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Tuesday, May 12, 2026

अंधविश्वास


अंधविश्वास

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

13-5-26

नमस्ते। वणक्कम्।

मानव सदा

प्रमाणित सत्य पर

विश्वास रखता है,

पर अप्रमाणित, अवैज्ञानिक

मान्यताओं पर अटल भरोसा

अंधविश्वास कहलाता है।

भगवान को

आँखों से देख नहीं सकते,

किन्तु जीवन के अनुभवों में

उनका एहसास कर सकते हैं।

भारत में बच्चों को

डराने हेतु भी

अंधविश्वास का सहारा लिया जाता है—

कहते हैं,

इमली के वृक्ष पर भूत रहता है,

आधी रात में

प्रेत घूमते हैं।

बिल्ली का राह काटना

अपशकुन माना जाता है,

सियार दिख जाए

तो भाग्योदय समझते हैं।

शुभ कार्य के समय छींक आ जाए

तो लोग रुक जाते हैं।

पीढ़ियों से चली

अनेक मान्यताओं का

कोई ठोस आधार नहीं।

भाग्य, विधि-विधान,

ठगना और ठगे जाना—

इन सबको भी

लोग नियति का खेल मान लेते हैं।

मंत्र, ताबीज,

लाल-काले धागे,

टोने-टोटके,

शकुन-अपशकुन—

ये सब

अंधविश्वास की परछाइयाँ हैं।

दर्पण टूटना,

तेल या कुमकुम गिर जाना—

इन घटनाओं को भी

लोग भय से जोड़ देते हैं।

वैज्ञानिक युग में भी

अनेक लोग

इन भ्रांतियों पर विश्वास करते हैं।

नकली पाखंडी साधु

भोले जनों को ठगते हैं।

समाज में

जागृति, विवेक

और वैज्ञानिक चेतना

आवश्यक है।

अंधविश्वास नहीं,

सत्य और ज्ञान का प्रकाश

मानव जीवन का पथप्रदर्शक बने।

தமிழில் சுருக்கமான கருத்து:

“அறிவியல் ஆதாரம் இல்லாத நம்பிக்கைகள் மனிதனை பயத்திலும் ஏமாற்றத்திலும் இட்டுச் செல்கின்றன. விழிப்புணர்வும் பகுத்தறிவும் சமூகத்திற்கு அவசியம்” — என்ற நல்ல சமூகச் செய்தியை உங்கள் கவிதை வெளிப்படுத்துகிறது।

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