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Wednesday, April 8, 2026

शहीद मंगल पांडे

 शहीद मंगल पांडे।

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

9-4-2026

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नवयुवकों! 

आज़ाद देश में 

 आनंद से,

 मूल अधिकार पाकर

भ्रष्टाचार रिश्वत भरे

सांसद विधायक चुननेवाले 

 अल्पसंख्यक शासक

के समर्थकों।

 मत देनै लेने

 रिश्वत देने लेनेवाले 

 अपराधी मतदाताओं!

सुनो!

 देश की आज़ादी 

आसानी से न मिली।

तन,मन,धन, प्राण तजे,

कठोर कारवास के दंड भोगे,

 लाठी के मार रहे,

फाँसी पर चढ़े

 महान देश भक्त 

 त्यागियों के

 रक्त है की धारा  में 

पनपी ,

स्वतंत्रता का होम यज्ञ।

 उनमें पहली स्वतंत्र की

 आवाज़ उठाकर 

 अंग्रेज़ी अफ़सर को

 मारकर सिपाही क्रांति है के अगुआ थै 

शहीद मंगल पांडे।

अंग्रेज़ों ने  बंदूक  में 

 भरने गाय और स्वर की

 चर्बी लगाने

 सनातन धर्म और मुगल मजहब के विरुद्ध आदेश दिया।

अपने धर्म विरुद्ध कार्य करने  मंगल पांडे

 तीस वर्ष का नवजवान 

तैयार नहीं थे।

 वे अंग्रेज़ी सेना के

 सिपाही होने के 

बावजूद भी,

इस कार्रवाई के

विरूद्ध पहली आवाज़ उठाई।

 अंग्रेज़ी सैनिक अधिकारियों को मारा।

 देश और धर्माभिमानी

 मंगल पांडे के कारण 

 सिपाही कलह प्रारंभ हुआ।

मंगल पांडे को फाँसी की सजा मिली।

 तीस साल की उम्र 

 देश और धर्म के स्वाभिमान के लिए 

 साहस के कदम उठाए 

वीर त्यागी मंगल पांडे को

‌अंतःदिल से सादर प्रणाम।

 सिपाही कलह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में के लिए एक चिंगारी बनी।

 मंगल पांडे का त्याग 

 चिर स्मरणीय है,

चिर अनुकरणीय है।

 ऐसे त्यागियों के मार्ग 

 अपनाना देश की आज़ादी, एकता,

 राष्ट्रीयता बनाए रखने 

 अत्यंत आवश्यक हैं।

 आजकल के भोगैश्वर्य 

 भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी 

 देश के लिए कलंक।

 उन भोगियों का अनुसरण न करके 

‌मंगलपांडे, सुखदेव, राजगुरु, खुदीराम बोस

 वांचीनाथन आदि

 त्यागियों के अनुसरण ही

 देश कल्याण का सर्वोच्च मार्ग हैं।

 जय शहीद मंगल पांडे,

 जिनके कारण सुप्त भारतीय जाग उठे,

 विदेशियों को सिर दर्द बना।

 आज़ादी देकर भागना पड़ा।


 



 


 

 

 


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