प्राचीन भारत ज्ञान परंपरा ही
विश्व को सही मार्ग पर ले चलेगा।
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एस . अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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जितनी बातें आजकल
हो रही है, उनकेहै कारण तुलसी के दोहों में है,
कबीर के दोहों में हैं।
काम क्रोध मद लोभ
जब मन में लगे खान,
पंडित मूर्खो एक समान,तुलसी कहत विवेक।
कबीर आत्म चिंतन करने की सीख देते हैं --
बुरा जो देखन मैं गया,बुरा न तिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोय।।
जाति भेद के खंडण
में
जाति न पूछो साधु की पूंछ लीजिए ज्ञान।
मोल करो तलवार का,
पड़ा रहने दो म्यान।।
पानी के अर्थ है -जल, इज्ज़त,चमक।
पानी की रक्षा कीजिए।
पानी बचाइए ।
रहीम का दोहा --
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊभरे,
मोती मानुष सून।
शिक्षा का महत्व-
स्वदेशे पूज्यंते राजा,
विद्वान सर्वत्र पूज्यंते।।
विश्व में शांति के लिए
वसुधैव कुटुंबकम्।
सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।।
ईश्वर महिमा--
कबीर --
जाको राखे साइयां,मारी न सकै कोय।
बाल न बांका करि सकै,जो जग वैरी होय।
गुरु महिमा-
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताया।।
संत तिरुवल्लुवर
संपत्तियों में बड़ी सौपत्ति सुनना।
श्रवण संपत्ति।
वही सभी संपत्तियों का सिरमौर।।
दो हजार की किताबें लेना आसान है।
पर उस महान ग्रंथ ज्ञान को प्रवचन में सुनने से
ज्ञान जल्दी मिल जाता है।
ईश्वर ध्यान
माला तो कर में फिरै जीभ फिरै मुख माहीं।
मनुवा तो दस दिशै फिरै यह तो सुमिरन नाहीं। दल
सत्यं वद।
जय जगत।
स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार।
ये सब प्राचीन ज्ञान परंपरा की देन है।
अपने दोष निवारण के लिए -
निंदक नियारे राखिये, आंगन कुटी समाय।।
जय भारत की ज्ञान परंपरा।
त्यागमय जीवन भारतीय परंपरा।
पाश्चात्य परंपरा भोग मय।
जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्यं।।
नश्वर जगत।
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