प्रकृति के अनेक रंग।
एस. अनंत कृष्णन चेन्नई
5/3/26
प्रकृति के विविध गुण
सब कुछ जानना समझना,
मानव बुद्धि से असंभव।।
सफेद रंग की चमेली,
मनमोहक सुगंध
गुलाब की खुशबू
ऐसे भी सुंदर फूल
गंध हीन।
ऐसे भी फूल बड़े रंगीले
पर बदबू से भरा।
प्रकृति के गगन रंग
नीले काले उजाले।
सूर्योदय सूर्यास्त के समय लाल पीले।
इंद्रधनुष के साथ रंग।
पानी समुद्र का खारा।
वहीं पानी भाप बनकर
काले बादल बिजली चमक वज्र ध्वनि
बरसने पर मीठा।
विभिन्न भाषाओं के
भिन्न-भिन्न लिपियाँ।
क्रोटन्स के रंग-बिरंगे पत्ते।
हर एक पेड़ पौधों के
पत्ते देख किसी कवि ने लिखा है,
कैंची नहीं ईश्वर के हाथ में, कटि पत्तियाँ न्यारी।
एक ही माँ बाप के बच्चे,
सुंदर ,भद्दा काला गोरा, लंबा नाटा।
मधुर स्वर कठोर स्वर।
चतुर, चालाक, ठग
ईमानदारी,
रामावतार के नील रंग,
कृष्णावतार के श्याम रंग।
प्रकृति की सृष्टि में
रंग-बिरंगे, विभिन्न स्वभाव के जानवर,
पालतू जानवर,
जंगली जानवर।
हाथी ,ऊँट, हिरन
हिरन के भेद,
सींगवाला,
हिंदी वाला
हर एक सृष्टि में
अति विचित्रता।
खून का लाल रंग
पर उसमें भेद वर्गीकरण।
सोचते सोचते
प्रकृति के रंग गुण
ईश्वर की सृष्टि अति सूक्ष्म।
नवरत्नों के रंग।
सोना, चाँदी,
प्लाटिनम् के रंग।
अति अनुपप
अति अपूर्व।
अति अनूठा।
प्रकृति के रंग असंख्य।
गुण में अति विविधता।
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