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Wednesday, April 27, 2016

काम भाग --हृदय का संकेत -- तिरुक्कुरळ --१०९१ से ११००

  काम भाग- -हृदय का संकेत-तिरुक्कुरळ- १०९१ से ११०० 

१. प्रेमिका  की  दृष्टियों  में   दो तरह  के  संकेत  है    १.प्रेम रोग  उत्पन्न करना २. प्रेम रोग. की दवा  .


२. प्रेमिका  की अध- खुली आँखों  की दृष्टी     पूर्ण  दृष्टी  से बहुत. बडी  है.

३. लज्जाशील आँखों  की अधखुली दृष्टी  मुझ. पर  पडी  तो  तो वही मेरे प्यार बढने की सिंचाई  हो  गई.

४. जब. मैं जमीन. को  देखता हूँ तब मुझे  देखना , जब. उसे मैं देखता  हूँ ,तब लज्जा  से मुँह. मोड लेना 

उसको मेरे प्रति के प्यार. के  संकेत ही है न ?

५ . उसकी मजर. मुझपर  सीधे नहीं  पडी, आँखें सिकुडकर मुझे  देखकर. खुश. होना  प्रेम के संकेत. ही है. 

६. प्रेम छिपाकर  बाहर  अनयें  के  समान. कठोर. बातें बोलने   पर. भी उस  के मन का आंतरिक. 
प्रेम चंद. दिनों में प्रकट  होगा  ही.

७. सच्चे  प्रेम. के  संकेत है , कठोर शब्द प्रकट,पर दुश्मनी अप्रकट ,दृष्टी परायों  जैसे , परायों का सा व्यवहार आदि. 

८. वह बोलती तो परायों  से बोलने  के  समान पर  जब देखती हूँ  तो मंदहास करती  है,यह. एक प्रेम का  संकेत है. 

९. प्रेमियों का एक विशेष गुण  है  कि सार्वजनिक स्थानों  में उनका व्यवहार. आपस. में  अन्यों  के  समान लगेगा. 

१०. प्रेम की नजरों  से आँखो से आँखें मिलने  पर बोलने की जरूरत नहीं पडती. 

सुंदरता का बर्छा -- अर्थ भाग - तिरुक्कुरळ-१०८१ से १०९०

  सुंदरता का  बरछा - अर्थ भाग- तिरुक्कुरळ -१०८० से १०९०.

१.
मेरे मन मोहक महिला! तू देवी है; तू  मोर है! मुझे सताने और तपानेवाली है.

२.
मेरी  आँखों   से जब सुंदर महिला  की आँखें आमने -सामने  मिलती  है तब ऐसा  लगता  है 'एक शूल का आक्रमण ही नहीं , एक. बडी  सेना  का आक्रमण हो.

३. यम भगवान. के  बारे  में मैंने  ग्रंथों में ही पढा  है. प्रतयक्ष नहीं देखा  है. अब जान गया  कि महिला की आँखों  की बरछी ही यम भगवान. है.

४. नारीत्व के  कोमल गुणों के विपरीत है चुभनेवाली  नारी की आँखें.

५. नारी कीआँखें  तीन. सवाल उठाती  है : १. क्या वह यम है ? २. क्या  वह दलारने का नाता  है ? क्या वह कातर दृष्टियों से  देखनेवाली हरिणी है?

६. नारी टेढी  भौंहें  सीधी  हो जाएँगी तो मुझे कँपानेवाला भय न. लगेगा.

७.   नारी  के कुचों  के ढके रेशमी   वस्त्र   मदमस्त हाथी के आँख पटी  के समान. है.

८. बढी बडी   सेना  के सामने भी न झुके मेरे बलवान  शरीर  नारी के नयनों के आगे विनम्र  हो जाता  है.

९. कातर नयनों की नारी और  लज्जा शील  नारी  को  इनके सिवा और. कोई आभूषण की  जरूरत नहीं  है.

१०.  मद्यपान करने  से  ही  नशा चढती  है' , लेकिन. नारी  को  देखते  ही नशा  चढ जाती  है.



'अधमता -अर्थभाग - तिरुक्कुरळ-१०७१ से१०८०

अधमता -तिरुक्कुरळ -१०७१ से १०८०अर्थ भाग - गृह शास्त्र

१.
अधम भी अच्छेआदमी -सा लगेगा; ऐसी समानता  केवल मनुष्य जाति में ही  है.

