विश्व हाथ स्वच्छता दिवस
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा भावाभिव्यक्ति
७-५-२०२६
मानव जीवन सभ्य बने,
यह संदेश पुरखों ने दिया।
हाथ-पैर की स्वच्छता पर
सदैव विशेष बल दिया।
बिना चरण कर धोए कभी
घर में प्रवेश अधर्म कहा,
प्रातःकाल स्नान कर मानव
तन-मन का पावन धर्म निभा।
ब्रह्ममुहूर्त जागरण करके
स्वच्छता का मान बढ़ाओ,
मुख-शुद्धि, जिह्वा-निर्मलता से
स्वास्थ्य-सुरक्षा पथ अपनाओ।
आज विश्व भी समझ रहा है
स्वच्छता जीवन का आधार,
रोगों से रक्षा करती है
साफ़-सुथरा आचार-विचार।
हाथ स्वच्छ हों केवल इतना
जीवन का उद्देश्य नहीं,
कर्म भी निर्मल हों मानव के,
भ्रष्टाचार का लेश नहीं।
रिश्वत-मुक्त पवित्र हथेली,
धर्मयुक्त हो हर व्यवहार,
भीतर-बाहर शुद्ध रहेगा
तभी सुखी होगा संसार।
Swami Vivekananda ने भी मानव को
स्वस्थ शरीर का ज्ञान दिया,
भक्ति संग देहाभ्यास का
महत्व सदा पहचान लिया।
भारतीय संस्कृति कहती है —
“बासी भोजन खा लेना,
पर स्नान कर भोजन करना,
धोकर वस्त्र पहन लेना।”
घर-आँगन स्वच्छ रखो तुम,
स्वस्थ रहे जन-जन का जीवन,
इसी हेतु जग में मनाया
स्वच्छता का पावन पर्व।
मुख-कवच धारण कर बोलो,
संयम-संस्कारों को मानो,
जैन मुनियों की जीवन-शैली
से भी उत्तम शिक्षा जानो।
भारतीय आचार-विचारों का
महत्व जगत ने फिर पहचाना,
नव रूपों में विश्व आज
स्वच्छता का दीप जलाना।
मई पाँच को विश्व धरा पर
संदेश यही दोहराया गया —
“स्वच्छ हाथ और निर्मल मन से
मानव जीवन सफल बने।”
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