Search This Blog

Sunday, April 12, 2026

प्रदूषण का विष

 प्रदूषण का विष

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

13-4-26

++++++++++++++

प्रदूषण आजकल 

 स्वार्थमय प्रदूषण,

चित्रपट , संगणिक, मुखपुस्तिका,  यूट्यूब 

 सब में जितेंद्रयता कम होने, असंयमी बनने बनाने  विचारों का प्रदूषण।

 भ्रष्टाचार, रिश्वत का प्रदूषण,

शिक्षा की महँगाई,

 शिक्षित वकील, सी.ए,

 सैकड़ों करोड़ खर्च करके चुनाव जीतने वाले 

 सांसद, विधायक, मंत्री 

‌यह अनुशासन हीन प्रदूषण,

 नष्ट कर रहा है मानव चरित्र  को,

परिणाम स्वरूप 

 कृषी प्रधान भारत को

 विदेशियों के कारखानों को अनुमति देकर

 वायु प्रदूषन, जल प्रदूषण, भूमि तल प्रदूषण,

 हजारों झील अब नदारद,

 गगन चुंबी इमारतें,

 भूतल जल का शोषण,

 भूतल में पानी का कम होना, 

 जंगलों का नाश,

 भूमि का उष्णमय बनना,

 आजकल के प्रदूषण 

 मानव मन की स्वार्थता और  बाह्याडंबर मय जीवन के कारण,

  सहनशीलता का अभाव,

 दांपत्य जीवन में 

 अशांति,

अवैध संबंध,

 प्रदूषण जल वायु, भूमि आकाश में मात्र नहीं 

 विचारों के प्रदूषण के कारण,

 मानव चरित्र में भी अहंकार, काम क्रोध लोभ,

 मजहबी लडाइयाँ,

 मानवता की कमी,

 प्रदूषण प्रदूषण,

 न्यायालय में,

 पुलिस विभाग में 

 शिक्षालयों में

 सरकारी दफ्तरों में,

 प्रदूषण ही प्रदूषण ।


 



 

No comments:

Post a Comment