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Tuesday, April 14, 2026

पारखी नजरें

 पालकी नजरें

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।


 जौहरी जाने हीरे की परख।

कबीर ने कहा है


हीरा पड़ा बाज़ार में, रहा छार लपटाय।

बहुतक मूरख चलि गए, पारख लिया उठाय॥ 

 वैसे ही पार्टी नजरें 

 असली नकली के

 पता लगाने 

की क्षमता 

  रखती है।

  योग्य पारखी वैद्य

‌आँखें, जीभ, नाखून नाड़ी देखकर 

 रोगी के लोग का पता लगाने में समर्थ होते हैं।

 पारखी नजरों के ज्योतिषाचार्य 

 भविष्य का सही बताते हैं।

  बड़े बुद्धिजीवी 

 अपने कंपनी के लिए 

 योग्य नौकर चुनने की योग्यता रखते हैं।

 हर क्षेत्र में पारखी नजरों वाले होते हैं।

 अनुभवी थानेदार,

 चोरों और झूठों को 

  पता लगाने की पारखी होते हैं।

 सोने की असली नकली मिलावट जानने में 

 कसौटी में कसकर सुनार की पारखी नजरें 

 निपुण होती हैं।

 गुरु की पारखी नजरें 

 प्रतिभाशाली,  औसत, मंद बुद्धि छात्रों को

 अलग अलग कर देता है।

 पारखी नजरें न तो कुआँ 

खोदने पानी की जगह का पता नहीं लगता।

आजकल  नैदानिक परीक्षण , रोगों के निदान,

 यंत्र मय होगया हैं।

 वाहन की जाँच की पारखी नजरें 

 इंजन की आवाज़ से ही

  पता लगा लेती हैं कि 

 वाहन की गड़बड़ी क्या है।

 पारखी नजरें न तो

 सही गलत के पता लगाना मुश्किल।

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