शिक्षित बालिका
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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शिक्षित बालिका
एस. अनंतकृष्णन
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शिक्षित बालिका होती जहाँ,
वहाँ उज्ज्वल हर एक कुल होता।
ज्ञान की ज्योति जलाकर वह,
घर-आँगन भी गुरु-सा होता।
माता, सखी, सलाहकार बन,
सद्गुण का संचार करती,
भारतीय संस्कृति की रक्षक,
संस्कारों का विस्तार करती।
आधुनिक युग की नारी भी,
स्वावलंबन अपनाती है,
घर और बाहर दोनों संभाल,
नई दिशा दिखलाती है।
गृहिणी बनकर स्नेह लुटाए,
ममता से संसार सजाए,
पति-संतान संग परिवार को,
प्रेम-धागों में बाँध निभाए।
शिक्षा से उसका आत्मविश्वास,
दिन-प्रतिदिन सुदृढ़ होता,
समाज सुधार की राह पकड़,
अंधविश्वासों को भी धोता।
दहेज जैसी कुरीतियों पर,
जब नारी आवाज उठाती,
शिक्षित होकर स्वाभिमान से,
नई व्यवस्था वह बनवाती।
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