नियति का खेल
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
नियती का खेल।
भाग्य चक्र
विधि की विडंबना
सोचो समझो जानो जागो
कर्म फल की देन।
सुविचार बदविचार
किसका कसर?
परिणाम निम्न चिंतन:-
नमस्ते वणक्कम्।
मानव क्या बुद्धिमान हैं?
क्या मानव में सहज क्रिया है?
मानव सुखी क्यों?
मानव दुखी क्यों?
एक ही राजा रानी के पुत्रों में
एक वीर,एक कायर क्यों?
अमीर के परिवार में जन्म क्यों?
अमीर के यहाँ असाध्य रोगी क्यों?
खानदान का उत्थान पतन क्यों?
एक ही गुरु के शिष्यों में
प्रतिभाशाली और मंद बुद्धि हम क्योँ?
डाक्टरों में भेदभाव क्यों?
अध्यापक में अच्छे शिक्षक क्यों?
आध्यात्मिक क्षेत्रों में ढोंगी पाखंडी हम क्यों?
पतिव्रता भद्र महिला
वीरांगना क्यों?
विषकन्या वारांगना क्यों?
सत्यवान क्यों?
असत्यवान क्यों?
दादू निर्दयी, त्यागी भोगी क्यों?
सोचो समझो
मानव केवल कठपुतली है।
स्वार्थ कृपन देश द्रोही क्यों?
न्याय अन्याय क्यों?
खूँख्वारादमखोर बाघ क्यों?
हिरन क्यों?
बलवान हाथी पालतू जानवर
मानव की कठपुतली क्यों?
मकड़ी का जाल क्यों?
उसमें फँसकर आहार
बननेवाला कीड़ा क्यों?
अंतिम निष्कर्ष यही
सबहीं नचावत राम गोसाईं!
जानो समझो जागो जगाओ
एकांत ध्यान में
अपने को सुधारो!
जनकल्याणकारी कामों में लगो।
आज का तेरे नाम ,पद, धन
मृत्यु के बाद बेकार ही।
भूल जाने में न देरी।
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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।
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