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Thursday, September 3, 2026

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

 

आज की चुनौती

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई।
4-9-26

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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

श्रीकृष्ण स्वयं भगवद्गीता में कहते हैं—

जब-जब धर्म की हानि
और अधर्म की वृद्धि होती है,
तब-तब मैं स्वयं अवतार लेता हूँ
सज्जनों की रक्षा
और दुष्टों के विनाश के लिए।

ऐसे लोकरक्षक और लोकरंजक
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

हर वर्ष श्रद्धा और भक्ति के साथ
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन
देशभर में मनाया जाता है।

मामा कंस के कारागार में
वासुदेव और देवकी के
आठवें पुत्र के रूप में
आधी रात को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।

कंस को आकाशवाणी से
यह ज्ञात हो चुका था कि
देवकी का आठवाँ पुत्र
उसके विनाश का कारण बनेगा।

श्रीकृष्ण के जन्म के बाद
उनके पिता वसुदेव
उन्हें गोकुल ले गए
और नंद तथा यशोदा के संरक्षण में
उनका पालन-पोषण हुआ।

यशोदा ने कृष्ण को
अत्यंत प्यार और वात्सल्य से पाला।
नंद बाबा ने भी
उन्हें अपने पुत्र के समान
स्नेह और देखभाल दी।

श्रीकृष्ण के जन्मदिन को
आसेतु हिमाचल
हिंदू समाज श्रद्धा और भक्ति से मनाता है।

घर में श्रीकृष्ण की मूर्ति को
सुंदर ढंग से सजाया जाता है।
घर के द्वार से पूजा-गृह तक
बालकृष्ण के चरणचिह्न बनाए जाते हैं।

घर के छोटे बच्चों को
बालकृष्ण के रूप में सजाया जाता है।

नैवेद्य के रूप में
तमिलनाडु में सीडै बनाया जाता है—
गुड़ से मीठा सीडै
और नमक से नमकीन सीडै।

उड़द दाल आदि से बनाए जाने वाले
छोटे-छोटे स्वादिष्ट पकवान
भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं।

श्रीकृष्ण की प्रिय वस्तु
मक्खन भी नैवेद्य के रूप में
उन्हें अर्पित किया जाता है।

श्रीकृष्ण की मूर्ति को सजाकर
भक्ति-गीत गाए जाते हैं
और उनका नाम स्मरण किया जाता है।

जन्माष्टमी के अगले दिन
तमिलनाडु में उरियडी उत्सव मनाया जाता है,
जिसे हिंदी में प्रायः दही-हांडी उत्सव कहा जाता है।

माखनचोर, गोपाल, गोविंद
और भक्तवत्सल श्रीकृष्ण
केवल एक देवता नहीं,
बल्कि धर्म, प्रेम, करुणा,
नीति और लोककल्याण के
प्रेरणास्रोत हैं।

लोकरक्षक, लोकरंजक और भक्तवत्सल
भगवान श्रीकृष्ण को
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर
शत-शत नमन!

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