जीवन की दिशा
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।
16-8-26
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जीवन की दिशा
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
16-8-26
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जीवन की दिशा
हर एक की रुचि,
क्षमता, बुद्धि-लब्धि,
जीवन-रेखा—
भगवान के अनुग्रह की
दिशा दिखाती है।
मानव अपने प्रयत्न करता है,
अपने परिश्रम करता है,
सफलता के लिए
दिशा स्वयं निर्धारित करता है।
लेकिन हर किसी को
अपनी चाही हुई दिशा में
कामयाबी नहीं मिलती।
मेरे जीवन में
तमिलनाडु में हिंदी-विरोध के बीच
हिंदी का ज्ञान,
हिंदी का प्रचार,
हिंदी से जीविकोपार्जन—
सब ईश्वर की देन है।
मैं अपने क्षेत्र में ही
नौकरी ढूँढ़ता रहा।
अपने ही शहर में रहने के लिए
लाखों प्रयास किए।
पर मेरे जीवन की दिशा
किसी और ओर थी।
मेरा भाई
अपने शहर से बाहर
नौकरी ढूँढ़ता रहा।
आज वह
अपने ही शहर में है।
मैं बाहर आया,
जिस दिशा को मैंने नहीं चुना,
वही मेरे जीवन की दिशा बनी।
तब समझ में आया—
मनुष्य दिशा चुनता है,
पर जीवन की अंतिम दिशा
ईश्वर निर्धारित करता है।
हमारी इच्छा
एक रास्ता दिखाती है;
ईश्वर का अनुग्रह ही
जीवन की दिशा का निर्धारण करता है।
सबहीं नचावत राम गोसाईं।
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