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Saturday, August 29, 2026

राष्ट्रीय खेल दिवस

नमस्ते वणक्कम्।

आज की चुनौती

राष्ट्रीय खेल दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

30-8-26

“शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।”

शरीर ही

धर्म और कर्म करने का

मुख्य साधन है।

स्वस्थ शरीर से

स्वास्थ्य और शक्ति मिलती है,

हार सहने की शक्ति मिलती है,

अपने ज्ञान का प्रसार करने की

क्षमता मिलती है।

अपने कर्तव्यों का पालन करने,

अपनों से प्रेम निभाने,

अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने,

पतन से उत्थान की ओर बढ़ने के लिए

मनोबल के साथ-साथ

शारीरिक बल भी

अत्यंत आवश्यक है।

कमजोर शरीर,

शिथिल हाथ-पाँव—

जीवन में बहुत कुछ

नहीं कर सकते।

शारीरिक बल के लिए

स्वस्थ शरीर चाहिए;

और स्वस्थ शरीर के लिए

नियमित व्यायाम तथा

खेलकूद आवश्यक हैं।

दौड़ना,

दंड-बैठक करना,

पैदल चलना,

योगाभ्यास करना—

ये सभी शरीर को

स्वस्थ और मजबूत बनाते हैं।

मैदानी खेलों में

कबड्डी, हॉकी, क्रिकेट,

फुटबॉल, टेनिस आदि हैं।

दिमागी खेलों में

शतरंज और

बकरी-बाघ जैसे खेल

बुद्धि को तीक्ष्ण बनाते हैं।

खेल केवल मनोरंजन नहीं,

बल्कि अनुशासन,

एकाग्रता,

सहनशीलता,

आत्मविश्वास और

खेल भावना भी सिखाते हैं।

विश्व स्तर पर

ओलंपिक खेलों के माध्यम से

खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा

दिखाने का अवसर मिलता है।

दक्षिण एशियाई खेलों तथा

अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के द्वारा

खेलों को प्रोत्साहन मिलता है।

भारत में

खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने,

युवाओं को खेलों के लिए प्रेरित करने

और उत्कृष्ट खिलाड़ियों तथा प्रशिक्षकों को

सम्मानित करने के उद्देश्य से

राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है।

भारत के महान हॉकी खिलाड़ी

मेजर ध्यानचंद को

“हॉकी का जादूगर” कहा जाता है।

उनके जन्मदिवस

29 अगस्त को

राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है।

ध्यानचंद ने

1928, 1932 और 1936 के

ओलंपिक खेलों में

भारत को लगातार तीन

स्वर्ण पदक दिलाने में

महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर

देश के उत्कृष्ट खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को

मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार,

अर्जुन पुरस्कार और

द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे

प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है।

राष्ट्रीय खेल दिवस का संदेश है—

खेलो, स्वस्थ रहो,

अनुशासन से जियो;

हार से मत घबराओ,

प्रयास करते रहो।

शारीरिक शक्ति से

मनोबल बढ़ता है,

मनोबल से आत्मविश्वास बढ़ता है,

और आत्मविश्वास से

सफलता का मार्ग खुलता है।

खेल भावना से

जीवन में विजय ही नहीं,

हार को स्वीकार करने की

परिपक्वता भी आती है।

खेल स्वस्थ जीवन का आधार,

खेल युवाओं की शक्ति;

खेल राष्ट्र की प्रतिष्ठा,

खेल ही जीवन की स्फूर्ति।

धन्य हैं मेजर ध्यानचंद!

धन्य है खेल भावना!

जय हिंद!


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