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Thursday, April 2, 2026

कोष

 खजाने का राज़ 

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

3-4-26.

 खजाने की खोज में 

 जंगलों में भटकने वाले,

सागर में गोता लगाने 

वाले,

 साधु संतों से

 खजाने के राज़

 जानने  भटकने वाले,

 बलवान दुर्बलों से लूटकर खजाना भरने वाले,

 अश्वमेध यज्ञ करके 

 दुर्बल राजाओं के धन से

 खजाना भरनेवाले,

 जन्मकुंडली के आधार पर खजाना मिलने के 

ख्वाब देखनेवाले।

 सरकार की खजाना खाली हैं तो देश अकाल।

 न वेतन, न पेंशन,

न देशोन्नति।

 राजकोष

 मुगलों ने की उर्दू भाषा के प्रभाव से बन गया

 खजाना।

 लोभी  अपने धन को 

 खजाने में गाड़कर रखते।

 लोभी का धन 

 खजाने के रूप में 

 पाते किस्मतवाले।

 

 




 


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