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Thursday, April 23, 2026

सोने के सिक्के

 नमस्ते वणक्कम्

सोने के सिक्के

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

२४-०४-२०२६

सोना चमकीला,

बहुमूल्य धातु,

देश की संपत्ति,

समृद्धि का प्रतीक।

भारत में कभी राजा,

कवियों को,

कुशल कलाकारों को,

स्वर्ण मुद्राएँ दान में देते थे—

सम्मान का उज्ज्वल रूप।

वे स्वर्ण सिक्के

केवल धातु नहीं थे,

परिश्रम और प्रतिभा के

जीवंत प्रमाण थे।

समय बदला—

स्वर्ण से ताम्र,

ताम्र से कागज़,

और अब अंक बन गए मूल्य।

२४ कैरेट, २२ कैरेट,

१८ कैरेट के भेद,

पर शुद्धता के नाम पर

कितने भिन्न-भिन्न खेद!

एक बैंक का मूल्य,

दूसरे में कम क्यों?

एक दुकानदार का माप,

दूसरे से अलग क्यों?

मिलावट के भय से

ग्राहक ठगे जाते हैं,

विश्वास के सिक्के

धीरे-धीरे घिसते जाते हैं।

जब सिक्के में घिसाई नहीं,

तो मूल्य में कटौती क्यों?

ग्राम-ग्राम में अंतर क्यों,

यह असमानता क्यों?

सोने का दाम

आसमान छूता जाता है,

पर वही सिक्का

ऋण का आधार नहीं बन पाता है।

अंत में प्रश्न यही—

क्या केवल सोना ही मूल्यवान है?

या ईमानदारी का सिक्का

उससे भी अधिक महान है।

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