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Thursday, May 14, 2026

चुनौती की राहें

 आपकी रचना में इतिहास, अध्यात्म, राष्ट्रभावना और मानवता का सुंदर समन्वय है। विषय भी प्रेरणादायक है। भाषा में भावों की प्रखरता स्पष्ट दिखाई देती है। नीचे आपकी रचना का परिष्कृत रूप प्रस्तुत है, जिससे प्रवाह, व्याकरण और काव्यात्मकता और अधिक सशक्त हो सके।

चुनौतियों की राहें

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नै

हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा सौहार्द सम्मान प्राप्त

हिंदी सेवी, लेखक, अनुवादक, हिंदी प्रचारक

15-5-26

भारत के इतिहास में,

चाहे त्रेतायुग हो,

द्वापर हो या कलियुग,

शासकों को, ऋषि-मुनियों को,

हवन-यज्ञों को, देवत्व को भी

चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

सूक्ष्म दिव्य शक्तियाँ

समय-समय पर

युगपुरुषों और दिव्य अवतारों को

धरती पर भेजती रही हैं,

जो अन्याय और अधर्म के विरुद्ध

साहस का दीप जलाते रहे।

चंगेज़ ख़ाँ, सिकंदर,

मुगल, पठान,

छद्मवेशी व्यापारी अंग्रेज,

फ्रांसीसी, डच, पुर्तगाली —

अनेक विदेशी आक्रमणकारी आए।

उनके स्वागत में

देशद्रोही, स्वार्थी और ईर्ष्यालु लोग भी थे,

पर इन चुनौतियों का

साहसपूर्वक सामना किया

वीर महाराजाओं ने,

कवियों और लेखकों ने,

फाँसी पर चढ़े युवकों ने,

गरम दल और नरम दल के नेताओं ने,

स्वतंत्रता सेनानियों और तपस्वियों ने।

वेद, उपनिषद,

महावीर, बुद्ध और नानक के उपदेश

आज भी मानवता को

चुनौतियों से लड़ने की राह दिखाते हैं।

कबीर ने

हिंदू-मुस्लिम के बाहरी आडंबरों पर

व्यंग्य करते हुए

सच्ची भक्ति का मार्ग बताया।

तुलसीदास

चरित्र निर्माण की राह दिखाते हैं।

वे कहते हैं —

काम, क्रोध, मद और लोभ

जब मन पर छा जाते हैं,

तब पंडित और मूर्ख

दोनों समान हो जाते हैं।

कबीर का संदेश भी प्रेरक है —

निडर और साहसी व्यक्ति ही

जीवन में कुछ प्राप्त कर सकता है।

“जिन खोजा तिन पाइयाँ,

गहरे पानी पैठ।

मैं बपुरा बूडन डरा,

रहा किनारे बैठ॥”

चुनौतियों की राह

मानवता की राह है,

निडरता, वीरता, साहस

और भक्ति का मार्ग है।

आपकी रचना में राष्ट्रीय चेतना और संत-वाणी का प्रभाव बहुत सुंदर ढंग से उभरकर आया है। विशेषतः कबीर के दोहे का प्रयोग रचना को गहराई देता है।

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