न्याय की जीत
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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई
तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।
7-2-26
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नमस्ते/वणक्कम्।
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न्याय क्या हो?
तटस्थता।
ईमानदारी।
है क्या?
रामायण में।
महाभारत में।
विदेशी यह आक्रमण में
विदेशी शासन में
स्वतंत्रता संग्राम में।
मंदिरों को तोडना
मस्जिद बनानि।
मजहबी लडाइयाँ।
मारकाट
एक मजहब के लिए अलग देश।
फिर धर्म निरपेक्ष राज्य।
अल्पसंख्यकों के मजहब की सहूलियतें।
प्रतिभा अंक उम्र में
उच्च वर्ग पीड़ित।
अल्पसंख्यक,
ब्राह्मण की प्रतिभा
अप्रतिभा।
सर्वत्र धन की महिमा।
शिक्षित अति मेधावी।
वकील अधिकारी
धन के पक्ष में।
शिक्षा मूल्यविन शिक्षित
धन के आधार पर ,न प्रतिभा के आधार पर।
चुनाव जीतने में
न्याय है क्या?
कितने प्रतिभाशाली
दुर्योधन जैसे साथी न
मिलने पर अधोगति।
प्रतिभा को
परंपरागत मानना,
धन मानना
न्याय की जीत नहीं।
शिक्षा के विकास में
निर्मोह जीवन नहीं,
रिश्वत, भ्रष्टाचारी,
अन्यायी की रक्षा,
अपराधी की रक्षा
साथ देने
मतदाता तैयार।
वकील तैयार।
मंत्री विधायक सांसद
अधिकारी वर्ग तैयार।
जन्म प्रमाणित पत्र
अनिवार्य करनै के बाद
रिश्वत के दलाल
पाँच लाख तक।
आदि काल से आज तक
ताकत की जीत।
धन की जीत।
अधर्म की जीत।
एक ओर।
धर्म की जीत एक ओर।
असंतुलित न्याय व्यवस्था में,
संतुलन लाने
प्रकृति का दंड है मृत्यु।
यम धर्मराज का
जान लेना। जान लेना
ईश्वरीय दंड रोग
असाध्य साध्य,
दुर्घटना, व्यापार में
घाटा।
न्याय की जीत में षडयंत्र ईर्ष्या लोभ
स्वार्थता,
ईश्वर ही की तटस्थता
पंचतत्वों के क्रोध
प्यार, कर्मफल
अपना अपना भाग्य
निर्भर।
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