वचन की कीमत।
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
4-4-26
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प्राण जाए पर वचन न जाए,
यह मुहावरा मानव जीवन के अनुशासन और न्यायप्रियता के लिए
अनुकरणीय हैं।
मानव मानव पर
भरोसा रखने
वचन का पालन
अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय इतिहास में
वचन निभाने की कहानियाँ मानव के
आदर्श चरित्र का उदाहरण है।
आजकल के सांसद ,
विधायाक बदनामी
इसलिए है कि वे वचन
निभाते नहीं,
हर चुनाव में वही
वचन देते रहते हैं।
धन के आधार पर
जय पराजय,
तीस प्रतिशत अविश्वसनीय मत दाता
वोट ही नहीं देते।
30% विपक्षी।
10% गठन बंधन वोट।
हिंदी में मतदाता मत देने विश्वास नहीं,
मत का भिन्नार्थ
सार्थक है।
मत देना मत
ये वादा निभाते नहीं,
ऐसे विचार
हर एक के मन में,
30% अल्पमत के शासन।
कच्ची सड़कें,
पानी की तंगी
हर चुनाव में दूर करने का वादा।
चुनाव आयोग करोड़ों के भ्रष्टाचार धन खर्च
रोकने असमर्थ।
वचन निभाने अधिकारी ,प्रशासक,
जनकल्याण योजना को
लागू करने बाधक हैं।
हुमायूं ने राखी बाँधकर
राजपूत रानी को सुरक्षा की वादा की, निभाया।
उनका नाम आज भी आदरणीय है।
चंद्रधरशर्मा गुलेरी की कहानी एक ही
लोकप्रसिद्ध है
उसने कहा था,
उसमें नायक अपने लड़कपन की प्रेमिका के
पति की जान बचाने
अपनी वादा निभाने
प्राण दिये,
वह सैनिक लहना सिंह का पात्रा मृत्यु शय्या पर उसके स्मरण चित्र पाठकों के मन में चिर स्मरणीय।
अतः वचन की कीमत
अमूल्य है,
कर्ण ने वचन निभाने
कुंती का समर्थन किया।
अतः मानवता निभाने
वचन निभाना
चरित्र बल के लक्षण हैं।
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