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Friday, May 29, 2026

मुट्ठी भर रेत।

 मुट्ठी भर रेत।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

30-5-26..


मुट्ठी भर रेत,

 मानव प्राप्त ज्ञान।

कवि पंत की रचना,

पंत का पूरा नाम?

गुप्त का पूरा नाम?.

अज्ञेय का पूरा नाम?

गाँधी?  खान परिवार?

 महात्मा गाँधी परिवार?

कितना बडा अंतर?

यों  पूरे नाम,

 पूरा इतिहास जानने में 

‌असमर्थ मानव।

शाहजहाँ प्यारा है 

प्रेम का यादगार है

 ताजमहल।

पर कितने लोग जानते हैं ,

शाहजहाँ अपनी बहन के 

 महबूबा को  जिंदा जलाया है।

 हम जी रहे हैं 

 एक हस्त मुट्ठी  ज्ञान पाकर।

 तमिल कवयित्री औवैयार ने लिखा है,




जो  कुछ हमने सीखा है,

वह मुट्ठी बराबर।

हम जो न सुखे,

वह प्रपंच बराबर।

 शिक्षा की देवता,

 सरस्वती भी रोज सीख रही है।

कवि अपने को 

 बड़ा मानकर,

 होड न लगाना।

चींटी भी  उसके 

अपने हाथ से 

नापने पर नौ अंगुल जान।

 सूक्ष्म बिंदु,

सूक्ष्मदर्शी से  ही

दीख पड़नेवाला

आकार रहित  सूक्ष्म शुक्ल से बढा


 से

बना मानव

 तीन किलो का स्वस्थ बच्चा,

 पता नहीं कैसे  आँख नाक मूक हाथ पैर 

नशे, नाड़ी, हड्डियाँ,

रीढ़ और पहली की हड्डियों का मानव बना?

वटवृक्ष का बीज कैसे

 बड़ा वट्वृक्षा एक सेना

ठहरने का विशाल विस्तार पेड़ बना।

अंत्येष्टी अग्नी में जले

 मानव का लाख

 मुट्ठी के रेत बराबर।


 

 

 

 


உற்ற கலைமடந்தை ஓதுகிறாள் – மெத்த

வெறும்பந்த யங்கூற வேண்டாம் புலவீர்

எறும்புந்தன் கையாலெண் சாண்

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 परिष्कृत रूप।

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नमस्ते वणक्कम्।

आपकी भावात्मक रचना में ज्ञान की सीमाएँ, मानव जीवन का रहस्य, इतिहास की अनजानी परतें और विनम्रता का गहन संदेश अत्यंत प्रभावशाली रूप में व्यक्त हुआ है।

आपकी शैली को बनाए रखते हुए परिष्कृत रूप प्रस्तुत है—

मुट्ठी भर रेत

✍️ एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

30-5-2026

मुट्ठी भर रेत,

मानव का प्राप्त ज्ञान।

कवि पंत की रचना,

पर कितने जानते हैं

उनका पूरा नाम?

गुप्त का पूरा परिचय?

अज्ञेय का वास्तविक नाम?

गाँधी परिवार का इतिहास?

खान परिवार की परंपरा?

नाम तो सब जानते हैं,

पर संपूर्ण जीवन-गाथा

जानना सरल नहीं।

शाहजहाँ प्रेम का प्रतीक,

ताजमहल उसका स्मारक।

पर कितने लोग जानते हैं

इतिहास के वे कठोर अध्याय,

जो चमक के पीछे छिपे हैं?

मानव जी रहा है

मुट्ठी भर ज्ञान लेकर,

जबकि अज्ञान का सागर

अनंत फैला हुआ है।

तमिल कवयित्री औवैयार ने कहा है—

“जो कुछ हमने सीखा है,

वह मुट्ठी भर है;

और जो नहीं सीखा,

वह संसार के समान विशाल है।”

विद्या की देवी सरस्वती भी

नित्य नवीन ज्ञान में प्रवृत्त हैं।

फिर कवि क्यों अहंकार करे?

प्रतिस्पर्धा क्यों पाले?

औवैयार का स्मरण—

“चींटी भी

अपने छोटे हाथों से

आठ माप नापने का साहस रखती है।”

सूक्ष्म बिंदु,

जो केवल सूक्ष्मदर्शी से दिखाई दे,

उसी सूक्ष्म तत्व से

मानव शरीर की रचना!

कैसे बनता है

तीन किलो का स्वस्थ शिशु?

आँखें, नाक, मुख, हाथ, पैर,

नाड़ियाँ, हड्डियाँ, रीढ़—

कैसा अद्भुत ईश्वरीय विज्ञान!

वटवृक्ष का छोटा बीज

कैसे बन जाता है

विशाल छायादार वृक्ष,

जहाँ असंख्य जन विश्राम करें?

और अंत में—

अंत्येष्टि अग्नि के पश्चात

मानव का समस्त अहंकार

मुट्ठी भर राख

या रेत बन रह जाता है।

तमिल पंक्तियाँ

உற்ற கலைமடந்தை ஓதுகிறாள் – மெத்த

வெறும்பந்த யங்கூற வேண்டாம் புலவீர்

எறும்புந்தன் கையாலெண் சாண்

भावार्थ

विद्या स्वयं विनम्रता सिखाती है।

हे कवियों! व्यर्थ अहंकार मत करो।

चींटी भी अपने छोटे हाथों से

आठ माप नापने का प्रयत्न करती है।

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