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Friday, April 17, 2026

खामोशी

 खामोशी

एस.अनंतकृष्णन,

 चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

18-4-2026.

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खामोशी,

 सनातन धर्म का, 

 ज्ञानार्जन का

 सोचने विचारने का

 उचित वातावरण

 खामोशी।

चुपचाप रहना,

 अति मुश्किल।

 ईश्वरीय दर्शन के लिए,

 मानसिक शांति के लिए 

 सांसारिक उथल-पुथल से

शोरगुल से बचने 

 बड़े बड़े राजकुमार,

 महाराजा

‌अपने राजसुखों को 

तजकर 

 विश्व कल्याण के लिए 

 जंगल में जाकर 

 खामोशी से तपस्या करते थे,

आत्मज्ञान पाकर,

 सदुपदेशों के

 वेद, उपनिषद, 

 जातक कथाएँ

 नैतिक ग्रंथ लिखा करते थे।

सत्य अहिंसा शांति का

 प्रचार करते थै।

वैज्ञानिक आविष्कार,

दुर्लभ रोग नैदानिक  यंत्र 

 असाध्य रोग निवारण की इसदवाएँ,

   मूक साधना के आविष्कार।

 खामोशी  के कारण 

 अंतरराष्ट्रीय  अहिंसा,

 मानसिक परेशानियांँ

 युद्ध रहित  वातावरण,

विश्व बंधुत्व बढ़ जाता है।

 जाति, मजहब संप्रदाय के भेद भाव मिट जाता है।

मानवता  बनाए रखने 

 ख़ामोश /शांति 

शांति मंत्र है।

 

 आदर्श गुण 

 आत्म चिंतन 

 आत्मविचार 

 अपने आपको 

 पहचानना,

आत्म संशोधन करना

 गुण दोष  जानना

 आत्मज्ञान  प्राप्त हारना

 खोमोशी/चुपचाप।

 अति शक्तिशाली मंत्र शब्द है।

 भारत की स्वतंत्रता संग्राम के अगुआ,

 राजनैतिक गुरु 

 बाल गंगाधर तिलक ने

 अपने कठोर यह कारावास के समय 

 गीता रहस्य की रचना की। 

 पुस्तकालय और 

 ज्ञानालय में 

 अध्ययन के लिए

 ख़ामोश वातावरण 

 के नियम है।

 ध्यान मंडप में ख़ामोश। 

मानव को सुधारने

 एकाग्रता के लिए 

 शांतिपूर्ण   तरीके 

 खामोशी।

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