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Tuesday, February 27, 2018

शब्द शक्ति


शब्द शक्ति का अपना महत्त्व ,
अश्वत्थामा जोर ,
कुंजरः धीमी ,
महा भारत में द्रोण की मुक्ति.
संकेत में शक्ति अपनी ,
जांघ मार के संकेत ,
दुर्योधन की मृत्यु.
आँखें मारी सुन्दरी ,
युवक बना पागल,
संकेत की अपनी शक्ति ,
काले बादल छाना ,
मोर का नाच ,
मोरनी का वश .
नाद में हिरन ,
संपेरे के बीन में नाग,
शब्द बेदी बाण का
दशरथ का शाप.
शब्द श्लेष में
पानी न तो न जीवन .
नर का ,नारी का, पद का ,
पेड़ पौधों का ,मोटी की चमक का.
शब्द शक्ति का महत्व वर्णनातीत .
स्वरचित --अनंत कृष्णन

हरे कृष्ण

कन्हैया !तेरे गुण यशोगान
कैसे गाऊँ .
नाम स्मरण ही पर्याप्त
नारायण का प्यार प्राप्त .
हरे राम हरे राम , हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कुष्ण कृष्ण हरे हरे.
मुख में अग जग , माक्खन की चोरी ,
माँ से ठगने की बोली ,
दुष्टों का संसार ,
भक्तों का सन्देश ,
"सत्य बोल ,कर्तव्य कर ,
फल मेरे वश."
मानता नहीं कोई ,
करता मनमाना.
उठाता कष्ट तेरे मन जो माना .
हरे राम ! हरे कृष्ण ! हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ! हरे हरे .

हास्य

हास्य है तो
जीवन सदा आनंद है,
हास्य है तो मन में
स्वच्छ विचार है,
हास्य है तो तन मन में बल है,
ऐसी हँसी दुखप्रद है,
जिसमें व्यंग्य हो,
जलन हो, पीडा हो.
क्रोध और बदला का भाव उठे.
स्वस्थ हँसी चाहिए
जिससे सब के दुख नदारद हो.
घमंड की हँसी,
नाश की ओर.
हास्य रस ऐसा हो
जिससे हास्य ही प्रधान हो,
जिससे केवल हँसी नहीं,
दर्शन का भी स्थान हो.
स्वरचित अनंतकृष्णन द्वारा

Thursday, February 22, 2018

क्या होगा मानव हाल

नींद नहीं आ रही है,
नाते -रिश्ते की गलतफहमियाँ ,
ईर्ष्या , बदला ,घृणा ,
खुद नाश होनेवाला मनुष्य
खुश खोकर दुःख ही दुःख झेलकर 
कफन ओड जलनेवाला या
कब्रिस्तान में कीड़े -मकोड़े के आहार .
कबीर का एक दोहा-
माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे,
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे ।
कहते हैं मनुष्य बुद्धिमान पर
न जानता है अपना अंत .पर
जानता है अंत होगा ही.
ऐसी हालत में इतना इठलाना .
इतने मनोभाव ,इतने क्रोध .
अगर मृत्यु नहीं तो
क्या होगा मानव हाल.

बुढापा पाकर खोकर मुक्ति.

जवानी दीवानी, 
बुढापे में बदल गया .
जिंदगी का यथार्थ दिख रहा.
क्या करें ?मन तो जवानी. 
अपने को ताकतवर
मानता रहता.
कितना इठलाता ,
अब किसका न रहा.
कहीं से गीत ..
जिंदगी और कुछ भी नहीं,
कुछ खोकर पाना है,
कुछ पाकर खोना है.
शैशव पाकर, खोकर बचपन.
बचपन पाकर खोकर जवानी
जवानी पाकर खोकर बुढापा
बुढापा पाकर खोकर मुक्ति.
स्वरचित अनंतकृष्णन द्वारा

मूक साधना

वाह ! माली जी श्री युक्त मालीजी !
नरसिम्ह प्रहलाद !
मूक साधना में 
जगत का कल्याण 
उज्जवलित.
सूरज न चमकते तो
उदर पूर्ती असंभव
जग की ,
सूर्योदय -सूर्यास्त ,
मध्याह्न ताप
आदी और अंत
आदी में कोलाहाल ,
अस्त में मधुर चहचहाहट,
फिर चुप चुप चुप.
सूरज ! अकेले दीखता है दिन में ,
रोशनी में तारे छिप छिप.
अदृश्य पर भरोसा नहीं ,
दृश्य पर भले ही मिथ्या हो ,
सत्य जानने मूक साधना.

कुछ कही ,कुछ अनकही बातें

मन मानता नहीं 
कुमन की बात।
सुमन तो सूख जाता है।
दमन के कारण।
वामन के रूप में धोखा।
बामन के रूप में धोखा।
माया मची संसार।
कुछ कही कुछ अनकही बातें।