आज की चुनौती
अहिंसा
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
7-9-26
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हिंसा के बिना
जीना मुश्किल है,
प्रकृति में भी
हिंसा दिखाई देती है।
माँसाहारी जीव,
शाकाहारी जीव,
सर्वाहारी जीव—
ईश्वर की सृष्टि में
सबका अपना जीवन है।
फिर मनुष्य के लिए
प्रश्न उठता है—
बिना हिंसा के
जीना कैसे?
“अहिंसा परमो धर्मः”
का पालन कैसे हो?
मनुष्य ही
विवेक और बुद्धि से
अहिंसा का मार्ग चुन सकता है।
दूसरे जीवों को
अनावश्यक न मारना,
मन में
बुरे विचारों को
स्थान न देना,
धन से
अधर्म का कार्य न करना—
यही तो है
सच्ची अहिंसा।
महात्मा गांधी ने
सत्याग्रह के माध्यम से
अंग्रेज़ी शासन का
अहिंसात्मक विरोध किया।
जैन धर्म ने
अहिंसा को
जीवन का महान सिद्धांत माना,
बौद्ध धर्म ने भी
करुणा और अहिंसा का
संदेश दिया।
हाथ में हथियार न होना ही
अहिंसा नहीं—
हाथ, वचन और मन से
किसी को पीड़ा न देना
ही सच्ची अहिंसा है।
हिंसा से
जीत मिल सकती है,
पर हृदय नहीं।
अहिंसा से
मनुष्य मनुष्य को जीत सकते हैं।।
प्यार से संसार को जीत सकते हैं।
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