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Thursday, August 13, 2026

शब्द और संवाद

 शब्द और संवाद।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

१४-८-२६

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शब्द का अपना महत्व है,

 संवाद का अपना महत्व है।

आजकल जोरदार असरदार संवाद 

जिसे अंग्रेजी में 

पंच डयलाग् कहते हैं।

 तमिल सिनेमा के रजनिकांत का एक संवाद प्रसिद्ध है

 मैं एक बार कहूँ तो 

सौ बार कहने के समान है,

आज सर्वत्र यह संवाद 

चालू है।

प्रेम ही प्रेम नाम है प्रेम चोपड़ा 

यह भी प्रसिद्ध है।

 चित्रपट की सफलता के लिए 

 शब्द चयन , संवाद गीत अति मुख्य  हैं।

 तीनों के लिए शब्द प्रधान।

 तुम तो बड़े आदमी हो।

  दृश्य और बोलने के ढंग से वह छोटे आदमी हो जाता है।

 उसे काक वक्रोक्ति कहते हैं।

दोनों हाथों में लड्डू है।

मुहावरे  और  लोकोक्तियां 

संवाद में भी प्रयोग होते हैं।


 दुरंगी दुनिया।

हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।

 नाच न जाने आंगन टेढ़ा।

 ये सब संवाद में भी है तो  शब्द शक्ति और संवाद कला में निपुण होना चाहिए।

 शब्दों की असावधानी के बारे में रहीम ने कहा है--

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गई सरग पताल।आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥।

  शब्द, संवाद मानव जीवन में अधिक महत्वपूर्ण है।

श्लेष शब्द में तो भिन्न अर्थ आते हैं।

काकवक्रोक्ति में 

तो कहने का अभिनय प्रधान होता है।

 सुवर्ण को खोजते फिरत

कवि व्यभिचारी चोर।

 सुवर्ण के तीन अर्थ है

सुंदर शब्द, सुंदर रंग सोना।

 कवि सुंदर शब्द का,

वेश्या सुंदर रूप रंग का

 चोर सोने का 

यही शब्द विशेष  है।

 जीवन में शब्द भंडार उसका प्रयोग संवाद 

 अति प्रधान है।


शब्द हमारा परिचय है,

संवाद हमारी कला।

शब्दों में शक्ति हो,

संवाद में संवेदना हो,

तो साधारण बात भी

हृदय को छू जाती है।

इसलिए जीवन में

शब्द-भंडार ही नहीं,

शब्दों का उचित प्रयोग

और संवाद-कला में निपुणता

भी अत्यंत आवश्यक है।

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