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Sunday, June 24, 2018

बाह्याडंबर

पराशर गुरुकुल में एक दिन.
 मैसूर से लगभग 15 कि. मा. की दूरी पर
बेलुकगोला में   नरसिंह स्वामी
के अनुग्रह  और उनके भक्त के
अथक परिश्रम  से गरीब ब्राह्मण
बच्चों को  आधुनिक पाठ्यक्रम और वेद मित्रों की शिक्षा  भी दी जाती है.
2003में स्थापित इस संस्था  में
अब लगभग 60 और कालेज में पढनेवाले छात्र भी हैं.
हर साल सकल लोगों की रक्षा  ,स्वास्थ्य, धन वृद्धि  के लिए
यज्ञ-होम-हवन आदि बडी श्रद्धा  से करते हैं.
ईश्वर के अनुग्रह  से 2018ई.
 मई 25 तारीख को एक दिन  वहाँ ठहरा. वह स्थान आनंदप्रद  रहा.
वहाँ के दृश्य






जपो जपो

प्रातःकालीन प्रणाम.
इनिय कालै  वणक्कम.
 हमारे मन में चाहिए  संयम.
इच्छा शक्ति चाहिए.
ईश्वर भक्ति चाहिए.
ज्ञान  शक्ति चाहिए
क्रिया शक्ति चाहिए.
तीनों  शक्तियाँ प्रदान करने
ईश्वरीय अनुग्रह चाहिए.
तब तो  हमें क्या करना चाहिए
ईश्वर  पर भरोसा चाहिए.
मंत्र तंत्र नहीं जानते,
ऐसा  सोच नहीं चाहिए.
 केवल सदाचार संयम  का बल,
ईश्वर के नाम जपना
मनोकामनाएँ पूरी होने का सरल मार्ग.
बोलो भजो जपो ध्यान में लगो.
 ऊँ गणेशाय नमः ऊँ कार्तिकेयाय नमः ऊँ नमः शिवाय ओम दुर्गायै नमः.
जपो जपो हमेशा,
मन लगाओ,काम में लगो
सत्य कर्तव्य पालन, सदाचार
नाम जपो
 पाओवाँछित फल.
तजो लौकिक इच्छाएँ.
अलौकिक  चाहें में  मन लगा.
सपरिवार  जिओ.
विषय वासना से दूर रहना.
जपो जपो जपो
,ऊँ गणेशाय नमः ऊँ कार्तिकेयाय नमः ऊँ नमः शिवाय ओम दुर्गायै नमः

शीर्षक --- भजन

 भजन :

  जीवन में  भला 
 चाहते हो ?
 तो करो भजन.
अल्ला पसंद  है तो
अल्ला का नाम जपो.
नाम जपने से नहीं ,
सुकर्म करने से ,
सच्चे आल्ला के भक्त अम्मीर सकुशल.
आतंकवादी हथियारे मुसलमान
मुखोटा पहन छिप छिप जीवन.
खत्ल  करो , अल्ला का रहम पाओ
कुरआन  ने न कहा.
इबादत करो ,
ईमान से रहो.
मुहब्बत करो ,
मारना -पीटना ,
खुद को ही जीना
ऐसा नहीं कहा कुरान .
ख़ुदा  के चाहक बनना है तो
खुद को सुधारों .
दूसरों के विनाश न अपना विकास
यह तो नहीं चैन का मार्ग.
चैन की जिन्दगी चाहते हो तो
अल्ला का नाम लो,
करो ,भलाई सब की.
आप भला तो जग भला.
मुग़ल बनो , आतंकवादी मुग़ल बनना
हमेशा केलिए खतरा और बेचैनी.




Thursday, June 14, 2018



  


आँसू

 
आंसू कितने प्रकार ? 
मगर मच्छ आँसू? 
कैकेयी के आँसू?
आभूषण के लिए आँसू ?
चोरी होने के बाद आंसू?
चोर के नकली आँसू?
अध्यापक के मार से
 बचने के लिए आँसू?

पुलिस से बचने के लिए आँसू?
पति के बिछुड़ने पर आँसू?
मृत्यु पर आँसू?
आनंदास्रु?
दर्द के कारण आँसू?
किस आँसू पर कैसी सज़ा?
शिशु के रुदन और आँसू
भूख मिटाते .
पर नकली  असली आँसुओं  में
धर्म संकट !!

Wednesday, June 13, 2018

स्वार्थ भक्ति.

हर मनुष्य में स्वार्थ ,भले  ही  वह भक्त हो .
अल्ला  सब का मालिक पर अपनाओ
मुग़ल धर्म.

जीसुस सब के रक्षक ,पर ईसाई बनो .

शिव सबके रक्षक पर शिव भक्त बनो.
विष्णु  तेरे  रक्षक,विष्णु भक्त बनो .

हर भगवान  हर एक मार्ग , पर सब के रक्षक .

