आज की चुनौती : समय का मुसाफिर
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
2-11-2026
समय तो निरंतर चलता रहता है।
जो समय की परवाह नहीं करता,
समय भी उसकी परवाह नहीं करता।
कबीर ने कहा है—
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
समय बीत जाने के बाद
पछताने से क्या लाभ?
तब तो भगवान भी
बीते हुए समय को लौटा नहीं सकता।
समय की गति निराली है।
बैठे-बैठे भविष्य की कल्पना करें,
तो कल्पनाओं में भविष्य
तेजी से सामने आ जाता है।
भूतकाल की स्मृतियों में जाएँ,
तो बीते हुए वर्षों की यात्रा
पलभर में पूरी हो जाती है।
हम सभी समय के मुसाफिर हैं।
शैशव की यात्रा,
बचपन की यात्रा,
युवावस्था की यात्रा,
प्रौढ़ावस्था की यात्रा
और अंत में वृद्धावस्था की यात्रा।
जीवन की यह यात्रा
समय के साथ निरंतर चलती रहती है।
अतः हम समय के मुसाफिर हैं।
समय अनमोल है।
इसका सदुपयोग करें।
बीते समय पर पछताने के बजाय
वर्तमान को सार्थक बनाएँ।
यही जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है।
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