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Wednesday, May 6, 2026

कर स्वच्छता


विश्व हाथ स्वच्छता दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा भावाभिव्यक्ति

७-५-२०२६

मानव जीवन सभ्य बने,

यह संदेश पुरखों ने दिया।

हाथ-पैर की स्वच्छता पर

सदैव विशेष बल दिया।

बिना चरण कर धोए कभी

घर में प्रवेश अधर्म कहा,

प्रातःकाल स्नान कर मानव

तन-मन का पावन धर्म निभा।

ब्रह्ममुहूर्त जागरण करके

स्वच्छता का मान बढ़ाओ,

मुख-शुद्धि, जिह्वा-निर्मलता से

स्वास्थ्य-सुरक्षा पथ अपनाओ।

आज विश्व भी समझ रहा है

स्वच्छता जीवन का आधार,

रोगों से रक्षा करती है

साफ़-सुथरा आचार-विचार।

हाथ स्वच्छ हों केवल इतना

जीवन का उद्देश्य नहीं,

कर्म भी निर्मल हों मानव के,

भ्रष्टाचार का लेश नहीं।

रिश्वत-मुक्त पवित्र हथेली,

धर्मयुक्त हो हर व्यवहार,

भीतर-बाहर शुद्ध रहेगा

तभी सुखी होगा संसार।

Swami Vivekananda ने भी मानव को

स्वस्थ शरीर का ज्ञान दिया,

भक्ति संग देहाभ्यास का

महत्व सदा पहचान लिया।

भारतीय संस्कृति कहती है —

“बासी भोजन खा लेना,

पर स्नान कर भोजन करना,

धोकर वस्त्र पहन लेना।”

घर-आँगन स्वच्छ रखो तुम,

स्वस्थ रहे जन-जन का जीवन,

इसी हेतु जग में मनाया

स्वच्छता का पावन पर्व।

मुख-कवच धारण कर बोलो,

संयम-संस्कारों को मानो,

जैन मुनियों की जीवन-शैली

से भी उत्तम शिक्षा जानो।

भारतीय आचार-विचारों का

महत्व जगत ने फिर पहचाना,

नव रूपों में विश्व आज

स्वच्छता का दीप जलाना।

मई पाँच को विश्व धरा पर

संदेश यही दोहराया गया —

“स्वच्छ हाथ और निर्मल मन से

मानव जीवन सफल बने।”

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