्तियों का षडयंत्र,
फिर भी भारत
जगत मार्ग दर्शक।
कारण भारत है
त्याग की भूमि,
समरस सन्मार्ग की भूमि,
सनातन धर्म सागर।
सभ्यता का शिरमौर।
सनातन धर्म ही
सर्व जन कल्याणकारी।
वसुधैव कुटुंबकम्,
वैश्वमैत्री का बुनियाद।
शिवराम आसेतुहिमाचल के
विचारों की एकता।
जय भारत।
जय राम। राम राम।
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक
।
आज की चुनौती
राम नाम जपना
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी-प्रेमी प्रचारक
राम-नाम जपना,
राग-द्वेष भूलना,
भेदभाव मिटाना,
चंचल मन को
आत्मा में विलीन करना,
आत्मचिंतन करना।
अनेक विचारों का
समन्वय करना—
यही है
राम-नाम जपने का परिणाम।
राम-नाम हो या शिव-नाम,
आध्यात्मिक भूमि भारत में
आसुरी शक्तियों का षड्यंत्र
चाहे कितना भी हो,
फिर भी भारत
जगत का मार्गदर्शक है।
कारण—भारत है
त्याग की भूमि,
समरसता और सन्मार्ग की भूमि,
सनातन धर्म का सागर।
सनातन संस्कृति
सभ्यता की शिरमौर है।
सनातन धर्म ही
सर्वजन-कल्याणकारी है।
“वसुधैव कुटुम्बकम्”
विश्व-मैत्री की बुनियाद है।
शिव और राम—
आसेतु-हिमाचल तक
विचारों की एकता के प्रतीक हैं।
जय भारत!
जय राम!
राम राम!
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