खुदा ,भगवान , कैसे सब के रक्षक .

Saturday, June 9, 2018

सूक्ष्म जंतु

सब को सादर प्रणाम .
आज  के मनोविचार
मनोविकार  ही मन
चंचल  के मूल कारण है.
मनुष्य जो कुछ देखता है,
उन्हें  पाने को लिए  तडपता है.
ईश्वर के सृजन में  एक रूपता नहीं है.
काँटा ज्यादा है, फूल कम.
मच्छर ज्यादा है, मनुष्य को चैन की नींद सोने नहीं देते.
आकार तो मच्छरों   के अति छोटा.
खटमल अति छोटा, पर नींद हराम.
बिच्छू  छोटा सा बडा मनुष्य की तुलना में अति छोटा .
कितने कीटाणु है, अति सूक्ष्म ,वे सताते हैं.
हाथी को अपने काबू में नचानेवाले मनुष्य
मच्छरों  के पाल नहीं सकता, काबू में रख नहीं सकता.
कर्ण   को शाप  के मूल में एक छोटा सा भ्रमर.
अलि,तितलियाँ, मधु मक्खियाँ न तो बडे बडे वृक्ष नहीं पनप सकते.  मकरंद  केसर जुड़े के मूल में
इन छोटे जीवों की  देन अधिक है.

तिनका
एक  कविता है.
मनुष्य के घमंड दूर होने एक तिनका आँखों में पड रह जाता  तो चतुर मनुष्य की परेशानी तिनका जब तक
 आँख से बाहर नहीं आता, तब तक दूर नहीं होती.
ज़रा सोचिए..  मनुष्य की हालत.
ध्यान  रखिए, हम गलत मार्ग अपनाएँगे तो हम तो दुख
 देने सूक्ष्म  जंतुओं के भी ईश्वर ने सृष्टि की है.

Thursday, June 7, 2018

भगवान से मिलने का वरदान



  आज  मुख पुस्तिका में   तमिल में  पढी  कहानी  का सार.


    भगवान   के    दर्शन

 
एक दिन किसी देश  के  राजा के सुशासन  से खुश होकर

भगवान   ने  अपने दर्शन दिए. राजा खुश हो गए.   राजा  हमेशा  जन हित के सपने देखा  करते  थे .

 उन्होंने  भगवान से  एक  वर  माँगा.
भगवान खुशी  से  देने तैयार हो गए .

 राजा ने वर  माँगा  कि  मेरे देश  की  सारी  जनता  को आप  अपने  दर्शन    दीजिये.   भगवान सबको दर्शन देने

सन्नद्ध हो गए.

भगवान  ने  कहा --कल तुम अपनी  सारी प्रजा  सहित पहाड़  के शिखर  पर  आ जाओ. मैं  एक साथ सब के दर्शन देने  तैयार हूँ.

  राजा अत्यंत प्रसन्नता  के साथ राजमहल में पहुंचे.
 देश  भर में ढिंढोरा  पिटवाया  कि कल सब के सब
ईश्वर के दर्शन  और साक्षकार  के  लिए  पहाड़  पर आ जाइए.  पर्वत  पर   ईश्वर  के  दर्शन  मिलेंगे.

 दुसरे दिन  सब के सब  भगवान  से मिलने पहाड़ पर चढ़ने लगे.  थोड़ी  दूर चढ़ने  पर ताम्बे  के धातु मिले. कुछ लोग  ऊपर चढ़ना छोड़ ताम्बे की धातु जमा करने में   लग  गए.
बाकी लोग ऊपर चढ़ने  लगे. थोड़ी दूर के ऊपर  चढ़ते  ही
चांदी के ढेर दीख पड़े. चांदी के  देखते ही और बाकी लोग
चांदी एकत्रित करने में जुट गए.

राजा ,रानी ,सेनापति और बाकी लोग आगे बढे. थोड़ी दूर  और आगे बढ़ते  ही सोने के ढेर  मिले. जो आये उनमे अधिकांश लोग  स्वर्ण  जमा  करने लग  गए.
अब  केवल राजा,रानी ,सेनापति ,मंत्री ही आगे बढे.
थोड़ी दूर के  आगे बढ़ते  ही   चमकते हीरे के ढेर मिले. सिवा  राजा  के   बाकी सब  रानी भी हीरे इकट्ठा करने चले  गए.
अब  केवल  राजा  ही  अकेले  आगे बढे. भगवान  वहां  खड़े होकर  मुस्कुरा रहे  थे.
 राजा  ने भगवान के चरण पर मस्तक रखकर प्रणाम किया.

भगवान  ने  कहा--मैं  सर्व व्यापी हूँ . जगत रक्षक हूँ.
सब के  दर्शन देने  तैयार हूँ . पर जनता भौतिक  सुख  के  सामने  मेरा कोई महत्त्व न देती. माया मोह में फँस जाती.
मैं  क्या  करूँ?