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Saturday, May 2, 2026

अच्छाई की महक

 नमस्ते वणक्कम्।

अच्छाई की महक

✍️ एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी सेवक प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3/5/26



नमस्ते वणक्कम्।

धूप में सुख, शीतल छाया में,

अच्छाई की महक समाया में।

ईमानदारी की मधुर सुवास,

परोपकार में बसता विश्वास।

दान-धर्म की पावन रेखा,

कर्ण-सी वीरता की लेखा।

कृष्ण की महक लोक-रंजन में,

लोक-रक्षा के पावन चिंतन में।

वेद-उपनिषद् की गूंज पुकार—

“सर्वे जना सुखिनो भवन्तु” साकार।

सनातन धर्म की सुगंध महान,

अतिथि-सेवा, ज्ञान-प्रदान।

ब्रह्म-महिमा के गान में बसती,

आत्मज्ञान की ज्योति जगाती।

राधा-प्रेम की मधुर उमंग,

भक्ति में बहता निर्मल रंग।

सद्ग्रंथों के गहन विचार,

चरित्र-निर्माण का सच्चा आधार।

गंगा-सी पावनता की धारा,

भारत-भूमि का दिव्य नजारा।

ध्यान, त्याग, ईश्वर-चिंतन में,

बसती इसकी महक अमर तन-मन में।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम,

जीवन को देते सच्चा आयाम।

सद्कर्म, सद्विचार, सत्संग साथ,

अनुशासन से उज्ज्वल हो हर पथ।

बुराइयों के तिमिर को हरती,

अच्छाई की महक नित निखरती।

आदर्शों से यथार्थ सजाती,

मानवता की राह दिखाती।


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