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Sunday, April 5, 2026

जलीय जीवों की रक्षा

 जलीय जीवों की रक्षा।

 एस. अनंतकृष्णन, चैन्नै

 6-4-26

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नमस्ते।

जल प्रधान है,

 सभी जीव राशियों के लिए।

जल बिना न वनस्पति जगत।

 जल बिना न कोई जीव।

 ईश्वर की अद्भुत सृष्टि में 

 अंडे, पिंडज, स्वेज, उद्भिज्ज।

 इन में जल में उत्पन्न होकर जल में जीनेवाले जीव,

 जल -थल में जीनेवाले जल में ही जीनेवाले 

 इन  जलीय जीवन की रक्षा के प्रश्न क्यों?

जल प्रदूषण क्यों ?

 कारखानों के विषैले पानी को नदी में,

 समुद्र में छोड़ना।

 झीलों को नगर विस्तार 

 नगरीकरण के नाम नदारद करना।

 स्वार्थ मानव अपने लाभ के लिए अधिक

 जलीय जंतुओं को आहार के लिए,

 दवा के लिए 

पकड़कर नष्ट करना।

 तालाबों में विदेशी जंतुओं को छोड़ना,

 भारतीय पवित्र नदियों में 

 अब प्रदूषण अधिक।

 इस स्थिति में 

 जनता को जागृत करने कराने 

 जलीय जंतुओं की रक्षा करने में लगाना है।

 मछलियाँ और जलीय जंतुओं को पकड़ने में 

 नियंत्रण।

 जहाज़ द्वारा आनेवाले विदेशी जंतुओं से बचाना।

जलाशयों को निर्मल रखना,

 समुद्र और जलाशयों के पास  मछली घर की स्थापना करना।

 कानूनी कार्रवाई लेना।

कठोर कानून बनाना आदि।

 




 

 


 


 

 

 

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