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कलम की खनक।
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एस.अनंतकृष्णन,
चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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8-2-26
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कलम क्या है?
मानव मैं एक उद्वेग,
एक प्रैरणा
एक प्रोत्साहन देनेवाले,
एक चमत्कारिक शक्ति।
नयी क्रांति, नये सुधार
मानव जिज्ञासा जगाने वाली।
कलम की खनक
कलम के सिपाही
सिखाया जहां को
जय जगत।
जय किसान।
जय जवान।
विश्व बंधुत्व की भावना
वसुधैव कुटुंबकम्।
देश भक्ति बढ़ाने
वंदे मातरम।
स्वतंत्रता के जोश लाने
स्वतंत्रता जन्म सिद्ध अधिकार है।
कलम की खनक,
कलम के सिपाही
देश भक्ति बढा रहे हैं।
यथार्थ बातें
आदर्श बातें
आदर्शोंन्मुख यथार्थवाद
ईश्वर और प्रकृति के
वर्णन करके
आशा दिलाने
निराशा भगाने
नारा दिया।
लोकोक्तियाँ दी।
सूक्ष्म ब्रह्म रहस्य
दान धर्म परोपकार
इन्सानियत लाने में
बड़ी क्रांति की।
शाश्वत सत्य दिया।
पशु जैसा मानव
सोचने लगा।
फूल में सुवास,
कस्तूरी हिरण में कस्तूरी
चिकमुकी में आग
वैसे हर मनुष्य में
ब्रह्म रहते हैं।
कर्तव्य करो,
परिणाम भगवान पर छोड़ दो।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।
अहिंसा परमो धर्म।
जिओ और जीने दो।
मन चंगा तो कठौती में गंगा।
वीर एक बार मरता है,
कायर दिन दिन मरता है।
स्वदेश में पूज्यंते राजा,
विद्वान सर्वत्र पूज्यंते ।
कलम की खनक
तन बल धन बल मन बल बुद्धि बल जो भी
तुम में हो,
समाज हित में
देश हित में
विश्व कल्याण में
लगाओ।
सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।
कलम की खनक
अश्लील होकर
समाज बिगाड़ने की
बातों से दूर रहना
संयम रहना
विषय वासनाओं से दूर
रहना ज्ञानचक्षु मानव को परमानंद देगा।
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