२.
समाज  के कल्याण चाहक हमेशा दुखी रहेंगे; अधमों को किसी प्रकार की चिंता नहीं;  वे मान -अपमानकी  परवाह. नहीं   करेंगे.   अधम एक तरह. से भाग्यवान. होते  हैं.

३. अधम देवों के जैसे मनमाना करने  से देव और अधमों को एक समान मान सकते  हैं.

४. नीच लोग अपने से नीचों को देखकर अपने को बडे मानकर घमंडी बन जाएँगे.

५. अधम लोग कुछ. पाने के लिए. अपने को शिष्ट दिखाएँगे; कार्य होने  के  बाद अपनी अधमता प्रकट कर देंगे !

६. गोपनीय बात को अधम लोग दूसरों से कह. देंगे; अत:उनको  ढोल मानना ठीक. ही  है .

७. अधम लोग उन्हींको  देंगे जो उसके  गाल. पर. थप्पड मारते  हैं. वे  बढे कंजूसी होते  हैं.

८. महान लोगों  से माँगते ही हमारी  माँग. पूरी  होगी.  अधम लोगों से ईख की  तरह  कसकर ही कुछ  पा  सकते  है..

९. अधम लोग दूसरों के भोजन और. पोषाक देखकर  जलकर उन पर आरोप लगाएँगे.

१०.  अधम अपने  लाभ और. नष्ट के लिए  दूसरों का गुलाम बनेंगे.  और किसी धंधे  के  लायक नहीं  है. 

Tuesday, April 26, 2016

भीख माँगना अच्छा नही -१०६१ से १०७०



१. उदार,दयालु और. दानियों  से  भी  भीख न  माँगना करोडों गुणाश्रेष्ठ गुण है.

२.सृजनकर्ता  भीख माँगने  की हालत. में पैदा किया  है तो वह भी भिखमँगों की तरह  भटकता रहें.

३. भीख  माँगकर  जीने  की स्थिति  के  समान अत्याचार. या क्रूरता और कोई  नहीं  है.

४. गरीबी  की हालत में भी दूसरों से न माँगकर जीने  के श्रेष्ठ. गुण  के समान  संसार में और कोई गुण नहीं  है.

५. रूखी सूखी रोटी भी अंपने परिश्रम से जीना ही सुखप्रद और. संतोषप्रद है,

६. गाय के प्यास बुझाने  पानी की माँग. करना  भी  अपमान और हीनता है.

७. जो  भीख देने तैयार नहीं है, कवि माँगनेवालों  से निवेदन करते हैं  कि उनसे भीख न माँगें.



जिसका दिल दयालू  नहीं  है ,पाषाण -सा  कठोर है, उनसे भीख  माँगने  पर असुरक्षित भिखारी  का  नाव. टूट. जाएगी.

९. भीख माँगनेवालों  को देखकर दिल पिघलेगा;जो  सब कुछ  होने पर भी  नहीं देता उनको देखकर दिल टूट जाएगा.

१०. .भीख. माँगकर न देने पर भिखारी की जान चली जाती है.  रखकर भी जो  नहीं  देता, उसकी जान कहाँ छिप जाती  है.

भीख --अर्थ भाग-१०५१ से १०६० तक - तिरुक्कुरल

भीख -अर्थ भाग -तिरुक्कुरळ -१०५१ से १०६०

१. जिसके  पास सब कुछ है,  उससे   कोई माँगकर.

 वह इनकार  करें  तो  उसका  पाप  न देनेवाले को  ही

लगेगा ; माँगने वाले  को नहीं.

२. भीख माँगने  पर. कोई. चीज. आसान  से मिल जाएगी  तो   भीख  माँगना   भी  सुख ही  है.

३. खुले  दिलवाले  और   कर्तव्यपरायण लोगों  से  भीख माँगना  भी  सुंदर. ही  है.

४. खुले दिलवालों  से  भीख माँगना भी  भीख देने की विशेषता  रखता है.

५. अपने  पास  जो कुछ है ,उसे बिना  छिपाये उदारता से देनेवालों के कारण ही  भीख माँगने का धंधा चलता  है.

६. उदार अमीरों को जो खुलकर दान देता  है ,उसको   देखने मात्र से  ही गरीबी का दयनीय दुख दूर हो जाएगा.

७. हँसी न उडानेवाले और अपमानित. न. करनेवाले  दानियों  को  देखकर  भीख माँगनेवालों का मन अधिक खुश होगा.

