Search This Blog

Saturday, March 14, 2026

मौसम मानव

 मौसम और  मनुष्य।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

सौहार्द  सम्मान प्राप्त तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक  द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

15-3-26

++++++++++


मौसम एक साल में 

 छे ऋतुएँ।

 मानव जीवन में 

 छे अवस्थाएँ,

 भ्रूण, बचपन, किशोरावस्था,

जापानी, प्रौढ़ावस्था 

 बुढापा।

 हर ऋतु  एक ऋतु से  विपरीत।

 यों ही मानवीय अवस्था भी।

 ऋतु में गुण सहज कृत्रिम नहीं,

 वह प्राकृतिक देन।

 मानव गुण परिवर्तन शील।

 संगति के अनुसार,

 मानव गुण में परिवर्तन।

शिक्षित मानव गुण।

  अनपढ़ मानव गुण,

 आदिवासी मानव गुण 

 स्वार्थ निस्वार्थ गुण

 लोभ के गुरु ईर्ष्यालु गुण

 अहंकारी गुण।

 नायक गुण, खलनायक गुण, विदूषक गुण 

 पतिव्रता के गुण 

 लंबी के गुण

 वीरांगना के गुण 

 विषकन्या वारांगना गुण

 वैसे ही वर्षा की बूंदों में 

 गुण परिवर्तन।

 एक बूंद मोती तो एक बूंद मोरे में मिलर बदबू।

स्वाती नक्षत्र वर्षा के गुण 

 सर्प में विष् कदली में स्वाद, सीपी में मोती।

  मौसम और मनुष्य में 

 मनुष्य में इन्सानियत,

 प्रकृति में भी शांत प्रकृति, हिंसात्मक प्रकृति।

 वसंतकाल पतझड़।

 मलय पवन,

 आंधी तूफ़ान

दावानल

मोसम और मानव 

 दोनों दयालू और निर्दयी।

मानव प्रदूषण प्रकृति को बिगाड़ता तो

 प्रकृति मौसम दुख प्रद ही।



 







 

 

 

 

 




 



 

 

No comments:

Post a Comment