गंगा की पुकार
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई
14-5-26
जीवनदायिनी गंगा,
पतित-पावनी गंगा,
गंगोत्री से सागर तक
तेरा पावन प्रवाह,
भारतीय जनमानस को
सुख, शांति और
पापों से मुक्ति का
दिव्य संदेश सुनाता —
गंगा की पुकार।
करोड़ों श्रद्धालुओं को
भक्ति-पथ पर चलने,
तीर्थयात्रा करने को
प्रेरित करती
गंगा की पुकार।
गंगोत्री धाम में
गंगा माता का मंदिर,
भागीरथ की तपस्या की स्मृति,
रमणीय पर्वतीय वादियाँ,
हर ओर गूँजती
गंगा की पुकार।
हर्षिल और मुखबा घाटी,
जहाँ गंगा का शांत निवास,
उत्तरकाशी, ऋषिकेश, हरिद्वार,
प्रयागराज और काशी तक
आध्यात्मिक ज्योति जगाती
गंगा की पुकार।
मोक्षदायिनी,
पूर्वजों की आत्मा को शांति देनेवाली,
संकल्पों को पूर्ण करनेवाली,
दुःख हरनेवाली —
गंगा की पुकार।
वेद-मंत्रों की मधुर ध्वनि,
काशी की आरती की छटा,
विश्वनाथ और विशालाक्षी का आशीष,
सबमें सुनाई देती
गंगा की पुकार।
गंगा तट पर जीवन बिताते
मल्लाह, पुरोहित और साधु,
उनकी जीविका का आधार भी
तेरी ही कृपा —
गंगा की पुकार।
आसेतु हिमाचल तक
भारत की पुण्य धारा,
संस्कृति और सभ्यता की संवाहिका,
जन-जन की आस्था का केंद्र —
गंगा की पुकार।
जय-जय गंगे!
जय माँ भागीरथी!
भारत की आत्मा में
सदैव प्रवाहित रहे
गंगा की पुकार।
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