८. गरीबी  के कारण  माँगनेवालों  को  जो  पास आने  नहीं  देता, उसका और कठपुतली का  कोई भेद नहीं है.

९. माँगनेवाला ही नहीं  है  तो  देनेवाले का नाम नहीं होगा.

१०. भीख माँगनेवाले   को  नाराज न  होना    चाहिए.  वह  खुद  गरीबी का अनुभव करने से

दूसरों की गरीबी देखने  से नाराज  नहीं  होगा.


गरीबी--अर्थ भाग - तिरुक्कुरल- १०१०४२ से १०५०

गरीबी --अर्थ भाग -तिरुक्कुरळ -१०४१ से १०५०

१. कोई. पूछें  कि  गरीबी सम  दुखप्रद क्या है ?   जवाब यही है  कि गरीबी सम दुखदायक गरीबी ही  है.

२. पापी दरिद्र का संताप वर्तमान और भविष्य में भी कष्टदायक. है. गरीबी को कभी संतोष नहीं होगा.गरीबी को इहलोक. में भी सुख नहीं, परलोक में भी सुख नहीं  मिलेगा.

३. कोई गरीबी  में  लालची  होगा  तो वह अपमान का  पात्र बनेगा. उसका और उसके खानदान का यश  भी  धूल में मिल जाएगा.

४. गरीबी उच्च कुल में जन्मे व्यक्ति के मुख से भी अपशब्द अभिव्यक्त करने   का विवश कर देगा.

५. गरीबी के आने  पर  कई प्रकार के दुख  उगने लगेंगे.


६. सदुपदेश और सुवचन  गरीब सुनाएगा  तो कोई नहीं सुनेगा. वे  लाभप्रद नहीं होंगे.

७. जो गरीबी  के  कारण  अपना धर्म पथ छोड. देता  है ,उसको उसकी माँ  भी  नहीं चाहेगी.

८.
गरीब यही  चाहेगा   और.  तरसेगा कि हत्यारे जैसे की गरीबी    मिट. जाना  चाहिए.

९. एक मनुष्य आग की  गर्मी  सहकर  सो  सकता  है, पर. गरीबी अग्नी सहकर    सोना  संभव  है.

१०.  बगैर खाद्य  सामग्री  के जीनेवालों की गरीबी सहकर जीनेवालों अपने को तजकर जीनेवालों से भोजन का बरबाद  ही  होगा ; उनका जीना धरती का बेकार बोझ. है.


तिरुक्कुरल --१०३१ से१०४० तक -खेती -अर्थ भाग

खेती -अर्थ भाग - तिरुक्कुरल -१०३१से१०४०  तक

१.  संसार के पेशों में प्रधान खेतीबारी  है. कई पेशों के दौरान  फिर घूम. फिरकर एक पेशे पर ध्यान  आता  है  तो वह. है खेती.

२. कई प्रकार के धंधे करनेवालों की भूख मिटाने का पेशा खेती करना  है;  अत:खेती   ही  सर्व श्रेष्ठ धंधा है.वही संसार का भार ढोने  का धुरी  है.

३. खेती  करके जीनेवाले  ही  श्रेष्ठ. जीवन जीनेवाला है:     बाकी धंधे  करनेवाले किसानों  की प्रार्थना  करके जीनेवाले हैं.

४.
कई. राज शासन   के  छत्र-छाया  को  अपने   शासन. के  छत्र-छाया के  अधीन  लाने की  शक्ति   क़िसानों    में   है.


५.
५. खुद खेती  करके खानेवाले  आत्म निर्भर हैं;  वे   खुद. खाएँगे  और बिना छिपाये  दूसरों  को खिलाने  में समर्थ होंगे.

६. सभी  इच्छाओं को  तजकर  तपस्या करनेवाले तपस्वी भी खेती नहीं छोड सकता'

७.  लगभग  पैंतीस ग्राम की मिट्टी  को ८.७५ ग्राम सखी मिट्टी बनाएँगे तो बगैर खाद के अनाज  उत्पन्न होंगे.

८.खेत जोतने  से  बढिया  काम. है   खाद देना, सिंचाई करना और निराना.

९. किसान को   हर. दिन अपने खेत देखने जाना  है, नहीं तो उसकी पत्नी  जैसे  खेत रूठेगा.

१०. धन नहीं है कहनेवाले  आलसी  रंक को देखकर खेत  हँसेगा.अर्थात खेती करने  पर कोई  भी  गरीब नहीं है.