आप के विचार के लिए।
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पैसे
मैं घंटों बैठकर लिखा करता हूँ,
निजी, अनूदित
तमिल हिंदी सिखाना
पर आर्थिक लाभ नहीं।
अब है मेरी उम्र 76.
दुनिया देखी।
जवानी का जोश
आत्मसंतोष के लिए
आत्मानंद के लिए
अर्थ न कमाया।
अब बुढ़ापा है।
मंदिर जाने पर
पैसे हैं तो तुरंत दर्शन।। अस्पताल गया तो
पैसे के बिना चपरासी भी नहीं बोलता।
सेवा मुफ्त,
मानव दिल्लगी का पात्र बनता।
बेचारा भला आदमी।
मेरे तमिल हिंदी संपर्क
75000 दर्शक।
यहाँ प्रकाशक की किताबों का सम्मान।
सौ किताब, एक सभा में प्रकाशन , सम्मिलित।
मेरे चार ब्लाग
2,00,000/ से ज़्यादा दर्शक।
न कोई सम्मान।
न साहित्य अकादमी का ध्यान।
आत्म संतोष से कोई
लाभ ,
बुढ़ापे में अर्थ न तो
जीवन व्यर्थ।
अब पछताने से हो क्या,
जब चिड़िया चुग गई खेत।
आँखें अंधे होने के बाद
सूर्य नमस्कार से क्या लाभ।
हर स्थान में पैसे।
[04/01, 9:48 am] sanantha.50@gmail.com: संस्कारवान।
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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संस्कार का मतलब है
सही आकार देना।
मानसिक शुद्धिकरण।
चरित्र निर्माण,
मानवता का विकास।
भारतीय धर्म बचपन से
स्वास्थ्य, ज्ञान, अहिंसा, त्याग , प्रेम, दान-धर्म,
चरित्र निर्माण , अच्छी चाल-चलन, धर्म मार्ग
सकारात्मक सोच,
इन गुणों से युक्त मनुष्य
संस्कारवान।
ऐसे संस्कारवान व्यक्ति
अति दुर्लभ।
राम के चरित्र में कलंक,
कृष्ण के चरित्र में कलंक।
दधिचि ही महान तपस्वी।
हरिश्चंद्र का आदर्श,
भक्त रैदास, भक्त त्याग राज जैसे संस्कारवान
नहीं जगत में।
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